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पर्दे पर:
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मूवी रिव्यू: ड्रामे से भरपूर फिल्म है ‘फरारी की सवारी’

मुन्नाभाई मूवी और 3 ईडियट्स के जैसे ही फरारी की सवारी नेक इरादों से बनाई गई फिल्म है जिसका दिल एक दम सही जगह पर है। फिर भी अपने बड़े-बड़े सपनों को पूरा करने की इस साधारण से परिवार की सिंपल सी कहानी बहुत बड़ी नहीं लगती।

मुन्नाभाई मूवी और 3 ईडियट्स के जैसे ही फरारी की सवारी नेक इरादों से बनाई गई फिल्म है जिसका दिल एक दम सही जगह पर है। फिर भी अपने बड़े-बड़े सपनों को पूरा करने की इस साधारण से परिवार की सिंपल सी कहानी बहुत बड़ी नहीं लगती।

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    मुंबई। मुन्नाभाई मूवी और 3 ईडियट्स के जैसे ही फरारी की सवारी नेक इरादों से बनाई गई फिल्म है जिसका दिल एक दम सही जगह पर है। फिर भी अपने बड़े-बड़े सपनों को पूरा करने की इस साधारण से परिवार की सिंपल सी कहानी बहुत बड़ी नहीं लगती।

    शरमन जोशी एक ईमानदार सरकारी क्लर्क रूसी देबू के किरदार में हैं जब वो गलती से ट्रैफिक लाइट क्रॉस कर लेता है तो वो नजदीकी पुलिस चौकी दूढ़कर फाइन भरने की जिद करता है। रूसी अपने चिढ़चिढ़े पिता बेहराम यानी बोमन ईरानी के साथ रहता है जो किसी जमाने में क्रिकेटर हुआ करते थे लेकिन वो कभी कुछ बड़ा नहीं कर पाए। रूसी का 12 साल का एक बिन मां का बेटा भी है जो कि बहुत अच्छा बल्लेबाज है। कायो एक दिन अपने आदर्श सचिन की तरह खेलना चाहता है।

    जब लॉर्ड्स में होने वाले एक महत्वपूर्ण ट्रेनिंग कैंप के लिए कायो का सिलेक्शन हो जाता है रूसी को पैसों की जरूरत पड़ती है. पैसे ईमानदार तरीकों से संभव नहीं हैं। जब उसे लोन नहीं मिलता तो उसके पास एक ही तरीका बचता है कि वो अपने वेडिंग प्लानर फ्रेंड के लिए सचिन तेंदुलकर की फरारी चुरा ले।

    एक अच्छी मिडिल क्लास पारसी फैमिली को पर्दे पर उतारती फरारी की सवारी काफी साफ सुधरी हंसी और कुछ आंखें नम कर देने वाले मोमेंट्स के साथ आराम से आगे बढ़ती है। पर जैसे ही रूसी सचिन तेंदुलकर की फरारी हथियाता है ये फिल्म सभी लॉजिक को भूलती हुई खूब सारे मेलोड्रामा से भर जाती है।

    एक लोकल कॉरपोरेटर का बिजनेस और उसके नसमझ बेटे का ट्रैक कुछ ज्यादा ही लंबा लगता है और इसका प्रि क्लाइमेक्स सीन जिसमें रूसी लाइव टेलीविजन पर लोगों से अपील करता है जब कायो गुम हो जाता है इतना ओवर द टॉप लगता है कि आप अपने बाल नोचना चाहेंगे। फिल्म में जो ज्यादा इंगेजिंग है वो है इसका कॉमिक ट्रैक जिसमें शामिल है तेंदुलकर का हाउसकीपर और उसका सिक्योरिटी गार्ड जिन्हें अपने बॉस के घर लौटने से पहले फरारी को ढूंढना है।

    राजकुमार हिरानी के असिस्टेंट रह चुके और फिल्म के को राइटर और डायरेक्टर राजेश मापुस्कर की फरारी की सवारी बहुत ही अच्छे से असेंबल की गई है। पर वो हिरानी की फिल्मों की तरह अतिरंजित होते हुए भी सहज नहीं लगती। फिर भी इसके परफोरमेंस काफी मजेदार हैं। जिंदादिल वेडिंग प्लानर जिसे किसी भी हालत में फरारी की जरूरत है, सीमा भार्गव इस किरदार में बहुत ही खूब लगती हैं। क्रिकेट प्रशासक के किरदार में परेश रावल बहुत सही नोट पकड़ते हैं। फिल्म के लीड्स में शरमन जोशी रूसी का किरदार यकीन करने वाला बनाते हैं। उनका किरदार इतना अच्छा दिखाया गया है कि शायद ही कोई ऐसा इंसान हो। कायो के किरदार में रित्विक साहौर और बमन इरानी फिल्म में जान डालते हैं। मैं फिल्म फरारी की सवारी को पांच में से ढाई स्टार देता हूं।

    डिटेल्ड रेटिंग

    कहानी:
    /5
    स्क्रिनप्ल:
    /5
    डायरेक्शन:
    /5
    संगीत:
    /5

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