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उजड़ा चमन
1.5/5
पर्दे पर : 1 नवंबर, 2019
डायरेक्टर : अभिषेक पाठक
संगीत : गौरव रोशिन
कलाकार : सनी सिंह, मानवी गगरू, सौरभ शुक्ला
शैली : कॉमेडी ड्रामा
यूजर रेटिंग :
0/5
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Ujda Chaman Review: काफी गड़बड़झाला है, सनी सिंह डिजर्व करते हैं इससे बेहतर फिल्म

News18Hindi
Updated: November 2, 2019, 12:05 AM IST
Ujda Chaman Review: काफी गड़बड़झाला है, सनी सिंह डिजर्व करते हैं इससे बेहतर फिल्म
एक्‍टर सनी सिंह 'उजड़ा चमन' में नजर आने वाले हैं.

उजड़ा चमन समीक्षा (Ujda Chaman Review): सनी सिंह को केंद्र में रखकर बनाई गई इस फिल्म का एक सबल पक्ष मानवी गगरू (Maanvi Gagroo) हैं लेकिन उनका किरदार कभी भी निखर के सामने नहीं आ पाता.

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  • Last Updated: November 2, 2019, 12:05 AM IST
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नई दिल्ली. क्या होता है जब शादी को तैयार बैठा एक नौजवान सिर्फ इसीलिए अच्छे रिश्तों से दूर हो जाता है, क्योंकि उसके सिर पर बाल कम हैं? सनी सिंह (Sunny Singh), जिन्हें आपने 'प्यार का पंचनामा 2 (Pyaar Ka Punchnama 2)' और 'सोनू के टीटू की स्वीटी (Sonu Ke Titu Ki Sweety)' जैसी फिल्मों में देखा है, इस फिल्म में दिल्ली यूनिवर्सिटी में हिंदी के प्राध्यापक चमन कोहली बनें हैं. उनकी शादी नहीं हो पा रही है और यही बात उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रही है. हालांकि उनकी उम्र सिर्फ 30 साल है लेकिन उनके आसपास के लोग, जिनमें एक पाखंडी ज्योतिषी (सौरभ शुक्ला) भी शामिल है, उन पर शादी का दवाब बढ़ाए जा रहे हैं.

कहानी की शुरुआत में दो-चार हल्के-फुल्के हंसने के क्षण आते हैं लेकिन जल्द ही वो चमन के बालों की तरह कम होने लगते हैं. कुछ ही समय बाद यह सब एक विचित्र बुलीइंग में बदल जाता है जहां चमन के स्टूडेंट्स से लेकर उनके पड़ोसी तक उनकी शादी करवाने पर आमदा हो जाते हैं. हम ऐसी यूनिवर्सिटी शिक्षिकाओं से भी मिलते हैं जिनकी शादी को लेकर धारणाएं रातों-रात बदल जाती हैं. फिर परदे पर एक ऐसी भी स्टूडेंट आती है जो पेपर में आने वाले क्वेश्चन को पहले ही जानने के लिए चमन के साथ घूमने-फिरने से गुरेज़ नहीं करती.



ujada chaman
सनी सिंह का अभिनय भी खुलकर सामने नहीं आ पाया.


एक बिलकुल ही रैंडम यूनिवर्सिटी स्टाफ भी है जो लोगों को अपनी शादी की प्यारभरी कहानियां सुना कर प्रेरित करने की कोशिश करता रहता है. कुल मिलाकर काफी गड़बड़झाला है जिसमें सनी सिंह की बेचारगी पर वाकई तरस आने लगता है. इसलिए नहीं कि फिल्म ज़बरदस्त बनी है, बल्कि वो कहां फंस गए हैं. वो इससे बेहतर फिल्म डिजर्व करते हैं.

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फिल्म का एक सबल पक्ष मानवी गगरू हैं लेकिन उनका किरदार कभी भी निखर के सामने नहीं आ पाता. निर्देशक अभिषेक पाठक ने फिल्म का तीन चौथाई हिस्सा 'टकले' ह्यूमर के नाम कुर्बान कर दिया है. काश उन्होंने इसके बारे में थोड़ी गहराई से सोचा होता!
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खैर, इस पूरी समीक्षा का लब्बोलुबाब यह है कि आर आप किसी गंजेपन से परेशान युवक को देख कर यूं ही ठहाके मारकर नहीं हंसने लगते हैं तो आपके लिए इस फिल्म में कुछ ख़ास ढूंढ़ना काफी मुश्किल होगा. अगर आप वाकई ऐसी बातों पर हंस पड़ते हैं तो आपको मनोचिकित्सक की ज़रूरत जल्दी ही पड़ सकती है.

उजड़ा चमन को मिलते हैं 5 में से 1.5 स्टार.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
1.5/5
स्क्रिनप्ल :
1.5/5
डायरेक्शन :
1.5/5
संगीत :
1.5/5

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First published: October 31, 2019, 6:30 PM IST
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