REVIEW: क्या वेब सीरीज 'प्रोजेक्ट 9191' पर हावी है क्राइम पेट्रोल का हैंगओवर

सोनी लिव पर पिछले दिनों एक वेब सीरीज रिलीज हुई 'प्रोजेक्ट 9191 (Project 9191)'.

सोनी लिव पर पिछले दिनों एक वेब सीरीज रिलीज हुई 'प्रोजेक्ट 9191 (Project 9191)'.

सोनी लिव पर पिछले दिनों एक वेब सीरीज रिलीज हुई 'प्रोजेक्ट 9191 (Project 9191)'. लेखक, निर्माता, निर्देशक वही टीम है जो है जो सोनी टेलीविजन के लिए 'क्राइम पेट्रोल' बनाती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 18, 2021, 9:28 PM IST
  • Share this:
वेब सीरीज: प्रोजेक्ट 9191

सीजन: 1

एपिसोड: 7

ओटीटी: सोनी लिव 
सोनी लिव पर पिछले दिनों एक वेब सीरीज रिलीज हुई 'प्रोजेक्ट 9191 (Project 9191)'. लेखक, निर्माता, निर्देशक वही टीम है जो है जो सोनी टेलीविजन के लिए 'क्राइम पेट्रोल' बनाती है. न चाहते हुए भी उसका हैंगओवर, प्रोजेक्ट 9191 पर इतना भारी है कि कई बार लगता है कि क्राइम पेट्रोल ही चल रहा है और अभी अनूप सोनी स्क्रीन पर आ कर कहेंगे, जुर्म को मुंह तोड़ जवाब देना चाहिए.

प्रोजेक्ट 9191 एक थोड़ी सी फ्यूचरिस्टिक वेब बनाने का प्रयास किया गया है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्यूटर एल्गोरिदम, बिहेवियर प्रेडिक्शन, क्राइम प्रेडिक्शन जैसी बातें सुना कर, एक भविष्य की कल्पना परोसने की कोशिश की गई है जिसमें अपराध होने से पहले उसके होने की भविष्यवाणी करना संभव होता दिखाया गया है. प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन के छोटे भाई जोनाथन नोलन द्वारा निर्देशित वेब सीरीज "पर्सन ऑफ़ इंटरेस्ट" के मूल आयडिया को भारतीय जामा पहनाया गया है और ये प्रयास बिलकुल असफल रहा है.

मुंबई में पुलिस की एक स्पेशल यूनिट का गठन होता है जिसमें कम्प्यूटर्स की मदद से शहर के सभी सीसीटीवी कैमरा पर नियत्रण किया जा सकता है, इंटरनेट पर चल रही इमेल्स और सोशल मीडिया मैसेजेस को चुपचाप पढ़ा जा सकता है, लोगों के व्यवहार का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है. उद्देश्य है हर तरह के अपराध को होने से रोकना. इस टास्क फ़ोर्स/ स्पेशल यूनिट में एक अदद डीसीपी हैं जिनकी अपने कमिश्नर से कुछ खास बनती नहीं हैं. एक भ्रष्ट किस्म का इंस्पेक्टर है जो जुगाड़ करने में माहिर है. एक कर्त्तव्य परायण इंस्पेक्टर है जिसको डीसीपी के काम करने का तरीका पक्षपात पूर्ण लगता है. एक अदद हैकर भी है जो अब पुलिस के लिए काम करता है. सौंदर्य का बैलेंस बनाये रखने के लिए एक दो महिला पुलिस कर्मी भी रखी गयी हैं.



जल्दबाज़ी में लिखे गए 7 एपिसोड का लेखन, कंप्यूटर क्रैश होने के समान लगता है. किसी भी कोण से, एक भी दृश्य आपको बांध के नहीं रख पाता जबकि लेखक सुब्बू, टीवी के जाने माने राइटर हैं और क्राइम पेट्रोल के हिट होने में उनकी लेखनी का योगदान है. किरदारों को बैकस्टोरी देने की कोशिश की है, जिसकी वजह से कहानी के मूवमेंट में रुकावट आ जाती है. कुछ कलाकारों का किरदार ठीक से डेवलप नहीं किया है. संभवतः इसके अगले सीजन में उन पर फोकस करने का इरादा होगा। हालांकि लगता नहीं है कि इसको दूसरा सीजन मिलना चाहिए.

प्रोडक्शन में आम टीवी शोज से थोड़ा बेहतर काम किया गया है. हालांकि सीआईडी के आखिरी 2-3 सीजन में इस से बेहतर कंप्यूटर ग्राफ़िक्स का इस्तेमाल किया गया था. इस शो की एक बड़ी विडम्बना ये भी है कि टेक्नोलॉजी के आधार वाले कई विदेशी क्राइम और कॉप शोज, हिंदुस्तान में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं. तुलना करने पर प्रोजेक्ट 9191 का प्रोडक्शन बहुत कमज़ोर साबित होता है. जब बढ़िया विदेशी शो मौजूद हैं, तो सिर्फ हिंदी में होना प्रोजेक्ट 9191 के पॉपुलर होने के लिए काफी नहीं है. अधिकांश कलाकार टीवी पर नज़र आते रहते हैं मगर किसी एक का भी अभिनय मजबूत नहीं है. डीसीपी और कमिश्नर के बीच के संघर्ष में कमिश्नर द्वारा यूनिट को बंद करने की जो जल्दी दिखाई जाती है, वो फिल्मों में चल जाती है मगर वेब सीरीज में आप उस पर विश्वास नहीं करना चाहते. पुलिस वाले घायल होते हैं और चौबीस से भी कम घंटों में पूरे जोश के साथ काम पर लौट आते हैं. ये छोटी बातें हैं मगर कहानी में भरोसा पैदा नहीं होता इसलिए शो पर भी भरोसा नहीं हो पाता।

लेखक और निर्देशक हैं, मूलतः अहमदाबाद के रहनेवाले और क्राइम पेट्रोल के जनक सुब्रमनियन एस अय्यर। सुब्बू को क्राइम पेट्रोल का अच्छा खासा अनुभव है, करीब करीब 1400 एपिसोड लिखने का और निर्देशित करने का. जाने माने निर्देशक कुंदन शाह के शागिर्द के तौर पर काम करने वाले सुब्बू द्वारा रचित, क्राइम पर रियलिटी शो जैसा क्राइम पेट्रोल, लोगों द्वारा एक जागरूकता अभियान की तरह देखा गया और इसलिए पूरे परिवार में इस शो के कई फैन हैं. अफ़सोस की ये फैंस, प्रोजेक्ट 9191 को नकार देंगे. डायलॉग लिखे हैं.चारुदत्त आचार्य ने जो टेलीविज़न पर काफी सक्रिय लेखक हैं. रोज़मर्रा की भाषा और अंदाज़ लाने की कोशिश की गयी है. पुलिस वाला डायलॉग मार कर ड्रामा पैदा कर सकता है या फिर रीयलिस्टिक अभिनय कर सकता है. दोनों नावों में सवार अभिनेता और उनके डायलॉग, प्रोजेक्ट 9191 में चुभते हैं.

जैसा हमारे यहां पुलिस का नंबर होता है 100, अमेरिका में पुलिस की हेल्पलाइन का नंबर 911 होता है. इसी का फायदा उठाने के लिए प्रोजेक्ट 9191 नाम रखा गया था ऐसा लगता है. एक भी अमेरिकी क्राइम एंड कॉप शो जैसा इसमें न तो प्रोडक्शन क्वालिटी है, न रफ़्तार है और न ही एक भी ऐसा एक्टर या किरदार जो लोगों को याद रह जाए. इस शो का हर एपिसोड तकरीबन 35 मिनट का है और ऐसे 7 एपिसोड्स हैं. अपने 250 मिनिट बचाइए और किसी बेहतर शो या फिल्म देखने में लगाइये, आपका प्रोजेक्ट 2021 यही है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज