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FILM REVIEW: सिंगल या कमिटेड के अलावा भी Relationship Status होते हैं

करीब करीब सिंगल
करीब करीब सिंगल
2.5/5
पर्दे पर:10 नवंबर 2017
डायरेक्टर : तनुजा चंद्रा
संगीत : अनु मलिक
कलाकार : इरफ़ान ख़ान, पार्वती
शैली : रॉम कॉम
यूजर रेटिंग :
0/5
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FILM REVIEW: सिंगल या कमिटेड के अलावा भी Relationship Status होते हैं

इरफान खान और पार्वती

इरफान खान और पार्वती

इरफ़ान और पार्वती की फ़िल्म करीब करीब सिंगल की समीक्षा

    योगी और जया. एक लड़का और एक लड़की. सामाजिक नियमों के हिसाब से अब इन दोनों की सिंगल रहने वाली उम्र बीते जमाना हो चुका है. एक कॉफी शॉप में बैठे योगी जया से पूछता है, "आपके एक्स पूरे पूरे वाले सिंगल हैं या फिर हमारी आपकी तरह वाले सिंगल". यही डायलॉग फिल्म की पूरी कहानी कह जाता है.

    सिंगल, कमिटेड या शादीशुदा... इनके अलावा भी कुछ रिश्ते होते हैं जिनमें उलझकर लोग पूरी जिंदगी ना इस पास आ पाते हैं ना उस पार बढ़ पाते हैं.

    इरफान खान और पार्वती की यह फिल्म टीनएज रोमांस की ताजगी लाती है, बस इस बार रोमांस करने वाले ये दोनों उम्र में 30 पार हैं.

    कहानी:

    फिल्म 'करीब करीब सिंगल' की कहानी जया की कहानी है. जया के पति मानव आर्मी मिलिट्री में थे जो 10 साल पहले गुजर चुके हैं. इन 10 सालों से जया बिल्कुल अकेली है. यह बातें फिल्म के शुरूआती 10 मिनटों में ही स्थापित कर दी जाती है.

    अब जया अपनी जिंदगी में कुछ एक्शन ढूंढ रही है. बहुत डरते-डरते वो एक ऑनलाइन डेटिंग वेबसाइट 'अब तक सिंगल' पर अपना अकाउंट बनाती है. अजीबों-गरीब लोगों के बीच जया को मिलता है योगी. योगी जया को मिलने बुलाता है.

    दूसरों के बच्चों को शॉपिंग करवाने और संभालने से उकता चुकी जया भी कुछ नया करने को तैयार है. वो योगी से मिलती है. फिल्म का ट्रेलर देखकर ये कहानी तो क्लियर हो गई है कि योगी ने अपनी जिंदगी में 3 बार टूटकर प्यार किया था. वो अपनी उन तीनों एक्स से मिलने का प्लान बना लेता है. जया को भी अपने साथ चलने को कहता है. पहले तो जया बहुत आनाकानी करती है, लेकिन ऋषिकेश, जयपुर और गंगटोक जाने का प्रलोभन ठुकरा नहीं पाती.

    फिर शुरू होती है एक लम्बी जर्नी. इस फिल्म में आपको कई ऐसे मौके मिलेंगे जब आप हंस-हंसकर लोटपोट हो जाएंगे. लेकिन ये मौके सिर्फ तब तक हैं जबतक योगी और जया को एक दूसरे से प्यार नहीं हो जाता. सेकंड हाफ में पहुंचकर कहानी बहुत धीमी पड़ जाती है. कुछ हिस्से बहुत उबाऊ भी लगते हैं. हालांकि योगी उर्फ इरफान खान का चार्म और जया उर्फ पार्वती की अदाकारी आपको जरूर बांधे रखती है. कहानी के लिए हम इस फिल्म को 2.5 स्टार दे रहे हैं.

    एक्टिंग:

    इरफान खान इस फिल्म में योगी के किरदार में हैं. योगी मस्तमौला आदमी है. अपनी डेट से मिले भी जॉगिंग करते हुए जाता है. अपने सूटकेस पर अपने नाम के कई स्टीकर चिपकाए रखता है और चटकारी मठरी का ब्रैंड एम्बेसेडर है. लेकिन उन्हें देखकर उन्हीं का एक किरदार बार-बार याद आता है.

    'करीब-करीब सिंगल' का योगी बहुत बार 'लाइफ इन अ मेट्रो' वाले मॉन्टी की याद दिलाता है. दोनों ही किरदारों की आत्मा एक है. इसके अलावा योगी के पास बहुत पैसे हैं लेकिन उन्हें कमाने का जरिया साफ तौर पर नहीं बताया गया है.

    इस मामले में अमेरिकी सिटकॉम 'हाउ आय मेट योर मदर' के मशहूर बार्नी स्टिन्सन के किरदार की भी झलक उसमें नजर आती है.

    मलयाली एक्ट्रेस पार्वती की यह पहली हिंदी फिल्म है. वो बहुत खूबसूरत लगी हैं. उनकी एक्टिंग भी शानदार है. बस कहीं पर उनकी एक्टिंग थोड़ी 'ओवरएक्टिंग' लगती है.

    लेकिन फिल्म के दौरान उनके किरदार में हुई ग्रोथ अंत में सिर्फ इसी बात पर आकर सिमट जाती है कि कभी पानी शेयर ना करने वाली जया योगी का जूठा पानी पी लेती है.

    फिल्म में नेहा धूपिया योगी की गर्लफ्रेंड के रूप में नजर आई हैं. हालांकि फिल्म में उन्हें एक दीवा के रूप में दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन नेहा बहुत बीमार और थकी हुई नजर आई हैं.

    एक्टिंग के लिए हम फिल्म को 3 स्टार दे रहे हैं.

    म्यूजिक:

    अनु मलिक, रोचक कोहली और विशाल मिश्रा इस फिल्म के संगीतकार हैं. फिल्म में 3 गाने हैं. तीनों बिलकुल सही जगह पर आते हैं और कहानी को बोझिल ना करते हुए आगे बढ़ाते हैं.

    राजशेखर का लिखा और आतिफ असलम का गाया 'जाने दे' इन दिनों म्यूजिक चार्ट पर कब्जा जमाये हुए है.

    म्यूजिक के लिए हम इस फिल्म को 3 स्टार दे रहे हैं.

    सिनेमेटोग्राफी:

    इस फिल्म में धूप और प्राकृतिक रोशनी का प्रयोग बहुत अच्छे से किया गया है. इरफान एक सीन के दौरान पार्वती से कहते भी हैं, "जब धूप तुम्हारे चेहरे पर पड़ती है, ऐसा लगता है किसी ने पेंटिंग बनायी हो".

    फिल्म की शूटिंग मुंबई, दिल्ली, ऋषिकेश, जयपुर, गैंगटोक जैसी जगहों पर हुई है. इसलिए लोकेशन्स भी खूबसूरत हैं. सिनेमेटोग्राफी के लिए हम फिल्म को 3 स्टार दे रहे हैं.

    निर्देशन:

    तनुजा चंद्रा इससे पहले 'दुश्मन' और 'संघर्ष' जैसी फिल्में बना चुकी हैं. उनका निर्देशन बेहतरीन है. लेकिन इस फिल्म में कई बार बिना डायलॉग्स के लंबे-लंबे सीन इमोशनल करने की बजाय सिर्फ बोर करते हैं. हालांकि जहां पर पार्वती कैमरे में देखकर दर्शकों से बात करती हैं, वो प्रयोग अच्छा लगता है. निर्देशन के लिए हम फिल्म को 2.5 स्टार देंगे.

    कुल मिलाकर:

    एक बहुत बोलने वाले लड़के और एक जिंदगी में कुछ नया ढूंढने वाली लड़की की यह स्टोरी ऑनलाइन शुरू होती है. ऑनलाइन डेटिंग का ये कॉन्सेप्ट फिल्म में बखूबी इस्तेमाल किया गया है.

    हंसी के कुछ बेहतरीन पलों के साथ यह फिल्म एक अच्छा टाइमपास है. योगी की बेतुकी हरकतों पर गुस्सा होकर प्यार में पड़ती जया की यह कहानी एक बार जरूर देखी जानी चाहिए.

    कुल मिलाकर हम इस फिल्म को 2.5 स्टार दे रहे हैं.

    डिटेल्ड रेटिंग

    कहानी:
    3/5
    स्क्रिनप्ल:
    3/5
    डायरेक्शन:
    2.5/5
    संगीत:
    3/5

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