रिव्यू: बिल्कुल भी मजेदार नहीं है अक्षय की जोकर

राजीव मसंद
Updated: September 1, 2012, 7:32 AM IST
रिव्यू: बिल्कुल भी मजेदार नहीं है अक्षय की जोकर
फिल्म 'स्वदेश' की ही तरह अक्षय कुमार यानी अगत्सय अपने गांव पागलपुर लौटता है। अपने गांव को दुनिया के नक्शे पर लाने के लिए वो बनावटी एलियंस का सहारा लेता है।
राजीव मसंद
Updated: September 1, 2012, 7:32 AM IST
मुंबई। शिरीष कुंदर निर्देशित ‘जोकर’में अक्षय कुमार नासा के एक बेहतरीन वैज्ञानिक के किरदार में हैं। फिल्म का आधार देखें तो वो काफी मजेदार है पर अफसोस शिरीष उसे ठीक से पेश करने में नाकाम रहे हैं।

फिल्म 'स्वदेश' की ही तरह अक्षय कुमार यानी अगत्सय अपने गांव पागलपुर लौटता है। अपने गांव को दुनिया के नक्शे पर लाने के लिए वो बनावटी एलियंस का सहारा लेता है। पर जैसे ही मीडिया और नेता इस हलचल के झांसे में आते है वहां आ पहुंचता है अक्षय का दुश्मन एक अमेरिकन वैज्ञानिक।

करीब 100 मिनट की जोकर अपने घिटे-पिटे जोक्स की वजह से काफी लंबी लगती है। जोकर को पूरी तरह से फेलियर कहना ठीक रहेगा पर एक बात की तारीफ फिर भी करनी पड़ेगी कि ये फिल्म अक्षय की पिछली कुछ फिल्मों के मुकाबले कम बुरी है।

भद्दे मजाकों से दूर ये फिल्म बच्चों के लिए अच्छी हो सकती थी। अक्षय अपने सीन को ईमानदारी से निभाते हैं, वहीं सोनाक्षी सिन्हा के लिए उनकी प्रेमिका बन सिर्फ खूबसूरत दिखने के अलावा ज्यादा कुछ नहीं है। मैं जोकर को पांच में से डेढ़ स्टार देता हूं। ये बिल्कुल भी मजेदार नहीं है।
First published: September 1, 2012
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर