घोल
3.5/5
पर्दे पर : 24 अगस्त 2018
डायरेक्टर : पैट्रिक ग्राहम
संगीत : नरेन चंदावरकर
कलाकार : राधिका आप्टे, मानव कौल, रत्नाबाली, महेश बलराज
शैली : एक्शन, हॉरर फिक्शन, थ्रिलर
यूजर रेटिंग :
0/5
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Netflix Ghoul Review : Sacred Games के बाद अब 'जिन्न' से लड़ती नज़र आ रही हैं राधिका आप्टे

नेटफ्लिक्स पर लॉन्च हई सीरीज़ घोल को अरबी कल्चर में जिन्न कहा जाता है, जो इंसानी मांस खाता है और जिस इंसान को मारता है उसका रुप ले लेता है.

Sushant Mohan | News18Hindi
Updated: August 24, 2018, 7:39 PM IST
Netflix Ghoul Review : Sacred Games के बाद अब 'जिन्न' से लड़ती नज़र आ रही हैं राधिका आप्टे
ग्हुल में राधिका आप्टे
Sushant Mohan | News18Hindi
Updated: August 24, 2018, 7:39 PM IST

इस फिल्म को देखते हुए ऐसा लगता है कि आप बहुत सारी हॉलीवुड हॉरर फिल्मों का मिक्स देख रहे हैं. आपको इनसिडियस याद आती है, आपको थोड़ी सी कॉन्जयुरिंग याद आती है, आपको आई एम लीजेंड के कुछ दृश्य याद आते हैं. कुल मिला कर इस फिल्म में हर उस फिल्म की छाप है जो मॉर्डन हॉरर क्लासिक मानी जाती हैं. बस भारतीय किरदारों के साथ इस फिल्म में एक फ्रेशनेस आ जाती है क्योंकि आप भारत में हॉरर के नाम पर रामसे या भट्ट वाले भूत, चुड़ैल और डायन ही देखते आए हैं. ऐसे में ‘घोल’ या ‘जिन्न’ का कॉन्सेप्ट नया भी लगता है और कनेक्ट भी देता है.


 सूदूर भविष्य में सरकारी तंत्र से बाहर चलने वालों को गुनाहगार माना जाता है. ऐसे लोग जो सरकारी जानकारी से बाहर की बात करेंगे वो टेरिरिस्ट घोषित किए जाएंगे. सरकार का दिया सिलेबस ही पढ़ाया जाएगा, पढ़ा जाएगा और इससे बाहर सबकुछ ‘एंटी नेशनल’ होगा. निदा रहीम (राधिका आप्टे) सरकारी स्पेशल फोर्स का हिस्सा हैं जो ‘एंटी नेशनल’ तत्वों को पकड़ने और उनसे पूछताछ करने में देश की मदद करती हैं. देश की सेवा के लिए वो अपने प्रोफेसर पिता को भी गिरफ्तार करवा देती है जो सरकारी किताबों से बाहर की जानकारी अपने स्टूडेंट्स को दे रहे थे.


 निदा को एक अज्ञात मिलिटरी इंटेरोगेशन सेंटर पर बुलाया जाता है. यहां मिलिटरी चीफ राहुल डाकुना (मानव कौल) से उनकी मुलाकात होती है और इस स्पेशल मिलिटरी यूनिट को जिम्मेदारी दी जाती है आंतकवादियों के सरगना अली सईद (महेश बलराज) से सबकुछ उगलवाने की. लेकिन अली सईद कोई मामूली इंसान नहीं, वो इंसान ही नहीं. वो अरबी लोक कथाओं में मिलने वाला घोल या जिन्न है और एक खास मकसद के लिए वो इस मिलिटरी यूनिट के पास पहुंचा है.




A scene From Ghoul
घोल फिल्म का एक दृश्य


घोल फिल्म सिर्फ एक हॉरर फिल्म नहीं है. इस फिल्म के साथ निर्माता और निर्देशक ने कई कटाक्ष करने की कोशिश की है. सच्चा देशभक्त कैसे बनें, सरकार का सिलेबस, धर्म विशेष पर टिप्पणियां आपका ध्यान कुछ राजनीतिक घटनाओं की तरफ खींचने की कोशिश करती हैं. बहुत ही सावधानी से इन चीज़ों को कहानी में बिल्ड किया गया है और जिन लोगों की राजनीतिक समझ थोड़ी भी अच्छी है वो इन हिंट्स को पकड़ लेंगे.


इस मिनी सीरीज़ में 3 एपिसोड हैं और हॉलीवुड फिल्मों की तर्ज़ पर इसे बेहद डार्क एंबियंस में शूट किया गया है. निर्देशक पैट्रिक ग्राहम ने कहानी पर पकड़ बना कर रखी है लेकिन कहीं कहीं भारतीय रेफरेंस आने से पता लगता है कि विक्रमादित्या मोटवाने, जो इस के निर्माता हैं, उनका टच फिल्म में है.


 एक हॉरर फिल्म की ताकत होती है जंप स्केयर या अचानक डराना. बॉलीवुड और हॉलीवुड के कई निर्माता और निर्देशक इसे शुरुआत से करते आए हैं लेकिन Ghoul में आप इसे नहीं देखते. आपको मालूम होता है कि कब हॉरर की एंट्री होगी. भूत अचानक कहीं से नहीं टपकता, वो सामने है और बहुत धीरे से आप पर डर हावी होता है.

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Radhika Apte
घोल फिल्म के एक दृश्य में राधिका आप्टे

 फिल्म में राधिका आप्टे लगभग हर फ्रेम में हैं और उनको देखकर बीच में उकताहट होने लगती है. वो सेक्रेड गेम्स में जैसी नज़र आईं थी वैसी ही यहां नज़र आती हैं लेकिन डरने के कुछ दृश्यों में वो कमाल लगती हैं, कम से कम बिपाशा से बेहतर लगती हैं. मिलिटरी चीफ के किरदार में मानव कौल अपने रोल को अंडर प्ले करते हैं और यही उनकी खासियत है. एक मिलिटरी चीफ को आप हमेशा दबंग पाते हैं लेकिन इस चीफ में कमियां हैं. Ghoul का सरप्राइज़ पैकेज हैं महेश बलराज और रत्नाबाली भट्टाचर्जी. डिजिटल सिनेमा के आने के बाद कई ऐसे कलाकारों को मौका मिला है जो मेनस्ट्रीम सिनेमा की चकाचौंध में कहीं खो गए थे.


 मिलिट्री ऑफिसर लक्ष्मी के किरदार में रत्नाबाली जबर्दस्त काम करती हैं और उनके स्क्रीन पर आते ही आपको चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट आ जाएगी. महेश बलराज का स्क्रीन प्रेजेंस डरावना है. ग्हूल के किरदार में जो भाव चेहरे पर चाहिए वो उनके पास है. दंगल में सिर्फ एक सीन में नज़र आए इस अभिनेता के अंदर अभिनय की कितनी क्षमता है आपको इस मिनी सीरीज़ में मालूम होगा.


 लेकिन ऐसा नहीं की ये सबसे बेहतरीन हॉरर कृति है. इस मिनी सीरीज़ की सबसे बड़ी समस्या है इस फिल्म का प्रेडिक्टेबल होना. आपको कहानी चलने के साथ ही मालूम होता है कि अब क्या होगा और यहां स्क्रिप्ट मात खाती नज़र आती है. इसकी स्क्रिप्ट को कॉन्ज्यूरिंग फिल्मों की तरह खुला हुआ रखने की कोशिश की गई है लेकिन इस वजह से तीन एपिसोड लंबे और खिंचे हुए लगने लगते हैं.


 निर्देशक पैट्रिक ने भी इस बात को माना था कि वो इसे फिल्म की तरह लिख चुके थे लेकिन तभी नेटफ्लिक्स के अनुरोध पर उन्हें इसे सीरीज़ में बनाना पड़ा और कुछ हिस्सों को पैच की तरह जोड़ा गया जो आपको पता भी लगता है. वैसे जहां तक इस मिनी सीरीज़ की रेटिंग का सवाल है तो आपको ये कई भारतीय हॉरर फिल्मों से बेहतर लगेगी और आप कमज़ोर दिल के हैं तो भी भारतीय हॉरर सीन को बदलने की इस कोशिश को ज़रुर देखिए क्योंकि अर्बन लेजेंड्स, हॉलीवुड का स्क्रीनप्ले और भारतीय एक्टरों के अभिनय से सजी घोल इतनी डरावनी नहीं की आप देख ही न सकें.


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डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
3/5
स्क्रिनप्ल :
3/5
डायरेक्शन :
4/5
संगीत :
4/5
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