हसीना पारकर
1.5/5
पर्दे पर : 22 सितंबर 2017
डायरेक्टर : अपूर्व लाखिया
संगीत : सचिन - जिगर
कलाकार : श्रद्धा कपूर, सिद्धांत कपूर, अंकुर भाटिया
शैली : एक्शन, बायोपिक, थ्रिलर
यूजर रेटिंग :
0/5
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FILM REVIEW : स्क्रीन पर कमज़ोर पड़ जाती हैं दाऊद की बहन 'हसीना'!

फ़िल्म हसीना पारकर में वो बात नहीं है जो आपको सिनेमाघरों तक ले जाए.

News18Hindi
Updated: April 16, 2018, 12:43 PM IST
FILM REVIEW : स्क्रीन पर कमज़ोर पड़ जाती हैं दाऊद की बहन 'हसीना'!
हसीना पारकर फिल्म रिव्यु
News18Hindi
Updated: April 16, 2018, 12:43 PM IST
फिल्ममेकर अपूर्व लाखिया 'शूटआउट ऐट लोखंडवाला' जैसी सुपरहिट फ़िल्म बना चुके हैं और उनकी फ़िल्म 'हसीना पारकर' से भी यही उम्मीद की जा रही है. लेकिन अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद की बहन के रोल में श्रद्धा ऐसा कुछ नहीं कर पाती जो उन्हें बॉलीवुड की टॉप लिस्ट में लाकर खड़ा करता.

श्रद्धा की डॉयलॉग डिलीवरी एक परेशानी वाला हिस्सा रही है और यहां तो उन्हें मुंह फुला कर डॉयलॉग बोलने थे, जाहिर है कि वो और मुश्किल में नज़र आईं.

अपूर्व के पास पहले अमिताभ बच्चन, संजय दत्त और इरफान जैसे कलाकार रहे हैं जिनसे उन्हें एक्टिंग करवानी थी लेकिन इस कोर्ट रूम ड्रामा में उनके पास श्रद्धा कपूर थी.

कहानी

फिल्म की कहानी भारत से भागे हुए डॉन दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर की ज़िंदगी को दिखाती है जो कथित तौर पर भारत में दाऊद का नेटवर्क चलाती थी. वैसे ये कहानी भी दाऊद के बारे में ही है बस फ़र्क इतना है कि फिल्म को दाऊद की बहन हसीना के नज़रिए से पेश किया गया है.

फ़िल्म इस पहलू पर भी जोर देती है कि भले ही हसीना और दाऊद के भाई इक़बाल कासकर पाक-साफ नहीं थे, लेकिन डी कंपनी से उनके रिश्तों के चलते उन्हें बहुत कुछ सहना पड़ा.

फ़िल्म के प्लॉट में यहीं से कन्फ्यूजन आ जाता है क्योंकि समझ नहीं आता की निर्देशक दाऊद और उसके परिवार को गलत दिखाना चाहते हैं या उनसे सहानुभूति दर्शाना चाहते हैं.

निर्देशन
फिल्म का निर्देशन कमज़ोर है और सुरेश नायर की लेखनी में कमी दिखती है. फ़िल्म में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आता जो आपने देखा या सुना न हो. अगर आपने दाऊद से जुड़ी दो तीन किताबें पढ़ी हैं तो हो सकता है कि आपके पास इस फ़िल्म से ज्यादा सूचना हो.

फिल्म कभी दाऊद और उसके परिवार के पक्ष में झुकी नज़र आती है और कभी कानून के पक्ष में लेकिन स्पष्ट नहीं होता कि वह सीधे तौर पर क्या कहना चाहती है. सभी लोकेशन एक जैसे लगते हैं और पता नहीं चलता कि कौन सा इलाका नागपाड़ा है, कौन सा डोगरी, कौन सा भांडुप.

अभिनय
फ़िल्म का अभिनय इसकी कमज़ोर कड़ी है, मुंह में पान रख लेने से आपका चेहरा सूजा हुआ लग सकता है लेकिन एक्सप्रेशन उस पर आपको ही लाने पड़ते हैं.

दाऊद के रोल में सिद्धांत आज तक के बने सबसे कमज़ोर दाऊद लगते हैं, उनकी आवाज़ भी डब की गई है जिससे वो कम प्रभावी लगते हैं. हसीना पारकर के पति के किरदार इब्राहिम के लिए अंकुर भाटिया थोड़ा अच्छा अभिनय करते हैं लेकिन शायद निर्देशक और कहानी की उनसे ज्यादा मांग नहीं थी.

कुल मिलाकर इस फ़िल्म को सभी मुक्त फ़िल्म क्रिटिक्स की ओर से 2 या 2.5 स्टार ही मिले हैं और अगर फ़िल्म के संगीत को आप नाप लें तो वो 2.5 स्टार भी वो वापस ले लेंगे. सचिन जिगर इस फ़िल्म में अपने संगीत से निराश करते हैं.

हसीना पारकर को कायदे से संजय दत्त को टक्कर देनी थी लेकिन लगता है कि दाऊद भाई की इस फिल्मी बहन को मुन्नाभाई के आगे घुटने टेकने पड़ेंगे.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
1.5/5
स्क्रिनप्ल :
1/5
डायरेक्शन :
1/5
संगीत :
1.5/5
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