1/5
पर्दे पर : 21 दिसंबर 2018
डायरेक्टर : आनंद.एल.राय
संगीत : अजय-अतुल
कलाकार : शाहरुख खान, कटरीना कैफ, अनुष्का शर्मा
शैली : रोमांटिक ड्रामा फिल्म
यूजर रेटिंग :
0/5
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Zero Movie Review: मूवी रिव्यु - जीरो ही है शाहरुख, अनुष्का और कटरीना की ZERO

जीरो मूवी रिव्यु (Zero Movie Review): 'तनु वेड्स मनु' जैसी मजेदार फिल्म लिखने वाले हिमांशु शर्मा पूरी तरह फॉर्म से बाहर हैं. उन्हें समझ ही नहीं आया कि जीरो की कहानी को हीरो कैसे बनाना है.

News18Hindi
Updated: December 22, 2018, 5:10 PM IST
Zero Movie Review: मूवी रिव्यु - जीरो ही है शाहरुख, अनुष्का और कटरीना की ZERO
फिल्म के एक सीन में शाहरुख खान.
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Updated: December 22, 2018, 5:10 PM IST
बउआ सिंह (शाहरुख खान) 18 साल का एक वर्टिकली चैलेंज्ड शख्स है जो मेरठ में रहता है. बउआ काउबॉय बनने के सपने देखता है और इन सपनों में सबसे बड़े दुश्मन उसके पिता ही हैं. बउआ सपने में फ्रेंच बोलते हुए अपने पिता को चुप करवाता है. सपनों में ये गुस्सा दरअसल उस सोच की वजह से है जो बउआ के दिमाग में शुरुआत से रही है. दरअसल बउआ अपनी छोटी हाइट की वजह पिता की गुटखा चबाने की आदत को मानता है.

फिल्म का ओपनिंग एक्ट एक उम्मीद देता है कि फिल्म अच्छी रहेगी. शाहरुख खान डायरेक्टर आनंद एल. राय के वो हीरो नजर आते हैं जो छोटे शहर में रहता है, मस्तमौला है, कड़क जवाब देता है. आपको लगता है कि फिल्म सही दिशा में जा रही है, लेकिन धीरे-धीरे ये उम्मीद खत्म हो जाती है. केवल यही दस मिनट हैं जो फिल्म में याद करने लायक हैं. इसके बाद फिल्म फ्लैट जोक्स और बेतरतीब तरीके से प्लान किए गए सीन से भरी लगती है.

आफिया यानी अनुष्का एक हाफ अफगान-हाफ पंजाबी साइंटिस्ट के रोल में हैं. उनकी सीधी-साधी नॉर्मल जिंदगी में बउआ की एंट्री नए रंग भर देती है. इसके बाद बउआ बबीता (कटरीना कैफ) कुमारी से टकराते हैं. बबीता से नजदीकियां बढ़ती हैं तो बउआ अपनी सफिया और बबीता के बीच फंस जाते हैं. फिल्म को लेकर कम से कम आनंद एल. राय का आइडिया कुछ ऐसा ही लग रहा था, लेकिन एक के बाद एक स्टोरी अलग ही तरह से सामने आती है.

इस फिल्म में दिखाया जा सकता था कि अलग तरह से सक्षम लोग जिंदगी और समाज के प्रेशर को किस तरह झेलते हैं, लेकिन फिल्म में साफिया व्हील चेयर पर बैठकर अमेरिका की सड़कों पर घूम रही है. बबीता एक सीन कर रही हैं ताकि बउआ प्यार में हुई अपनी गलतियों का अहसास कर सके. इसके अलावा हिंदी फिल्मों के रोमांटिक हीरो से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं. ये सब काफी सीरियस नोट पर हो रहा है. 'तनु वेड्स मनु' जैसी मजेदार फिल्म लिखने वाले हिमांशु शर्मा पूरी तरह फॉर्म से बाहर हैं. उन्हें समझ ही नहीं आया कि जीरो की कहानी को हीरो कैसे बनाना है.

इस फिल्म के मल्टी स्टारर पेपी नंबर की भी काफी चर्चा थी, लेकिन वो कुछ मिनट भी बेकार लगते हैं. आप श्रीदेवी, आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण को बउआ का मजाक उड़ाते देखेंगे. इसके बाद सलमान के साथ स्टेज पर डांस करते नजर आते हैं. इस गाने का फिल्म में कोई कंट्रीब्यूशन नहीं है. कुल मिलाकर जीरो एक फैंटेसी राइड है जो कहीं नहीं पहुंचती. राइटिंग, डायरेक्शन, एडिटिंग से लेकर हर चीज में जीरो, जीरो ही साबित होती है.

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डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
1/5
स्क्रिनप्ल :
1/5
डायरेक्शन :
1/5
संगीत :
2/5
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