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इंडिया लॉकडाउन
इंडिया लॉकडाउन
2.5/5
पर्दे पर:2 दिसंबर 2022
डायरेक्टर : मधुर भंडारकर
संगीत :
कलाकार : प्रतीक बब्बर, अहाना कुमरा, श्वेता बसु प्रसाद, सई तम्हाणकर, प्रकाश बेलावड़ी
शैली : ड्रामा
यूजर रेटिंग :
0/5
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India Lockdown Review: जब अपने घरों में कैद हो गए लोग, लॉकडाउन की याद दिलाती है मधुर भंडारकर की फिल्म

प्रतीक बब्बर 'इंडिया लॉकडाउन' में प्रवासी की भूमिका में हैं. (फोटो साभारः इंस्टाग्रामः @_prat)

प्रतीक बब्बर 'इंडिया लॉकडाउन' में प्रवासी की भूमिका में हैं. (फोटो साभारः इंस्टाग्रामः @_prat)

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मुंबईः कोरोना के दस्तक देने के बाद देश में लगे लॉकडाउन की याद लोगों के दिलों-दिमाग में अब तक ताजा हैं और इस बीच मधुर भंडारकर (Madhur Bhandarkar) की नई फिल्म, ‘इंडिया लॉकडाउन’ (India Lockdown) ने भी दस्तक दे दी है. फिल्म ने दर्शकों को एक बार फिर कोरोना वायरस महामारी के दौरान भारत के समस्त वर्ग द्वारा झेले गए दर्दनाक लंबे लॉकडाउन की फिर याद दिला दी है. फिल्म में चार कहानियां दिखाई गई हैं, जो कहीं ना कहीं एक साथ जुड़े हुए हैं.

इंडिया लॉकडाउन के जरिए मधुर भंडारकर ने यह बताने की कोशिश की है कि कैसे समाज के अलग-अलग वर्ग के लोग घातक बीमारी के डर से पीड़ित थे. लोगों को यहां तक नहीं पता था कि खाना कहां से आएगा और कहां से काम चलेगा.

फिल्म की कहानी
इंडिया लॉकडाउन के जरिए मधुर भंडारकर उस दौर की कहानी लेकर आए हैं, जब पूरा देश अपने-अपने घर में कैद हो चुका था. समय था कोरोना महामारी के चलते देशभर में लगे लॉकडाउन का. जब लोगों के लिए रोजी-रोटी के लाले पड़ गए थे. प्रतीक बब्बर ने इस फिल्म में एक दिहाड़ी मजदूर की भूमिका निभाई है, जिसका नाम माधव है. माधव अपनी पत्नी फूलमती (साई ताम्हणकर) जो एक घरेलू सहायिका की नौकरी करती है, के साथ लॉकडाउन के चलते अपने गांव से दूर मुंबई में बेबसी के जाल में फंस जाते हैं. ना तो खाने का साधन है और ना आय का. माधव और उसकी पत्नी के साथ दो छोटे बच्चे भी हैं.

माधव अपने परिवार के साथ बिहार जाने का फैसला करता है, लेकिन यह फैसला उसके लिए तब कष्टप्रद हो जाता है, जब ना तो उसे जाने के लिए कोई साधन मिलता है और ना ही पर्याप्त भोजन होता है. भुखमरी और अत्यधिक थकान उन्हें अकल्पनीय करने के लिए प्रेरित करती है.

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दूसरी तरफ है फूलमती का मालिक नागेश्वर राव (प्रकाश बेलावड़ी) जो उसकी मदद कर पाने में असमर्थ है, क्योंकि उसकी सोसाइटी ने नौकरों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया है. वह अपनी गर्भवती बेटी के साथ हैदराबाद जाने के लिए गाड़ी चला रहा है इस दौरान उसे भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. एक कहानी है कमाठीपुरा में वैश्यावृत्ति करने वाली लड़कियों की. मेहरु (श्वेता बसु प्रसाद) कमाठीपुरा में रहने वाली लड़की है, जिसकी पूरी कमाई कोरोना लॉकडाउन के चलते बंद हो जाती है. कमाई के लिए वह एक नया तरीका अपनाती है.

अब आती है कहानी मून अल्वेस (अहाना कुमरा) की, जो बिलकुल अकेली है और अपने असाइनमेंट को याद करती है. अपनी यूनिफॉर्म पहनकर अपनी कंपनी ढूंढने के लिए तैयार हो जाती है. दूसरी ओर उसका पड़ोसी भी अकेला है और अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए परेशान है. मधुर ने कुछ ऐसे दृश्य रचे हैं, जो चौंकाता, डराता और रुलाता है. प्रकाश बेलावड़ी का ट्रेक छोड़कर मधुर की रची बाकी की चारों कहानियां शानदार हैं. लेकिन, इसमें कहीं ना कहीं भारत में लगे लॉकडाउन की वह विविधता नजर नहीं आती, जिसकी दर्शकों को उम्मीद थी.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी:
/5
स्क्रिनप्ल:
/5
डायरेक्शन:
/5
संगीत:
/5

Tags: Bollywood, Madhur bhandarkar, Prateik Babbar

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