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फिल्म समीक्षा: शानदार है ‘शिप ऑफ थिसियस’

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फिल्म समीक्षा: शानदार है ‘शिप ऑफ थिसियस’

आनंद गांधी द्वारा लिखी और निर्देशित की गई "शिप ऑफ थिसियस" के लिए आपको जरुरत है खूब धैर्य, खुले दिमाग और एक नई सोच की।

    मुंबई। आनंद गांधी द्वारा लिखी और निर्देशित की गई "शिप ऑफ थिसियस" के लिए आपको जरुरत है खूब धैर्य, खुले दिमाग और एक नई सोच की। महज़ बैठकर फिल्म देखना काफी नहीं है, बल्कि ज़रूरत है उन किरदारों और उनके बहस को ध्यान से सुनने की। अगर आप ये सब करने के लिए तैयार हैं तो आप ज़ाहिर तौर पर बेहद भावुकता, बुद्धिजीवी और संवेदनशीलता का अनुभव करेंगे। ये फिल्म है तीन अलग अलग कहानियों के बारे में जो सवाल उठाती है पहचान, मौत और नैतिकता की।

    सबसे पहले हमें मिलवाया जाता है एक अंधी फोटोग्राफर आलिया से जो बेहद खूबसूरत ब्लैक एंड व्हाइट इमेजे कैप्चर करने के लिए अपने इंट्यूशन का इस्तेमाल करती है। कोर्निया ट्रांसप्लांट से उसे अपनी आंखे जरूर मिल जाती है, पर उसे डर है कि शायद वो अपनी इंस्पिरेशन खो चुकी है। दूसरी ओर सबसे प्रभावी कहानी में हमारी मुलाकात होती है मैत्रिया से जो एक जैन संन्यासी और कट्टर एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट हैं। उन्हें लीवर सिरोसिस हुआ है और ट्रांसप्लांट की जरुरत है। ये पता लगने पर कि उसकी दवाई जो उसकी जिंदगी बचा सकती है, उसका इस्तेमाल शायद जानवरों पर हुआ हो, वो ट्रीटमेंट के लिए मना कर देती है।

    तीसरी कहानी फोकस करती है नवीन पर जो एक स्टॉक ब्रोकर है और हाल ही में उसे डोनेट की हुई किडनी मिली है। वो उस आदमी को न्याय दिलाने में जुट जाता है जिसकी किडनी एक अपेंडिक सर्जरी के दौरान गैर कानूनी तरीके से चुरा ली गई थी।

    इनकी कहानी हमें तीनों के दिमाग के अंदर ले जाती है, ये दिखाते हुए कि वो किस चीज के लिए खड़े होते हैं और कैसे फिल्म में दिखाए गए सफ़र के दौरान बदलते हैं। नायक ऐसे तर्क देता है जो इंटेलिजेंट भी है और सोचने पर मजूबर कर देता है। बेहद ही आराम से फिल्माई गई शिप ऑफ थिसियस सिनेमेटेकली बहुत ही रिच लगती है और खास तौर पर इसके हर नायक की शानदार परफॉर्मेंस फिल्म को मदद करती है।

    ख़ास तौर पर नीरज का काम जिसका संन्यासी के तौर पर बदलता रूप देखने लायक है। गांधी की सपोर्टिंग कास्ट भी बहुत ही बेहतरीन है जो उस फिल्म में कही कहीं ह्यूमर डालती है। मैं शिप ऑफ थिसियस को पांच में से चार स्टार देता हूं। ये उस एक अहम चीज पर खास ध्यान देती है जो अक्सर फिल्में इग्नोर कर देती हैं वो और है 'दिमाग'। इसे एक चांस दीजिए, ये आपको हैरान कर देगी।



    डिटेल्ड रेटिंग

    कहानी:
    /5
    स्क्रिनप्ल:
    /5
    डायरेक्शन:
    /5
    संगीत:
    /5

    Tags: Film review, Gandhi, Ibn7

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