Power Play Review: पावर प्ले, एक दिलचस्प थ्रिलर, फिल्म में दिखा राज तरुण का बेहतरीन अंदाज

(photo credit: twitter/@@itsRajTarun)

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तेलुगु फिल्म पावर प्ले (Power Play) इस ऐसी ही जबरदस्त थ्रिलर है जिसमें दिखाया गया है कि किसी और के अपराध करने से एक बेचारे आम इंसान की ज़िन्दगी किस तरह तहस नहस हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 1:13 PM IST
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मुंबईः किसी आम इंसान के लिए बैंक और एटीएम के सीसीटीवी के फुटेज देखना, किसी टैक्सी कंपनी (ओला या उबर जैसी) से उसके ड्राइवर्स और उनकी ट्रिप की जानकारी निकलवाना, किसी का फ़ोन नंबर तलाशना या उसे ट्रेस करना पूरी तरह से असंभव काम ही होता है. अगर आपकी जान पहचान न हो तो आपको, किसी ऑफिस में सही जानकारी देने के लिए भी कोई तैयार नहीं होता. इस तरह के माहौल में एटीएम से निकाले आपके नोट नकली हों और पुलिस आपको पकड़ ले तो क्या होगा? तेलुगु फिल्म पावर प्ले (Power Play) इस ऐसी ही जबरदस्त थ्रिलर है जिसमें दिखाया गया है कि किसी और के अपराध करने से एक बेचारे आम इंसान की ज़िन्दगी किस तरह तहस नहस हो सकती है.

पावर प्ले एक रोमांटिक फिल्म की तरह शुरू होती है जहां. विजय (राज तरुण) को अपनी गर्लफ्रेंड कीर्ति (हेमल इंग्ले) से शादी करनी है. घरवाले मान जाते हैं. शादी से पहले वो एक बार डिस्को जाने का प्लान बनाते हैं और विजय, एक एटीएम से पैसे निकाल कर लाता है जो कि नकली नोट निकलते हैं. यहीं से कहानी में ट्विस्ट शुरू होता है. चीफ मिनिस्टर की विधायक बेटी और उसके पति का ड्रग्स बिज़नेस, बैंक मैनेजर से जोड़ तोड़ कर एटीएम में असली की जगह नकली नोट भरवाना, चीफ मिनिस्टर की बेटी के एक स्पोर्ट्स टीचर से अवैध सम्बन्ध और फिर टीचर की हत्या का एक दुकान के सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो जाना, दुकानवालों द्वारा उन्हें ब्लैकमेल करना, और विजय के हाथों उस रिकॉर्डिंग का लग जाना.

ऐसी सब बातों के बाद राज़ पर से पर्दा फाश होता है और विजय पर नकली नोट के कारोबार का लांछन हट जाता है और उसकी शादी हो जाती है. फिल्म लम्बी है. बहुत सारे सब प्लॉट्स हैं लेकिन सब किसी न किसी तरह आपस में जुड़े हुए हैं. निर्देशक विजय कुमार कोंडा की खासियत मानी जायेगी कि उन्होंने हर सब प्लॉट के साथ न्याय किया है और उसकी रचना और कहानी में उसकी जगह कुछ तरह महफूज़ कर रखी है कि परत खुलने पर शॉक के बजाये, दर्शकों को मज़ा आता है.

फिल्म की शुरुआत में एक एक्सीडेंट होता है जिसमें मरने वाला एक बड़े पुलिस अधिकारी का ड्रग्स व्यापारी बेटा होता है, जिसके पैसे चुकाने के लिए एटीएम में नकली नोट भर कर असली निकाले जाते हैं. फिल्म में विजय को एक एक कड़ी ढूंढने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है. एक पार्ट टाइम डिटेक्टिव के साथ मिल कर वो ATM जाने का और वहां से पुलिस द्वारा पकडे जाने तक का सफर याद करते जाते हैं और गुत्थी सुलझती जाती है. एक आम आदमी को किस तरह की दिक्कतें आ सकती है इस तरह की छानबीन करने में, ये बखूबी दिखाया गया है.
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अभिनय में राज तरुण और चीफ मिनिस्टर की बेटी के रोल में पूर्णा ने बहुत बढ़िया अभिनय किया है. बाकी अभिनेताओं ने भी अच्छा काम किया है. कलाकारों की एक लम्बी फेहरिस्त है मगर सबने अपने अपने किरदारों को जस्टिफाई किया है. फिल्म की कहानी और डायलॉग नंदयाला रवि ने लिखे हैं और पटकथा खुद निर्देशक विजय कुमार ने. विजय ने इसके पहले सिर्फ रोमांटिक फिल्म्स बनायीं हैं और पावर प्ले उनके लिए पहली थ्रिलर है इसलिए पटकथा और सब प्लॉट्स का विस्तार कुछ ज़्यादा हो गया और कहानी थोड़ी धीमे चली है. सब प्लॉट्स की वजह से थ्रिल आता है मगर अपने सर्वोच्च पर नहीं पहुँच पाता। फिल्म एक कमर्शियल सिनेमा है, उसके हिसाब से फिल्म में ड्रामेटिक मोमेंट्स की सख्त कमी है.

डायरेक्टर मात खा गए हैं, ये बात नज़र आती है. इसके लिए दोषी फिल्म के एडिटर प्रवीण पुदी भी हैं. प्रवीण ने करीब 50 से ज़्यादा फिल्में एडिट की हैं मगर उनका स्टाइल है पूरे दृश्य रखने का जिस वजह से फिल्म की गति धीमी हो जाती है. आसानी से 15 मिनिट की फिल्म कम हो सकती थी. सिनेमेटोग्राफर आय एंड्रू का काम ठीक है. रात के कुछ दृश्य अच्छे से फिल्माए गए हैं. फिल्म का संगीत (सुरेश बॉबिलि) अच्छा है. रोमांटिक गाने भी ठीक बने हैं मगर फिल्म की स्पीड कम कर देते हैं. एक्शन अच्छा है.



लेखक, निर्देशक और एडिटर, तीनों ही फिल्म बनाने में एक बहुत बड़ी गलती कर बैठते हैं. लेखक और निर्देशक, हर सीन को जस्टिफाई करने के चक्कर में सब प्लॉट रचते जाते हैं. एक तेज़ रफ़्तार, चतुराई से रची फिल्म के बजाये, एक लम्बी सी फिल्म देखने को मिलती है जो बोर करने लगती है. पावर प्ले में ये बात बहुत उभर कर आती है. एक बढ़िया क्राइम थ्रिलर, हर किरदार की उपयोगिता साबित करने में व्यस्त हो जाता है. फिल्म देखना ज़रूर चाहिए क्योंकि कम रफ़्तार के बावजूद, फिल्म अच्छी बन गयी है. कम से कम हिंदी फिल्मों से तो बेहतर ही है.
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