गोल्ड : द ड्रीम ऑफ़ ए नेशन
4/5
पर्दे पर : 15 अगस्त 2018
डायरेक्टर : रीमा कागती
संगीत : सचिन जिगर, अर्को प्रवो मुखर्जी, तनिष्क बागची
कलाकार : अक्षय कुमार, मौनी रॉय, कुणाल कपूर, अमित साध
शैली : बायोपिक, स्पोर्टस
यूजर रेटिंग :
0/5
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MOVIE REVIEW : अक्षय कुमार और मौनी रॉय ने दिया दर्शकों को स्वतंत्रता दिवस का 'गोल्डन' तोहफ़ा

गोल्ड फिल्म अक्षय कुमार को अभिनय करने की पूरी जगह देती है और अक्षय अपने अभिनय को जमाते भी हैं|

News18Hindi
Updated: September 27, 2018, 4:13 PM IST
MOVIE REVIEW : अक्षय कुमार और मौनी रॉय ने दिया दर्शकों को स्वतंत्रता दिवस का 'गोल्डन' तोहफ़ा
गोल्ड फिल्म में अक्षय कुमार लीड रोल कर रहे हैं
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Updated: September 27, 2018, 4:13 PM IST
फिल्म समीक्षक - रोहित वत्स

साल 1948 के ओलिंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम सिर्फ़ जीतने के लिए नहीं खेली थी, वो खेले थे 200 साल की ब्रिटिश हुकूमत का कलंक धोने के लिए और इसके लिए लंदन से अच्छा वेन्यू हो भी नहीं सकता था. गुस्सा चरम था, छोटी सी बात पर लोग लड़ जाने को तैयार थे, इतिहास का निर्माण हो रहा था. भारत बनाम ब्रिटेन और वो भी उनके ही घर में. यहां लोग भी अपने नहीं थे लेकिन अच्छा खेलने वाले को प्रशंसा मिलनी ही थी.

1936 में ऐसा ही मौका तब आया था जब ब्रिटिश इंडिया की टीम ने बर्लिन में जर्मनी की टीम को हॉकी के फाइनल मैच में धूल चटा दी थी. ये दिखाता है कि कैसे एक सपने को हकीकत बनने में पीढ़ी बदल जाती है लेकिन कैसे इतिहास खुद को दोहराता है. इस तरह की घटनाओं की ज़िक्र ही गोल्ड को एक जबर्दस्त फिल्म बनाता है जो आपके दिल में थ्रिल पैदा करती है.

तपन दास (अक्षय कुमार) अपने अंदर एक विरोधाभास में जी रहे हैं. पूरी फिल्म में उन्हें 'पागल बंगाली' कहा जाता है और वो टॉम क्रूज़ की फिल्म जैरी मैग्वायर की याद दिलाते हैं. एक टीम मैनेजर के तौर पर उनके पास कमाल की तकनीक और अनुभव है और वो अपनी टीम के खिलाड़ियों के लिए वो शख्स हैं जो समाज में कटे और टूटे इन खिलाड़ियों को अपने वतन से दूर एक टीम के तौर पर खेलना सिखाता है.

रघुबीर प्रताप सिंह (अमित साध) टीम के ड्रिबलर हैं और एक राजशाही के युवा शहज़ादे भी हैं और टीम के दूसरे खिलाड़ी हिम्मत सिंह (सनी कौशल) से उन्हें परेशानी है क्योंकि वो बात बात पर लड़ता है. टीम में दूसरे खिलाड़ी भी हैं जो अभी भी हॉकी की स्टिक को दिल से अपना नहीं पाए हैं लेकिन तपन दास के सपने के लिए वो एकसाथ हैं और वो सपना है आज़ाद भारत का झंडा दूसरे देशों के झंडे से उंचा फहराते देखना.

हनीमून ट्रैव्लस और तलाश जैसी फिल्में बना चुकी रीमा कागती की इस फिल्म की स्क्रिप्ट प्रेडिक्टेबल लगती है लेकिन ये एक देशभक्ति फिल्म बनाने के लिए आदर्श प्लॉट है और यहां से निर्देशक के हाथ में है कि वो इसे 'चक दे इंडिया' बनाना चाहती हैं या फिर कुछ और. लेकिन वो एक बेहतरीन रास्ता चुनती हैं और अक्षय कुमार की ब्रैंडेड कॉमेडी से लेकर इमोशनल गानों तक को इस फिल्म में जिस तरह से पिरोया गया है वो अखरता नहीं है.

अगर सही कहा जाए तो गोल्ड के पहले 30 मिनट इस साल की सभी फिल्मों में सबसे बेहतर स्क्रीनप्ले को दिखाते हैं. आप सभी किरदारों से मिल लेते हैं, उनकी परेशानियों को समझ लेते हैं और इसके लिए एक बार भी कोई ज़रुरत से ज्यादा नाटकीय चित्रण नहीं किया जाता. इस फिल्म को आप 'चक दे इंडिया' से कई बार कंपेयर करेंगे लेकिन जहां उस फिल्म में हॉकी पर पूरा फोकस था वहीं इस फिल्म में हॉकी, क्षेत्रवाद, जातिवाद और टीम में अपनी जगह को लेकर खिलाड़ियों के बीच भेदभाव को बहुत ध्यान से उकेरा गया है. रीमा कागती अपनी टीम के खिलाड़ियों की ज़िंदगी के माध्यम से बहुत सारे ऐसे मुद्दों को उठाती हैं जो हॉकी से आगे हैं और बहुत समय बाद एक ऐसी फिल्म जिसमें देशभक्ति है लेकिन पाकिस्तान नहीं, हैरान भी करती है और अच्छा भी लगता है.
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अक्षय कुमार के लिए ये 'पैडमैन' और 'टॉयलेट एक प्रेमकथा' का ही एक्सटेंशन है. वह दूसरे किरदारों के साथ घुलमिल जाने की कला के मास्टर हैं. फिल्म में अक्षय जैसे सितारे के होने से इसकी कहानी पर वो छा भी सकते थे लेकिन वो अपने साथ के किरदारों को पनपने देते हैं और कहीं भी फिल्म पर हावी नहीं होते. ये फिल्म उनके ईर्द गिर्द नहीं बल्कि खेल के ईर्द गिर्द घूमती है और यही इस फिल्म को अलग बना देता है. वो सुपरस्टार नहीं है, राउडी नहीं हैं, एक आम आदमी है जो अपने बस में मौजूद हर कोशिश कर रहा है और ये दिल को छूता है.

कभी मौनी तो कभी कुणाल कपूर इस फिल्म में अक्षय से ज्यादा ताकतवर भूमिका में नज़र आते हैं. हालांकि इस फिल्म का अंत आप शुरुआत से जानते हैं तो कई जगह आप पहले से अंदाज़ा लगा लेते हैं लेकिन इससे फिल्म का रोमांच कम नहीं होता. 153 मिनट की इस फिल्म में पुराना समय दिखाने के लिए ग्राफिक्स का इस्तेमाल हुआ है और वो इतने अच्छे नहीं हैं लेकिन कलाकारों की एक्टिंग इस तरफ आपका ध्यान जाने नहीं देंगी. अक्षय इस फिल्म में अपने टॉप पर हैं और इस स्वतंत्रता दिवस पर आप ये फिल्म देख सकते हैं.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
3.5/5
स्क्रिनप्ल :
4.5/5
डायरेक्शन :
4.5/5
संगीत :
3.5/5
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