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  • गुलशन कुमार मर्डर केस में बॉम्बे हाईकोर्ट आज सुनाएगा फैसला, मंदिर के बाहर 16 गोलियों से छलनी किया था शरीर

गुलशन कुमार मर्डर केस में बॉम्बे हाईकोर्ट आज सुनाएगा फैसला, मंदिर के बाहर 16 गोलियों से छलनी किया था शरीर

गुलशन कुमार को 16 गोलियां मारी गई थीं.

गुलशन कुमार को 16 गोलियां मारी गई थीं.

टी-सीरीज के संस्‍थापक गुलशन कुमार (Gulshan Kumar) की 12 अगस्‍त, 1997 को जूहू इलाके में हत्‍या (Gulshan Kumar Murder) कर दी गई थी. मंदिर के बाहर उनके शरीर को 16 गोलियों से छलनी कर दिया गया था.

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    मुंबई. गुलशन कुमार मर्डर केस में बॉम्‍बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) आज अपना फैसला सुनाएगा. टी-सीरीज के संस्‍थापक गुलशन कुमार (Gulshan Kumar) की 12 अगस्‍त, 1997 को जूहू इलाके में हत्‍या (Gulshan Kumar Murder) कर दी गई थी. घटना का अंजाम बदमाशों ने तब दिया जब वह रोज की तरह पश्चिमी मुंबई केअंधेरी इलाके में जीतनगर स्थित जीतेश्वर महादेव मंदिर में सुबह 8 बजे पूजा करने पहुंचे थे. तभी मंदिर के बाहर उनके शरीर को 16 गोलियों से छलनी कर दिया गया था. उनकी हत्या की खबर से पूरे बॉलीवुड में सनसनी फैल गई थी.

    जस्टिस जाधव और बोरकर की बेंच इस गुलशन कुमार मर्डर केस ( Gulshan Kumar Murder Case) का फैसला सुनाएगी. हाईकोर्ट में कुल चार अपीलें सूचीबद्ध हैं, जिनमें तीन अपीलें हत्या के आरोपी राउफ मर्चेंट, राकेश खाओकर के खिलाफ है. वहीं एक अपील महाराष्ट्र सरकार की है.

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    दरअसल, मर्चेंट को गुलशन कुमार हत्या के केस में कोर्ट ने दोषी ठहराया था. अप्रैल 2002 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. साल 2009 में उसे बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल मिली थी. इसी दौरान वह बांग्लादेश भाग गया था, हालांकि बाद में बांग्लादेश पुलिस ने उसे फर्जी पासपोर्ट मामले में अरेस्ट किया. मर्चेंट को बांग्लादेश में अरेस्ट करने के बाद पहले गाजीपुर के काशिमपुर जेल में रखा गया.

    कैसेट किंग के नाम से मशहूर टी सीरीज कंपनी के मालिक गुलशन कुमार की कहानी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. गुलशन कुमार का संगीत या बिजनेस से कोई सरोकार नहीं था. एक वक्त ऐसा था, जब वो अपने पिता के साथ दिल्ली के दरियागंज में जूस की दुकान चलाते थे. उनकी किस्मत ने जबरदस्त पलटी खाई. वो जूस मेकर से कैसेट किंग बन गए.

    80 के दशक में उन्होंने टी सीरीज की स्थापना की और 90 के दशक तक वो कैसेट किंग के नाम से मशहूर हो चुके थे. टी सीरीज करोड़ों की कंपनी बन चुकी थी.

    गुलशन कुमार वैष्णो देवी के भक्त थे. वैष्णो देवी में उनकी गहरी आस्था थी. उन्होंने वैष्णों देवी में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए काफी सारे काम करवाए. अबु सलेम ने गुलशन कुमार को मारने की जिम्मेदारी दाऊद मर्चेंट और विनोद जगताप नाम के शार्प शूटरों को दी थी. 9 जनवरी 2001 को विनोद जगताप ने कुबूल किया कि उसने ही गुलशन कुमार को गोली मारी.

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