फिल्म समीक्षा: सब्र की परीक्षा लेती है 'रॉय'

फिल्म समीक्षा: सब्र की परीक्षा लेती है 'रॉय'
रणबीर कपूर फिल्म में इतने मुरझाए हुए लगते हैं मानों उन्हें इस फिल्म में ज़बरदस्ती किसी ने कोई सज़ा दी हुई है। फिल्म में कई सवाल हैं जिनके जवाब नहीं मिल पाते।

रणबीर कपूर फिल्म में इतने मुरझाए हुए लगते हैं मानों उन्हें इस फिल्म में ज़बरदस्ती किसी ने कोई सज़ा दी हुई है। फिल्म में कई सवाल हैं जिनके जवाब नहीं मिल पाते।

  • Last Updated: February 14, 2015, 4:58 PM IST
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मुंबई। ‘रॉय’ देखने के बाद आप मूवी बिजनेस के बारे में सोच में पड़ जाएंगे। क्या रणबीर कपूर का एक्सटेंडिड कैमियो ही काफी है एक प्रोड्यूसर के लिए, इस बोरिंग, बचकानी और कमजोर फिल्म में पैसा डालने के लिए? जो भी इस फिल्म से जुड़ा है क्या उनमें से किसी ने भी सेट पर जाने से पहले फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी थी?

चार बड़े किरदार पर बनी इस फिल्म के फालतू से प्लॉट में और भी कई सवाल हैं जिनके जवाब नहीं मिल पाते। कबीर ग्रेवाल के किरदार में अर्जुन रामपाल एक फिल्म फिल्म डायरेक्टर हैं जो अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए मलेशिया आए हैं, पर उनकी स्क्रिप्ट अब तक दूर-दूर तक तैयार नहीं है। आयशा आमिर के किरदार में जैक्लीन फर्नाडीज लंदन में बसी एक फिल्ममेकर हैं और वो भी अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए मलेशिया आईं हैं, हालांकि हम उन्हें कहीं भी एक्टर्स या क्रू के पास ऐसा कुछ करते नहीं देखते जो उनके काम को दर्शाता हो।

कबीर उन लोगों में से है जो घर के अंदर भी हैट पहने घूमता है और इस ज़माने में भी कंप्यूटर के बजाए टाइपराइटर पर काम करता है। उसके खूब सारे रिलेशनसिप रह चुके हैं और आयशा उसकी गर्लफ्रेंड नंबर 23 बनती है, शायद उसके ऐसे डायलॉग्स से इंप्रेस होकर, “ज़िंदगी का असली शोर उसकी खामोशियों में पाया हुआ मिलता है’’। सच में आप हैरत में पड़ जाएंगे आखिर कौन ऐसी बात करता है।
इसमें रणबीर कपूर रॉय के किरदार में हैं जो एक मंझा हुआ चोर है जो फ्रांस, क़तर, चाइना और इंडिया की उन म्यूजियम में चोरी कर चुका है जहां चोरी नामुमकिन है। रॉय के तरीकों से प्रभावित होकर कबीर एक नई स्क्रिप्ट लिखता है। और आयशा से आकर्षित वो फिल्म की लीडिंग लेडी में उसकी लुकलाइक को कास्ट करता है और यहां हमें मिलवाया जाता है सेकेंड जैकलीन से जिसका हेयरस्टाइल थोड़ा अलग है और वो हमेशा ही ब्राइट रेड लिपस्टिक लगाए रहती है।



अब यहां दो रोमांटिक स्टोरी चल रही है और आप समझ नहीं पाएंगे कि कब रील लाइफ, रियल लाइफ में बदल जाती है। पर ये सब इतना बोरिंग है कि आप इन किरदारों में दिलचस्पी खो चुके होंगे।

रणबीर कपूर फिल्म में इतने मुर्झाए हुए लगते हैं जैसे मानो उन्हें इस फिल्म में जबरदस्ती किसी ने कोई सजा दी हुई है। आप ये पूछे बगैर नहीं रह पाएंगे कि कोई इंसान जो अपनी प्रोफेशन से चार्मर है और जिसे चोरी करने के लिए लोगों के दिल जीतने हैं, वो कभी भी मुस्कराता क्यूं नहीं है। अर्जुन रामपाल के बारें में यही कहूंगा कि कबीर के किरदार में पसंद करने जैसा कुछ नहीं है। और जैक्लीन अफसोस एक ऐसे किरदार में मिसकास्ट की गईं हैं जिसे और ज्यादा रंग की जरूरत है।

फिल्म की इकलौती ताकत है इसके शानदार गाने, फिर भले ही वो कभी भी कहीं भी आ जाते हैं। पर ये एक ऐसी फिल्म के लिए तारीफ से कम नहीं है जो ढाई घंटे तक धीरे-धीरे आगे बढ़ती है, और इसका ट्विस्ट इतना प्रीडेक्टबल है जिसका आप बहुत पहले ही अंदाजा लगा चुके होंगे। मैं “रॉय” को पांच में से एक स्टार देता हूं।
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