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डर हमारी आत्मा को खा जाता है

Manisha Pandey | News18Hindi
Updated: November 19, 2019, 11:09 AM IST
डर हमारी आत्मा को खा जाता है
फिल्मः अलीः फिअर ईट्स द सोल

ऐसा समय, जो हर तरह के डर, पूर्वाग्रह और नस्लभेद से ग्रस्त है. और उस वक्त में फासबाइंडर अली के बहाने बता रहे हैं कि कैसे डर हमारी आत्मा को खा जाता है.

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  • Last Updated: November 19, 2019, 11:09 AM IST
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फिल्मः अलीः फिअर ईट्स द सोल

निर्देशक: राइनर वार्नर फासबाइंडर

ये 1974 में वेस्ट जर्मनी में बनी फिल्म थी. निर्देशक थे राइनर वार्नर फासबाइंडर. यूं तो दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं जिसके सिनेमा के इतिहास में कोई एक दौर ऐसा न रहा हो, जिसे नए सिनेमा मूवमेंट का नाम न दिया गया हो. ईरान में तख्तापलट के बाद जिस तरह की फिल्मों और फिल्मकारों का दौर आया, वो ईरान का न्यू सिनेमा मूवमेंट था. हिंदुस्तान में 80 का दशक इस तरह के प्रयोगशील सिनेमा की शुरुआत थी. जर्मनी में ये शुरू हुआ दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद. वो दिन है और आज का दिन, विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में शायद ही कभी कोई ऐसी फिल्म बनी हो, जिस पर नाजी क्रूरताओं और युद्ध की छाया न हो.
जैसाकि सिनेमा हमेशा करता ही है, सवाल करता है, जवाब ढूंढता है, किसी बात को सिर्फ इसलिए नहीं मान लेता कि पूरा समाज, पूरी दुनिया उस बात को ऐसे ही मानती है, फासबाइंडर के सिनेमा ने भी बहुत सारे पुराने मूल्यों और समाज की संरचना पर सवाल उठाना शुरू किया.

1974 में बनी ये फिल्म अलीः फिअर ईट्स द सोल एक 60 साल की विधवा स्त्री एम्मी और तकरीबन 30 साल के मोरक्कन लड़के अली की कहानी है. कहानी ठीक-ठीक कोई प्रेम कहानी भी नहीं है, लेकिन एक-दूसरे के साथ में एक-दूसरे को पाने की कहानी है. ये 1972 की गर्मियों में म्यूनिख में हुए हत्याकांड के ठीक बाद का समय है.

ऐसा समय, जो हर तरह के डर, पूर्वाग्रह और नस्लभेद से ग्रस्त है. और उस वक्त में फासबाइंडर अली के बहाने बता रहे हैं कि कैसे डर हमारी आत्मा को खा जाता है. जब हम दुनिया में फिट हो सकने, लोगों की नजर और नजरिए में फिट हो सकने के लिए चिंतित हों तो खुद को समझने की मोहलत और जगह ही कहां बचती है. हमारी अपने सवाल नहीं, दुनिया का डर ही सबसे बड़ा हो जाता है.

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फिल्म में कई सवाल हैं और कई सवालों का जवाब. 48 साल पुरानी फिल्म 2019 में काफी पुरानी सी लग सकती है क्योंकि दुनिया उस जगह से काफी आगे निकल आई है. लेकिन क्या पता, 48 साल बाद भी डर नहीं बदले हैं और न उस डर का आत्मा पर कब्जा.

 

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First published: November 19, 2019, 11:08 AM IST
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