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  • ऐसे बना गोविंदा आला रे गीत, यहां शूट हुआ, झूमकर नाचे थे शम्मी कपूर

ऐसे बना गोविंदा आला रे गीत, यहां शूट हुआ, झूमकर नाचे थे शम्मी कपूर

शम्मी कपूर पर फिल्माए गए गाीत 'गोविंदा आला रे' आज भी है हिट

शम्मी कपूर पर फिल्माए गए गाीत 'गोविंदा आला रे' आज भी है हिट

55 साल बाद भी इस गीत के लिए हर किसी में क्रेज़ दिखता है. आज जन्माष्टमी के मौके पर जानिए इस आइकॉनिक गीत से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें.

  • News18Hindi
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    गोविंदा आला रे आला जरा मटकी संभाल बृजबाला गोविंदा आला रे... मोहम्मद रफी के इस गीत के बगैर कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का पर्व अधूरा है... 55 साल होने के बावजूद आज भी इस गीत के बजने के बाद बच्चों से लेकर युवाओं तक हर कोई थिरकने से खुद को रोक नहीं पाता है. आज जन्माष्टमी के मौके पर इस आइकॉनिक गीत से जुड़ी अनसुनी बातें न्यूज 18 आपको बताने जा रहा है.

    शम्मी कपूर पर फिल्माए गए इस गीत को मोहम्मद रफी ने सुरों में पिरोया है, लेकिन क्या आपको पता है कि यह कौन सी फिल्म का गीत है... इसके गीतकार कौन है... और यह गीत शूट कहां पर हुआ है.

    खैर, ये गीत ब्लफ मास्टर फिल्म का है. 1963 में प्रदर्शित इस फिल्म को मनमोहन देसाई ने निर्देशित किया था. इस गीत को लिखा था राजेंद्र कृष्ण ने और संगीतकार थे कल्याणजी-आनंदजी. फिल्म में शम्मी कपूर, सायरा बानो के अलावा प्राण लीड रोल में थे.

    मनमोहन देसाई ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कैसे इस गीत का आइडिया आया था. उन्होंने बताया कि पटकथा लेखक मधुसूदन कालेकर ने एक सीन लिखा था, जिसमें अपनी गर्लफ्रेंड को महंगा गिफ्ट देने के लिए हीरो को पैसे की जरूरत होती है. हीरो को दोस्त दही-हांडी फोड़ कर इनामी राशि जीतने की सलाह देते हैं. मनमोहन देसाई ने कहा था कि आइडिया सुनकर उनकी खुशी का ठिकाना नही रहा, क्योंकि दही हांडी फोड़ने पर इसके पहले कोई गीत फिल्माया नहीं गया था.

    मनमोहन देसाई ने उस इंटरव्यू में कहा था, "गीत को विश्वसनीय बनाने के लिए इसे मुंबई की सड़कों पर फिल्माने का फैसला लिया गया और इसके लिए मैंने गिरगांव के नजदीक अपने गृह क्षेत्र खेतवाडी को चयन किया, जहां मैं पैदा हुआ और बड़ा हुआ. सिनेमेटोग्राफर एन. सत्येन को इस बारे में बताया तो वह भी बेहद अभिभूत हुए. इस तरह हमने ठीक उस जगह पर गीत को शूट किया, जहां मैं दही हांडी सेलिब्रेट करता था."

    मनमोहन देसाई के अनुसार शम्मी कपूर को अपनी तरह से नाचने की छूट दी गई थी हालांकि डांस डायरेक्टर पी. राज ने कुछ जगहों पर उनके स्टेप्स को सुधारा था. गीत के फिल्मांकन में मौजूद भीड़ में अधिकांश लोग मनमोहन देसाई के दोस्त थे या फिर खेतवाडी के रहनेवाले.

    मनमोहन देसाई का आइडिया कमाल कर गया. शम्मी कपूर दिल खोलकर नाचे तो मोहम्मद रफी ने अपने सुरों से इस गीत को ऐसी ऊंचाई तक पहुंचा दिया, जहां गोविंदा से जुड़ा कोई गीत नहीं पहुंच सका. इस गीत का हमेशा-हमेशा के लिए कृष्ण जन्माष्टमी से नाता जुड़ गया.

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