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Undekhi 2 Review: सिमटे तो दिल-ए-आशिक, फैले तो जमाना है

अनदेखी 2 (सोनी लिव)
अनदेखी 2 (सोनी लिव)
3/5
पर्दे पर:25 फरवरी 2022
डायरेक्टर : आशीष आर. शुक्ला
संगीत : अर्जुन दानैत, शिवम् सेनगुप्ता
कलाकार : हर्ष छाया, दिब्येंदु भट्टाचार्य, सूर्या शर्मा, अंकुर राठी, आंचल सिंह और अन्य
शैली : क्राइम, थ्रिलर
यूजर रेटिंग :
0/5
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Undekhi 2 Review: सिमटे तो दिल-ए-आशिक, फैले तो जमाना है

'अनदेखी 2' सोनी लिव पर स्ट्रीम हुई है.

'अनदेखी 2' सोनी लिव पर स्ट्रीम हुई है.

छोटे छोटे सब-प्लॉट्स की वजह से मूल कहानी की कमजोरियां दर्शक को उबा देती है. मर्जी पगड़ीवाला की सिनेमेटोग्राफी ज़रूर अच्छी है लेकिन उस से Undekhi 2 Review: कहानी पर कोई फर्क नहीं पड़ पाया है. सुधीर अचारी और सौरभ प्रभुदेसाई ने एडिटिंग में कोई कमाल नहीं किया है बल्कि इतने सारे सूत्रों और सब-प्लॉट्स को जोड़कर एक सूत्र में पिरोने में वो असफल रहे हैं. कुल जमा ये कहा जा सकता है कि अनदेखी का दूसरा सीजन फीका है, नहीं देखें तो कम से कम पहले सीजन की खुमारी बरकरार रहेगी.

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2020 में सोनी लिव ने एक वेब सीरीज रिलीज की थी, अनदेखी. मोहिंदरपाल सिंह की कहानी पर आधारित ये वेब सीरीज जब रिलीज हुई तो इसे कम दर्शक मिले लेकिन समय के साथ साथ सोनी लिव पर स्कैम 1992, महारानी और रॉकेट बॉयज जैसी वेब सीरीज आती गयीं और उनके दर्शक बढ़ते गए, जिस वजह से अनदेखी को बहुत से दर्शकों ने देख लिया और इसे बेहद पसंद किया. मनाली के एक माफिया परिवार की इस कहानी में परिवार के मुखिया अपने बेटे की शादी में शराब पीकर नाचते हैं और एक नाचनेवाली लड़की को गोली मार देते हैं. पूरा परिवार उनके इस अपराध को छिपाने में लग जाता है, स्थानीय पुलिस से सांठ गांठ होने की वजह से मामला ठंडा होने ही लगता है कि उनकी नयी नवेली पुत्रवधू और शादी की वीडियोग्राफी करने वाली टीम की वजह से मामला फिर गर्म हो जाता है. बंगाल से नए डीसीपी को भेजा जाता है और फिर शक्ति का प्रदर्शन दोनों ओर से होता है लेकिन अपराध सिद्ध करने वाली परिस्थिति आती ही नहीं है. पहले सीजन में अटवाल परिवार के मुखिया के तौर पर सदैव शराब में डूबे शख्स का किरदार हर्ष छाया ने निभाया था और डीसीपी घोष के किरदार में थे दिब्येंदु मुख़र्जी. दोनों ने कद्दावर अभिनय किया. अब इस सीरीज का दूसरा सीजन रिलीज़ किया गया है. कहते हैं कि सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ और फैले तो ज़माना है यानि कहानी को दूसरे सीजन में इतना खींच दिया है और उसमें इतने पात्र भर दिए हैं कि देखने वाले बोरियत का शिकार हो गए हैं. अनदेखी का दूसरा सीजन, शुरू के कुछ एपिसोड के बाद अनदेखा करने जैसा हो जाता है.

अनदेखी 2 की कहानी पहले सीजन के खत्म होने से शुरू होती है और फिर आगे बढ़ती है. जहां पहला सीजन अटवाल परिवार की बाहुबलीनुमा शक्ति के भौंडा प्रदर्शन था जिस वजह से दर्शकों को पसंद आया था दूसरा सीजन अटवाल परिवार की आपसी लड़ाई, मनाली में इजराइल की दवा कंपनी की आड़ में किये जा रहे ड्रग्स के कारोबार और अंतर्राष्ट्रीय सिंडिकेट तक पहुंच गयी. पहले सीजन में हर्ष छाया का अभिनय सब कलाकारों पर भारी पड़ा और उनके सामने दिब्येंदु भट्टाचार्य की पुलिसिया शतिरबाज़ी ने उसका सटीक उत्तर दिया. इस बार हर्ष छाया का किरदार था तो लम्बा लेकिन उनके किरदार का कोई कैरेक्टर ग्राफ ही नहीं था. हर एपिसोड में शराब पीते, गालियां देते और अपने परिवार के सभी सदस्यों को बेइज़्जत करते हुए नजर आये हैं.

वहीं, दिब्येंदु के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ है. पहले सीजन में उनका किरदार दमदार था लेकिन इस सीजन में वो एक साधारण पुलिस इंस्पेक्टर की तरह तफ्तीश में व्यस्त रहे. दूसरे सीजन में रिंकू अटवाल (सूर्या शर्मा) का किरदार सबसे बड़ा था और प्रभावी रहा. सूर्या की पर्सनालिटी भी ऐसी है कि वो किसी शहर के बाहुबली के उत्तराधिकारी नज़र आते हैं. हिंसा उनके लिए सांस लेने जैसा है, और वो किसी से डरते भी नहीं हैं क्योंकि वो अपने परिवार की शक्ति से भली भांति परिचित हैं. सूर्या को आनेवाले समय में नेगेटिव रोल्स मिलेंगे ये तय है. कुछ और अभिनेताओं ने प्रभावित किया जैसे लकी (वरुण भगत), तेजी ग्रेवाल (आंचल सिंह), और समर्थ (टीवी की दुनिया के पुराने सितारे नंदिश सिंह संधू). इनके रोल ठीक से लिखे गए थे और उनके अभिनय ने उसमें चार चाँद लगा दिए. कुछ अभिनेताओं ने ओवरएक्टिंग कर के अच्छे भले सीजन का सत्यानाश कर दिया.

इस सीजन की समस्या ढेर सारे ट्रैक्स का होना रहा. दर्शकों को उम्मीद थी कि दिब्येंदु और हर्ष के बीच की लड़ाई का कुछ ज़ोरदार अंत होगा लेकिन यहाँ क्लाइमेक्स इतना फिल्मी था कि एक्शन भी नक़ली लगने लगी थी. वेब सीरीज में समय काफी होता है तो छोटे छोटे किरदारों को भी तवज्जो दी जा सकती है लेकिन हर किरदार को प्राथमिकता देने से मूल कहानी कमजोर हो जाती है. दमन अटवाल (अंकुर राठी) और तेजी ग्रेवाल की शादी होने के बाद से दोनों के किरदार में अजीब अजीब बदलाव आते हैं. पहले सीजन में तेजी को अपने ससुराल वालों की आपराधिक गतिविधियों से कोफ़्त होती है और वो दिब्येंदु का साथ देने लगती है लेकिन दूसरे सीजन में वो अपने पति के लिए अटवाल परिवार की गद्दी हासिल करने के लिए गलत तरीके इख्तियार करते हुए नजर आती है. किसी कैरेक्टर में ऐसा आमूलचूल परिवर्तन अजीब लगता है. कोयल (अपेक्षा पोरवाल) का ट्रैक अच्छा हो सकता था लेकिन उसमें बुद्धिस्ट मोनेस्ट्री में मेयांग चांग के साथ का ट्रैक बेतुका लग रहा था. आदिवासी पृष्ठभूमि की नर्तकी से उसका एक घातक हत्यारिन बनने का सफर अटपटा था. लकी (वरुण भगत) टिम्मा (दिवाकर कुमार झा) के ट्रैक क्यों रखे गए थे, इनका मूल कहानी में क्या योगदान था ये समझ ही नहीं आता लेकिन उनके कैरेक्टर को काफी तवज्जो दी गयी है. ऐसे ही कई छोटे छोटे ट्रैक्स हैं जो मूल कहानी से जुड़े हुए दिखाए हैं लेकिन ये बात भी साफ समझ आती है कि 10 एपिसोड बनाने के लिए ये सब ट्रैक्स घुसाए गए थे.

अमेजॉन प्राइम के प्रसिद्ध क्रिकेट शो इनसाइड एज की लेखन मण्डली में शामिल अमेय सारडा और ऑल्ट बालाजी शो अपहरण की लेखिका अनाहता मेनन ने इस सीजन की कहानी लिखी है. अनाहता के साथ दीपक सहगल ने स्क्रीनप्ले लिखा है. डायलॉग सुमित बिश्नोई के हैं. कमजोर स्क्रीनप्ले की वजह से ये सीजन प्रभावी नहीं हो पाया है. ढेर सारे छोटे छोटे सब-प्लॉट्स की वजह से मूल कहानी की कमजोरियां दर्शक को उबा देती है. मर्जी पगड़ीवाला की सिनेमेटोग्राफी ज़रूर अच्छी है लेकिन उस से कहानी पर कोई फर्क नहीं पड़ पाया है. सुधीर अचारी और सौरभ प्रभुदेसाई ने एडिटिंग में कोई कमाल नहीं किया है बल्कि इतने सारे सूत्रों और सब-प्लॉट्स को जोड़कर एक सूत्र में पिरोने में वो असफल रहे हैं. कुल जमा ये कहा जा सकता है कि अनदेखी का दूसरा सीजन फीका है, नहीं देखें तो कम से कम पहले सीजन की खुमारी बरकरार रहेगी.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी:
3/5
स्क्रिनप्ल:
2.5/5
डायरेक्शन:
2.5/5
संगीत:
2.5/5

Tags: Film review

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