सत्यमेव जयते
3/5
पर्दे पर : 15 अगस्त 2018
डायरेक्टर : मिलाप मिलन झावेरी
संगीत : साजिद वाजिद, तनिष्क बागची, रोचक कोहली, अर्को प्रवो मुखर्जी, संजॉय चौधरी
कलाकार : जॉन अब्राहम, मनोज वाजपेयी, अमृुता खानवलकर
शैली : एक्शन, देशभक्ति
यूजर रेटिंग :
0/5
Rate this movie

MOVIE REVIEW : 90's के एक्शन ड्रामा की याद दिला देती है 'सत्यमेव जयते'

एक आदमी जो पुलिस वालों को मार रहा है और इसे वो करप्शन के खिलाफ अपनी लड़ाई मानता है. एक पुलिसवाला जो इस आदमी को रोकना चाहता है, इन दोनों के बीच की लड़ाई है 'सत्यमेव जयते'

News18Hindi
Updated: August 15, 2018, 12:57 PM IST
MOVIE REVIEW : 90's के एक्शन ड्रामा की याद दिला देती है 'सत्यमेव जयते'
सत्यमेव जयते आज रिलीज़ हो गई है और इस फिल्म का मुकाबला अक्षय कुमार की गोल्ड से है
News18Hindi
Updated: August 15, 2018, 12:57 PM IST
किसी ज़माने में दो अच्छे दोस्त रहे अक्षय कुमार और जॉन अब्राहम अब साथ काम नहीं करते. ऐसा माना जाता है कि 'वेलकम' फ्रेंचाइज़ी में अक्षय की जगह जॉन के लेने के बाद से दोनों के बीच कुछ ठीक नहीं है. आखिरी बार फिल्म 'ढिशूम' में एकसाथ नज़र आए ये दोनों कलाकार 'देसी बॉयज़', 'गरम मसाला' और 'हाउसफुल' जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं. लेकिन इस बार वो साथ नहीं बल्कि आमने-सामने हैं.

जहां अक्षय कुमार हॉकी खिलाड़ी और कोच तपन दास की बायोपिक के साथ इस 15 अगस्त को भुनाने के लिए मैदान में उतरे हैं वहीं जॉन अब्राहम और मनोज वाजपेयी के पास 'सत्यमेव जयते' है.

पढ़िए 'गोल्ड' का रिव्यू 

इस फिल्म की कहानी बेहद सरल है. पुलिस में काम करने वाले अपने पिता को झूठे करप्शन के आरोप में फंस कर आत्महत्या करते देखने वाले वीर (जॉन अब्राहम) का एक ही मकसद है. पुलिस फोर्स में मौजूद करप्ट लोगों को सिरे से हटाना. करप्ट पुलिसवालों को ज़िंदा जला कर वो सत्य की जीत करना चाहता है. इस हत्यारे को रोकने के लिए डीसीपी शिवांश (मनोज वाजपेयी) को काम पर लगाया जाता है और चूहे बिल्ली के इस खेल में कई पुलिसवालों की मौत के बाद, जो होता है उसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

मिलाप मिलन झावेरी इससे पहले 'मस्ती', 'ग्रैंड मस्ती' और 'एक विलेन' जैसी फिल्में बना चुके हैं ऐसे में देशभक्ति के साथ उनका ये एक्सपेरिमेंट हैरान करता है. हालांकि देशभक्ति फिल्मों के एक्सपर्ट मनोज वाजपेयी (एलओसी कारगिल, नाम शबाना, अय्यारी, स्पेशल 26) और जॉन अब्राहम (मद्रास कैफे, परमाणु, फोर्स) इस फिल्म में मौजूद हैं.

आप इस फिल्म को देखेंगे तो आप 90 के एक्शन सिनेमा को याद कर पाएंगे. इस फिल्म के मूल प्लॉट में अक्षय कुमार की फिल्म 'गब्बर इज़ बैक' का हैंगओवर आपको दिखाई देगा लेकिन क्योंकि मिलन को इससे पहले देशभक्ति फिल्म बनाने का एक्सपीरियेंस नहीं है शुरुआती घंटे में ही फिल्म बिखरने लगती है.

फिल्म में नोरा फतेही का दिलबर गाना अपना काम ठीक से करता है और इस गाने में वो सुपरहॉट अवतार में हैं. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी फिल्म का साथ देता है लेकिन बार बार एक ही संदेश, हीरो का एक ही मकसद आपको बोर करता है. हालांकि जॉन और मनोज वाजपेयी के डॉयलॉग सीटी बजाने लायक हैं और फिर इस फिल्म में जॉन का मसल पॉवर आपको कल के जिम के लिए प्रेरित करता है.

मनोज वाजपेयी फिल्म में वही करते हैं जो वो करने में एक्सपर्ट हैं. वो आपको बांध लेते हैं और कमज़ोर स्क्रिप्ट से आपका मज़ा खराब नहीं होने देते. जहां जॉन एक्शन में हिट हैं, मनोज अपनी प्रेजेंस से ही कमाल कर देते हैं. फिल्म में डेब्यू कर रही आयशा शर्मा अच्छा अभिनय करती हैं और अपने किरदार में अच्छा काम करती हैं.

इस फिल्म का सबसे बड़ा माइनस प्वाइंट है फिल्म की प्रेडिक्टेबल कहानी. हालांकि फिल्म एक मसाला एंटरटेनर है और अगर आपको परमाणु अच्छी लगी थी तो ये फिल्म आपको बहुत पसंद आने वाली है. हालांकि अगर आप लॉजिकल सिनेमा देखने वालों में से है तो ये फिल्म आपको आधे घंटे में ही परेशान कर सकती है. ये मारधाड़ से भरपूर एक एक्शन ड्रामा है और अगर आपको एक्शन पसंद है तो गो फॉर इट, वर्ना गोल्ड इज़ गोल्ड!

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
2.5/5
स्क्रिनप्ल :
2.5/5
डायरेक्शन :
3/5
संगीत :
2.5/5
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर