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MOVIE REVIEW OMERTA : किसी आतंकवादी के मन में झांकना कैसा होता है?

MOVIE REVIEW OMERTA : किसी आतंकवादी के मन में झांकना कैसा होता है?

 ओमर्ता में शाहिद कपूर लीड रोल में हैं.

ओमर्ता में शाहिद कपूर लीड रोल में हैं.

इस फिल्म को बनाना जितना मुश्किल रहा होगा उतना ही मुश्किल इस फिल्म को देखकर मुस्कुराना आपके लिए हो सकता है.

    समीक्षक -  विवेक शाह

    "कितनी कहानियां है देशभक्ति की कहने के लिए ऐसे में आपको एक आतंकवादी की कहानी ही मिली थी कहने के लिए." इस सवाल से हंसल मेहता कई बार दो चार हुए हैं लेकिन हर बार उन्होंने लोगों से कहा है कि वो उनकी फिल्म देखें और फिर इसके बारे में कोई विचार बनाएं.

    हंसल मेहता की नई फिल्म 'ओमेर्ता' भारत में रिलीज़ के लिए तैयार है. इस फिल्म ने दुनियाभर के फिल्म फेस्टिवल्स में कई झंडे गाड़े हैं और इस हंसल की अधिकांश फिल्मों की तरह इस बार भी उनकी फिल्म में राजकुमार राव मौजूद हैं. ये पहला मौका है जब राजकुमार राव एक आतंकवादी का रोल निभा रहे हैं और यकीन मानिए उन्होंने पर्दे पर इस रोल को ज़िंदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

    सबसे पहले इस फिल्म का नाम ओमेर्ता क्यों है? इटैलियन भाषा में ओमेर्ता उस आतंकवादी के लिए इस्तेमाल होता है जो लाख यातनाओं के बाद भी पुलिस या अधिकारियों के सामने टूटता नहीं, इसे आप एक सम्मान की उपाधि कह सकते हैं.

    इस फिल्म में राजकुमार ब्रिटिश आतंकवादी अहमद ओमार सईद शेख के किरदार में हैं और फिल्म ओमार के लंदन में शुरुआती दिनों से लेकर 2002 में उसके द्वारा पत्रकार डेनियल पर्ल की बेरहमी से हत्या करने की कहानी को बयां करती है. साल 1994 में कुछ विदेशी पर्यटकों को दिल्ली में अगवा करने की घटना में ओमार के हाथ से लेकर उसके जेल में बिताए समय और फिर डेनियल पर्ल को मारने की योजना को फिल्म नज़दीक से दिखाती है.



    ये फिल्म एक आतंकवादी को ग्लोरिफाई नहीं करती, बल्कि युवाओं के आतंकवाद के प्रति आकर्षित हो जाने की कहानी को कहती है. जिहाद में ऐसा क्या है कि इसके लिए युवा दीवाने हो जाते हैं, हंसल इस फिल्म के माध्यम से बारीकी से इस पर बात करने की कोशिश करते हैं.

    भारत और लंदन की असल लोकेशन पर शूट हुई ये फिल्म पाकिस्तान के द्वारा चलाए जा रहे आतंकवादी कैंपेन और इसके खतरों पर रौशनी डालती है. फिल्म के अंदर टिमोथी रायन, केवल अरोड़ा, राजेश तेलांग जैसे अभिनेता हैं जो फिल्म को दिलचस्प बना देते हैं. ओमेर्ता कहानी है एक ऐसी आदमी की जो असल ज़िंदगी में भी अपने विरोधाभासों के साथ ज़िंदा है. एक ठंडे, शांत और बेहद क्रूर आतंकवादी के किरदार में राजकुमार ने जान डाल दी है और साबित किया है कि वो जबर्दस्त हैं.

    फिल्म में ईशान छाबड़ा का बैकग्राउंड स्कोर बेहद सामान्य है लेकिन इस कहानी में आपको और घुसा देता है क्योंकि फिल्म के थ्रिल और सस्पेंस के साथ ये और अच्छे से काम करता है. ये एक उदास फिल्म है जो आपको परेशान करने की क्षमता रखती है. ये फिल्म पहले ही एक लिमिटेड ऑडियंस के लिए है और जो लोग इसे देखने जाएंगे उसमें से भी कई इस फिल्म से बेहद अलग अनुभव लेकर लौटेंगे. हंसल मेहता ने एक आतंकवादी के दिमाग में झांकने की कोशिश की है और ये वाकई एक बोल्ड स्टेप है. बॉक्स ऑफिस पर शायद इस फिल्म को बहुत प्रचार न मिले लेकिन इस फिल्म को आपको एक बार देखना ज़रुर चाहिए.

    (इस फिल्म रिव्यू का मूल लेख अंग्रेज़ी में आप यहां पढ़ सकते हैं - Pick-D-Flick)

    Tags: Omerta

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