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हर लड़की को ये फिल्म एक बार जरूर देखनी चाहिए

Manisha Pandey | News18Hindi
Updated: November 11, 2019, 3:04 PM IST
हर लड़की को ये फिल्म एक बार जरूर देखनी चाहिए
एन एजूकेशन फिल्म

राह भूल जाना कोई बड़ी बात नहीं है. बड़ी बात है लौटकर वापस सही राह पर न आना. ये फिल्म वही काम करती है. वापस रास्ते पर लौटा लाती है.

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  • Last Updated: November 11, 2019, 3:04 PM IST
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फिल्म: एन एजूकेशन
निर्देशक: लोन शिर्फिग

वैसे तो ब्रिटिश जर्नलिस्ट लिन बर्बर के संस्मरण पर आधारित ये अमेरिकन फिल्म तीन एकेडमी अवार्ड्स के लिए नॉमिनेट हुई थी. रौटन टोमैटोज पर इस फिल्म को 94 पर्सेंट की रेटिंग मिली है. लेकिन इन सब बातों को दरकिनार भी कर दें तो मेरी नजर इस फिल्म के लिए एक ही वाक्य कहना काफी होगा- धरती  के किसी भी मुल्क, किसी भी समाज, किसी भी जाति, धर्म, नस्ल और रंग में पैदा हुई हर लड़की को ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए. जब-जब वो ये भूलने लगे कि वो कौन है और उसके जीवन का मकसद क्या है, एक बार पलटकर फिर से इसे देख लेना चाहिए.
फिल्म का नाम है- एन एजूकेशन.

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कहानी बड़ी मामूली सी है. 1961 का लंदन. जेनी नाम की 16 साल की एक खूबसूरत और बुद्धिमान लड़की, जिसका सपना है एक दिन आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ना. वो पढ़ने में बहुत अच्छी है, इसलिए टीचर्स चाहते हैं कि वो पढ़े. मां-बाप बहुत समृद्ध नहीं हैं, इसलिए चाहते हैं कि वो पढ़े. उसके सुंदर और सुरक्षित भविष्य के लिए. फिर कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं कि जेनी को लगता है और उसके मां-बाप को भी कि अगर बिना पढ़े भी जेनी का भविष्य सुंदर और सुरक्षित हो सकता है तो वो न भी पढ़े तो चलेगा. आखिर लड़की है. हर लड़की अपना घर खुद नहीं बनाती. बहुत सी लड़कियों को बहुत सुंदर और बड़ा बना-बनाया घर भी मिल जाता है.

एन एजूकेशन फिल्म
एन एजूकेशन फिल्म

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लेकिन इस बने-बनाए घर और खुद के बनाए घर में क्या कोई फर्क है. क्या दोनों बातें एक ही हैं. क्या ऑक्सफ़ोर्ड इसलिए जाना था कि पैसे कमा सकें. क्या पैसे यूं ही आ जाएं तो ऑक्सफ़ोर्ड जाने, पढ़ने, इतनी मेहनत करने, जान लगाने की क्या जरूरत है. ऐसे अनेकों सवाल हो सकते हैं और उन सवालों का जवाब इस फिल्म में मिलता है. जेनी के सवालों का जवाब, जो उस उम्र की और किसी भी लड़की के सवाल हो सकते हैं. उसकी गलतियों, कमजोरियों, मूर्खताओं के जवाब, जो किसी भी लड़की की गलतियां और कमजोरियां हो सकती हैं.

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फिल्म कला की कसौटियों पर इस फिल्म को परखने और समीक्षा करने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि कहानी ही इतनी ताकतवर है कि बाकी सब पीछे छूट जाता है. इस फिल्म को देखने के बाद मुझे लगा था कि ये स्कूल और कॉलेजेस के कैरिकुलम में होनी चाहिए. हर गर्ल्स स्कूल में साल में एक बार दिखाई जानी चाहिए. इस पर बहस और बात होनी चाहिए.

राह भूल जाना कोई बड़ी बात नहीं है. बड़ी बात है लौटकर वापस सही राह पर न आना. ये फिल्म वही काम करती है. वापस रास्ते पर लौटा लाती है. वो रास्ता, जो सही रास्ता है. जो हर लड़की का रास्ता है. और अगर नहीं है तो होना चाहिए.

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First published: November 11, 2019, 1:01 PM IST
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