• Home
  • »
  • News
  • »
  • entertainment
  • »
  • FILM REVIEW: 'मॉम' जो अपने बच्चों के लिए 'कुछ भी' कर सकती है!
मॉम
मॉम
3/5
पर्दे पर:7 जुलाई 2017
डायरेक्टर : रवि उद्यावर
संगीत : एआर रहमान
कलाकार : श्रीदेवी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, सजल खान
शैली : ड्रामा
यूजर रेटिंग :
0/5
Rate this movie

FILM REVIEW: 'मॉम' जो अपने बच्चों के लिए 'कुछ भी' कर सकती है!

image: official poster of mom

image: official poster of mom

फिल्म रिव्यू: कैसी है श्रीदेवी की फिल्म 'मॉम'

  • Share this:
'मॉम' यानि मां, मम्मी, आई, अम्मी. अपने बच्चों का खोया सुकून वापस लाने के लिए, बच्चों का प्यार पाने के लिए वो किस हद तक जा सकती है इसकी कोई लिमिट नहीं है.

श्रीदेवी की 300वीं फिल्म 'MOM' एक क्लासरूम से शुरू होकर बर्फ के मैदान में खत्म होने वाली एक इमोशनल जर्नी है.

हर परिवार में कोई ना कोई समस्या जरूर होती है. आपसी रिश्तों के ताने बाने संभालने के बीच अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए तो परिवार बिखर भी सकता है या एक भी हो सकता है.

लेकिन फिल्म में सिर्फ इतना ही नहीं है. एक स्कूल का लड़का है जो लड़की को क्लास में बैठे-बैठे 'गंदे वीडियो' भेजता है. पार्टी में लड़की उसके साथ डांस करने से मना कर देती है तो अपने भाई और उसके दोस्तों से साथ मिलकर लड़की को उठा ले जाता है. कई बार लड़की का रेप करने के बाद उसे नाले में फेंक कर चला जाता है.

लड़की की 'ना' और उसकी मां/ बायोलॉजी टीचर ने की उसकी बेइज्जती उसके ईगो को इस कदर हर्ट कर देती है कि रेप करते वक्त वो बार-बार कहता है, 'बुला अपनी मां को'.

फिर मां आती है और ऐसे आती है कि कोई नपुंसक बन जाता है तो किसी को लकवा मार जाता है.

इस फिल्म में दिल्ली है, असुरक्षित बच्चे हैं, परिवार का बिखरना फिर भी साथ होना है, बदला है, एक मां है लेकिन इस फिल्म में नया कुछ भी नहीं है.

फिल्म का ट्रीटमेंट शानदार है. फिल्म के ख़ूबसूरत सीन दर्शकों तक पहुंचाने के लिए निर्देशक ने डायलॉग्स और म्यूजिक का मोह त्यागकर फिल्म को एक अलग स्तर दे दिया है.

कहानी: 2.5 स्टार

फ़िल्म का प्लाट हाल ही में आई रवीना टंडन की कमबैक फिल्म 'मातृ' से काफी मिलता-जुलता है. बच्ची के रेप और उत्पीड़न के बाद कानून से हार चुकी मां गुनाहगारों को चुन-चुन के खत्म करती है.

सौतेली मां हमेशा 'सौतेली' नहीं होती, अपने प्यार से वह भी एक दिन 'MOM' का दर्जा हासिल कर ही लेती है, यह इस फिल्म का केंद्र है. देवकी सबरवाल आर्या के पापा की दूसरी पत्नी है.

देवकी आर्या की क्लास में बायोलॉजी भी पढ़ाती है. आर्या अपनी पहली मां को भूल नहीं पाई है, इसीलिए दूसरी मां को मां का दर्जा नहीं दे पाई है. वो घर में भी देवकी को मैम ही बोलती है. दोनों के बीच बहुत दूरियां हैं और देवकी कितनी भी कोशिश कर ले, फासले बढ़ते ही जा रहे हैं.

वैलेंटाइन डे की पार्टी में आर्या का एक क्लासमेट अपने बड़े भाई और कुछ दोस्तों के साथ आर्या का रेप करके उसे एक नाले में फेंक देता है. बुरी तरह घायल आर्या जब हॉस्पिटल लायी जाती है, उसके बचने की कोई उम्मीद भी नहीं दिखती.

पुलिस इंस्पेक्टर मैथ्यू फ्रांसिस यानि अक्षय खन्ना इस केस की तहकीकात कर रहे हैं. आरोपी पकड़े तो जाते हैं लेकिन सुबूतों के अभाव में छूट जाते हैं.

तब देवकी इस मामले को अपने हाथों में ले लेती है. इसमें उसकी मदद करता है प्राइवेट डिटेक्टिव डीके यानि नवाजुद्दीन सिद्दीकी. दोनों मिलकर एक-एक को चुनकर मारते हैं.

लेकिन आखिरी गुनाहगार को अपने हाथों से मारने की हिम्मत देवकी नहीं जुटा पा रही थी. पर फिर कुछ ऐसा होता है जिसका इंतजार उसे ना जाने कब से था, और एक के बाद एक कई गोलियां देवकी ने उस गुनहगार के सीने में उतरा दीं.

सगी और सौतेली माओं में जो अंतर बॉलीवुड निरूपा रॉय और ललिता पवार के समय से दिखाता आ रहा था, यह फिल्म उस पर मरहम जैसी लगती है. कहानी में कुछ भी नयापन और सस्पेंस ना होने के बावजूद बहुत इंटेंसिटी है. कहानी के लिए फिल्म 'मॉम' को हम 2.5 स्टार दे रहे हैं.

एक्टिंग: 4 स्टार

एक बेबस मां जब रोती है तो आसमान भी फट जाता है. Sridevi ने इस फिल्म में अपनी एक्टिंग से साबित कर दिया कि ये वाकई उनकी 300वीं फिल्म है. कहीं-कहीं पर हिंदी में उनका साउथ इंडियन लहजा कानों में थोड़ा सा खटकता है, लेकिन इसे वो अपनी एक्टिंग से बैलेंस कर ले जाती हैं. बेबसी और हिम्मत एक ही साथ उनके चेहरे पर देखना आपको भीतर से तोड़कर फिर जोड़ देता है.

फिर आते हैं डीके जी. नवाज्जुद्दीन सिद्दीकी की एक्टिंग के लिए अब उनके नाम के आगे भी 'जी' लगाना शुरू कर दिया जाना चाहिए. एक अधेड़ उम्र का कम बालों वाला, निकले दांत वाला डिटेक्टिव डीके. यह किरदार पूरा फिल्मी है.

कहता है, 'मन के आशीर्वाद और सनग्लासेज के बिना तो हम घर से निकलते ही नहीं.' एक-एक डायलॉग से साथ दर्शक नवाज से दूर और डीके से करीब होते जाते हैं. किरदार में इतना उतर जाना शायद नवाजुद्दीन सिद्दीकी ही कर सकते हैं. फिल्म में उनकी मौत शायद सदी की सबसे दुखद मौतों में गिनी जा सकती है.

अक्षय खन्ना एक कड़क पुलिस वाले हैं. क्राइम ब्रांच. जिसे पसंद नहीं कि उसके हिस्से का काम कोई और करे. सुबूत जुटाते भी हैं और मिटाते भी. लंबे समय बाद अक्षय को स्क्रीन पर देखना अच्छा लगता है.

सजल खान अपने किरदार में इतनी फिट लगी हैं कि लगता है, वो सजल नहीं आर्य ही हैं असल जिंदगी में भी. सौतेली मां से नफरत, सगी मां को मिस करना, रेप के बाद की उनकी आत्मा हिला देने वाली वो चीख! उम्मीद करनी चाहिए कि यह सजल की एक मात्र बॉलीवुड ना हो और उन्हें हमें आगे भी देखने का मौका मिले.

एक से एक कलाकार और अलग स्तर की एक्टिंग. इसीलिए एक्टिंग के लिए हम इस फिल्म को 4 स्टार दे रहे हैं.

सिनेमेटोग्राफी: 3 स्टार

कुछ ऑब्जेक्ट सिर्फ ऑब्जेक्ट नहीं होते स्क्रीन पर, वो जीवंत हो उठते हैं. जैसे इस फिल्म में पानी की बोतल. देवकी रोज रात में बोतल में पानी भरती है. फिर नल बंद कर देती है. ये एक रूटीन है. लेकिन बेटी की तकलीफ पर बेबस देवकी अब पानी का नल बंद नहीं करती. बोतल भर चुकी है, पानी बह रहा है. लेकिन नल बंद नहीं हो रहा है.

रेप का सीन जिस तरह से शूट किया गया है वो वाकई बहुत सेंसिटिव है. 4 गुंडों ने आर्य को कार में ठूंस दिया है. इसके बाद पूरा सन्नाटा. चार चली जा रही है. स्ट्रीट लैंप की रौशनी में. ड्रोन वाइड एंगल में ड्रोन कार के ऊपर चल रहा है. सिर्फ एक ही आवाज आ रही है जो आपके दिमाग की आवाज से साथ सिंक कर रही है.

कुफ्री में बर्फ के बीच शूट हुए सीक्वेंस सपनों की दुनिया जैसे लगते हैं. बैक ग्राउंड में लीजेंड एआर रहमान का म्यूजिक इन सीन्स में जान भर देता है. सिनेमेटोग्राफी के लिए हम इस फिल्म को 3 स्टार दे रहे हैं.

कुल मिलाकर: 3 स्टार

फिल्म की कहानी पहले कई बार देखी जा चुकी है. सशक्त महिला किरदार और उनकी बेबसी भी बॉलीवुड के लिए अब नई बात नहीं रही.

लेकिन परिवारिक रिश्तों को टटोलती इस फिल्म में खुद से नफरत करने वाली बेटी के लिए एक मां का कुछ भी कर गुजरना, फिल्म को एक स्तर ऊपर ले जाता है.

नवाजुद्दीन का दिल्ली वाला अंदाज, अक्षय का कड़क पुलिसिया रूप और श्रीदेवी का द्रौपदी की तरह 'दुष्यासान' के खून से अपने बाल धोना फिल्म को स्टाईल देता है.

शानदार एक्टिंग और कुछ बेहतरीन डायलॉग इस फिल्म को एक 'मस्ट वाच' बनाते हैं. लेकिन कहानी में नयापन ढूंढने वालों को निराशा हाथ लगेगी. कुल मिलाकर फिल्म MOM को हम दे रहे हैं 3 स्टार.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी:
2.5/5
स्क्रिनप्ल:
3/5
डायरेक्शन:
3.5/5
संगीत:
3/5

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज