'Hello Charlie' FILM REVIEW: हेलो छोड़िए, चार्ली को सीधे गुडबाय कहिए

हेलो चार्ली (Hello Charlie) देखने के बाद, उम्मीदों को गोरिल्ला चीर-फाड़ के कहीं फेंक देता हैं.

हेलो चार्ली (Hello Charlie) देखने के बाद, उम्मीदों को गोरिल्ला चीर-फाड़ के कहीं फेंक देता हैं.

भारतीय टेलीविजन इतिहास के संभवतः पहले कॉमेडी टैलेंट हंट के निर्देशक पंकज सारस्वत जब फिल्म बनाते हैं आपकी उम्मीदें और बढ़ जाती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 18, 2021, 12:00 PM IST
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फिल्म: हेलो चार्ली

डायरेक्टर: पंकज सारस्वत

ड्यूरेशन: 102 मिनिट

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फिल्म में रणबीर कपूर की बुआ के बेटे आदर कपूर बतौर हीरो हों तो आपकी उम्मीद थोड़ी ही बढ़ती हैं. भारतीय टेलीविजन इतिहास के संभवतः पहले कॉमेडी टैलेंट हंट के निर्देशक पंकज सारस्वत जब फिल्म बनाते हैं आपकी उम्मीदें और बढ़ जाती हैं. फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की एक्सेल एंटरटेनमेंट प्रोडूसर हों तो आपकी उम्मीदें और बढ़ जाती हैं. हेलो चार्ली (Hello Charlie) देखने के बाद, उम्मीदों को गोरिल्ला चीर-फाड़ के कहीं फेंक देता हैं.

फिल्म निहायत ही मूर्खतापूर्ण और बचकानी है. जैकी श्रॉफ एक घोटालेबाज बिजनेसमैन हैं, और देश छोड़ने के फिराक में हैं. उनकी गर्लफ्रेंड एलनाज उन्हें गोरिल्ला की वेशभूषा पहनाकर, देश से निकालने का प्लान बनाती है. दूसरी तरफ हैं फिल्म के हीरो चिराग रस्तोगी चार्ली (आदर जैन) जो कि बुरी किस्मत के सबसे अच्छे दोस्त हैं. कोई काम करने जाते हैं और वो सफल नहीं होता. चार्ली को इस गोरिल्ला को गंतव्य तक पहुंचाने का काम दिया जाता है. इसी बीच, एक प्लेन क्रैश हो जाता है और उसमें से एक असली गोरिल्ला छूट कर जंगल में भाग जाता है. बाकी कहानी में दर्शकों की बुद्धि पर कुठाराघात किया जा रहा है इसलिए लिखने की जरूरत नहीं है.

सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि पंकज सारस्वत ने ये फिल्म बनाने का निर्णय क्यों लिया होगा? समझ से परे हैं. पंकज को हमने हॉटस्टार के शो क्रिमिनल जस्टिस में एसीपी रघु सालियन की भूमिका में देखा था. ये फिल्म लिखने और बनाने की प्रेरणा उन्हें कहां से मिली ये समझना नामुमकिन है. फिल्म के प्रोड्यूसर हैं एक्सेल एंटरटेनमेंट यानी फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी जिन्होंने दिल चाहता है, जिंदगी न मिलेगी दोबारा, फुकरे, फुकरे रिटर्न्स, डॉन और गली बॉय जैसी फिल्में बनाई हैं. ऐसी क्या मजबूरी रही होगी कि उन्होंने इस स्क्रिप्ट को सुना और चुना, और फिल्म बनाने का निर्णय भी लिया.



फिल्म में आदर जैन बतौर हीरो लौटे हैं. वो पहले एक्सेल एंटरटेनमेंट की फिल्म "कैदी बैंड" में काम कर चुके हैं. अपनी गर्लफ्रेंड तारा सुतारिया और ममेरे भाई रणबीर कपूर की वजह से ज्यादा जाने जाते हैं. उन पर किस तरह का दबाव था कि उन्होंने ये फिल्म साइन की, इस तरह की स्क्रिप्ट स्वीकार की, इस तरह के रोल में रणबीर कपूर जैसी एक्टिंग की और फिल्म में साइड हीरो का किरदार निभाना स्वीकार किया. आदर के लिए बहुत जरूरी है कि वो रणबीर कपूर की नकल न करें, और न ही उनके जैसे किरदार तलाश करें. एक्टिंग में अभी आदर को बहुत काम करने पड़ेगा, कॉमेडी फिल्म है मगर उनकी टाइमिंग और डायलॉग डिलीवरी गड़बड़ है.

एडिटिंग से उन्हें बचाने की कोशिश की गई है. फिल्म की हीरोइन श्लोका पंडित हैं, पंडित जसराज के परिवार से सम्बंधित हैं. अभिनय कच्चा है, अगर रोल ठीक मिले तो काम कर लेंगी. इस फिल्म में भी ठीक ही काम किया है. जैकी श्रॉफ उर्फ गोरिल्ला से काफी उम्मीदें थी, निराश होंगे. बच्चों को पसंद आये ऐसा भी कुछ नहीं फिल्म में. गिरीश कुलकर्णी, राजपाल यादव, सिद्धांत कपूर और भरत गणेशपुरे को तकरीबन व्यर्थ ही किया गया है. न उनके किरदार उभर के आये हैं और ना ही उन्होंने कोई खास अभिनय किया है.

फिल्म का संगीत लचर है, पटकथा की तरह. एक भी दृश्य में बांध के रखने की क्षमता नहीं है. स्टोरी ऑफ़ मिस्टेकन आइडेंटिटी ऑफ़ गोरिल्ला सबको नज़र आता है और वो पूरी तरह से फ्लॉप हो जाता है. फिल्म 3 महीने में बन के तैयार हो गयी थी. वो नज़र भी आता है. फिल्म को बिना किसी उम्मीद के देखने का प्रयास करेंगे तब भी असफल ही होंगे. एक भी पंच ठीक से नहीं लगा है, एक भी शॉट में कुछ खासियत नहीं है, गाने बोरिंग हैं, अभिनय भी बस ठीक ही है और इन सब वजहों से फिल्म को गुडबाय कहना ज्यादा ठीक है बजाय के "हेलो चार्ली" कहने के. नहीं देखेंगे तो कुछ बिगड़ नहीं जाएगा. देख लेंगे तो कुछ जिंदीगी में इजाफा नहीं होगा.
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