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मूवी रिव्यू : बेहद बोरिंग और आलसी फिल्म है सूरज-आथिया की 'हीरो'

राजीव मसंद | News18India
Updated: September 12, 2015, 2:52 PM IST
मूवी रिव्यू : बेहद बोरिंग और आलसी फिल्म है सूरज-आथिया की 'हीरो'
1983 में सुभाष घई ने हीरो के साथ न्यूकमर्स जैकी श्रॉफ और मीनाक्षी सिशाद्री को स्टार बना दिया था।

1983 में सुभाष घई ने 'हीरो' के साथ न्यूकमर्स जैकी श्रॉफ और मीनाक्षी सिशाद्री को स्टार बना दिया था।

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  • Last Updated: September 12, 2015, 2:52 PM IST
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मुंबई। 1983 में सुभाष घई ने 'हीरो' के साथ न्यूकमर्स जैकी श्रॉफ और मीनाक्षी शिशाद्री को स्टार बना दिया था। एक पवरफुल पुलिस ऑफिसर की बेटी और उसे किडनैप करने वाले एक गुंडे के बीच की प्रेम कहानी, यह फिल्म कुछ जाने पहचाने कॉन्फ्लिक्ट्स सामने लेकर आई जैसे जेनरेशनल क्लैश, माता पिता की नाराजगी और बगावत और इन सभी के बीच लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के कुछ शानदार गाने। निखिल आडवाणी द्वारा निर्देशित 'हीरो' यानी की उस फिल्म की रीमेक पुरानी 'हीरो' से हद से ज्यादा वफादार है।

स्टार किड्स सूरज पंचोली और आथिया शेट्टी की ये लॉन्च पैड इस तरह से 1980 के मेलोड्रामा से भारी इतनी ओल्ड-फैशंड लगती है कि आप जल्द ही इससे थक जाएंगे। सूरज यानी सूरज पंचोली और राधा यानी आथिया शेट्टी जल्द ही एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं। जब सूरज, राधा को भगा कर जम्मू के एक कॉटेज में ले जाता है, ये बताकर की उसे राधा के पिता ने भेजा है उसे दुश्मनों से बचाने के लिए। मुझे पता है आप क्या सोच रहे हैं। पर हां, पुलिस ऑफिसर भाई और पिता होने के बावजूद भी वो परिस्थति को भांप नहीं पाती।

जब सच सामने आता है की सूरज ने राधा को उसके पिता से बदला लेने के लिए एक क्रिमिनल के कहने पर किडनैप किया है। राधा, जो अब पूरी तरह से सूरज से प्यार करने लगी है, वो उसे अपनी पुरानी जिंदगी भुला कर उसके साथ नई जिंदगी शुरू करने को कहती है। प्लॉट की कमियों को भुला भी दिया जाए तो हीरो, स्क्रीनप्ले या कंटिन्यूटी का भी ख्याल नहीं करती। इसकी लापरवाह एडिटिंग की वजह से इसके लॉजिक और इन्फॉर्मेशन में कई कमियां रह जाती हैं और इसके बनावटी डाइलॉग्स, बॉलीवुड के पुराने दिनों की याद दिलाते हैं। राधा के पिता के किरदार में टिगमांशु धुलिया हमेशा गुस्से में भरे रहते हैं। वहीं आदित्य पंचोली सूरज के क्रिमिनल पिता पाशा के किरदार में सख्त हैं, और आखिर में राधा के होने वाले दूल्हे के किरदार में विवान भटेना को देखकर आपका चीखने का मन करेगा।

आथिया शेट्टी को शुरुआत में बिगड़ैल और बेवकूफ दिखाया गया है लेकिन वो अपने सीन्स में कॉन्फिडेंट और नैचुरल लगती हैं, हालांकि वो थोड़ी रॉ जरूर हैं। साफ तौर पर इन दोनों में कुछ बेहतर करने की क्षमता है। फिल्म के एक सीन में जिसमें वो महज एक दूसरे को दूर से देख रहे हैं और उनकी आंखों से आंसू निकल रहे हैं, वो सीन आपके दिलों को छू लेगा। ये एक बेहद आलसी फिल्म है जिसकी फिल्म मेकिंग में कुछ नया नहीं है और ये शुरू से लेकर अंत तक बोरिंग है। सलमान खान द्वारा गाया गया शानदार टाइटल ट्रैक बिल्कुल अंत में आता है जब तक काफी देर हो चुकी है मैं "हीरो" को पांच में से दो स्टार देता हूं।

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First published: September 12, 2015, 2:46 PM IST
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