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Lata Mangeshkar B'day: 92 साल के हो रहल लता दीदी पहिले दिने आशा भोंसले के चलते स्कूल छोड़ देहली

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Happy Birthday Lata Mangeshkar: भारत रत्न, स्वर कोकिला अउरी क्वीन ऑफ मेलोडी कहाए वाली लता मंगेशकर 28 सितंबर के 92 साल के हो गइलीं. लता दीदी के भारत के बच्चा बच्चा जानत बा. 1942 से अब ले उनके फैन फालोइंग देश विदेश ले फइलल बा. बहुत लोग लता जी के माता सरस्वती के वरद-पुत्री भी मानेला.

  • News18Hindi
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अपना गावल गीतन से लता मंगेशकर लोगन में एतना लोकप्रिय बाड़ी कि सभे उनके प्यार से लता दीदी कहेला. ई लोगन के मन में उनका खातिर असीम श्रद्धा ही ह कि लइका से जवान ले, इहाँ तक कि बुढ़वा बाबा लोग भी उनके लता दीदी कहेला. महाराज, एह बेरा के पीढ़ी लता दीदी के गाना सुनके बड़ भइल बा. लता जी 36 गो देसी विदेसी भाषा में लगभग 25 हजार से बेसी गाना गवले बाड़ी. उ 1000 से ऊपर फिल्मन में गीत गवले बाड़ी.

उहे भोजपुरी फिल्म संगीत के पहिला गीत भी गवले बाड़ी. पहिला भोजपुरी फिल्म ‘हे गंगा मईया तोहे पियरी चढईबो के’ टाइटल ट्रैक उ अपना छोट बहिन उषा मंगेशकर के साथ मिलके गवले बाड़ी. ई गाना त बुझी इतिहास के एगो बड़ घटना बा. ‘हे गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो, सइयाँ से कर द मिलनवा हे राम’ के के भुला सकेला. एही फिलिम में दूनू बहिन के जोड़ी एगो अउर इठलाये वाला गाना गवले रहे. गाना रहे ‘मारे करेजवा में तीर’. ई गाना अभियो लोग के जुबान पर बा, भोजपुरी प्रेमी हिन्दी फिल्म अउरी संगीत से भी जुड़ल बा. एही से हमनी खातिर त दुनू हाथ में लड्डू वाला स्थिति रहेला. लता दीदी, रफी साहब, मन्ना डे, किशोर दा जइसन लोग भोजपुरी खातिर गीत गवले बा.

लता मंगेशकर के जन्म 28 सितंबर 1929 के इंदौर में भइल रहे. उ अपना माई बाप के सबसे बड़ संतान हई. उनके पिता जी दीनानाथ मंगेशकर मराठी थिएटर के प्रसिद्ध अभिनेता आ गायक संगीतकार रहलें. उनके माई शेवन्ती एगो बड़ गुजराती सेठ के बेटी रहली. लता जी के बचपन के नाम हेमा रहे. बाद में उनके पिता अपना नाटक के एगो किरदार लतिका के नाम पर लता रख देहले. उनके बाद उनके तीन गो बहिन मीना खाडिकर, आशा भोंसले, उषा मंगेशकर आ छोट भाई हृदयनाथ मंगेशकर भइलें. सभे भाई बहिन स्थापित गायक, संगीतकार रह चुकल बा.

लता जी बचपने में अपना पिता जी के नाटक में अभिनय करे लगली. आ अपने पिता जी से ही गावे के भी शिक्षा लेहली. जब लता मंगेशकर पहिला बेर स्कूल में पढ़े गइली त आपन छोट बहिन आशा के गोदी में लेके गइली. उनके बचपन से आशा से विशेष लगाव रहे. जब स्कूल के मास्टर एक नामांकन पर दू गो विद्यार्थी के आवे ना देहले त उ ओहि दिने स्कूल छोड़ देहली. लता जी जब 13 साल के रहली तब उनके पिता जी के मृत्यु हो गइल आ घर के सब भार उनका पर आ गइल. उनके पिता जी के मित्र मास्टर विनायक फिल्म कंपनी के मालिक रहलें अउरी उहे लता के आगे काम देहलें. लता जी 1942 में पहिला गीत गवली जवन हटा दिहल गइल फेर ओही साल एगो मराठी फिल्म पहिली मंगला-गौर में अभिनय भी कइली अउरी गीत भी गवली. एकरा बाद उनके हिन्दी में भी मास्टर विनायक जी काम देहले.

हालांकि, लता जी पर जे सबसे ढेर भरोसा कइल उ रहलें गुलाम हैदर. उ कहलें कि आज भले लता के लोग काम नइखे देत लेकिन अइसन दिन आई कि लोग लता के चिरौरी करी कि उ ओ लोग के फिलिम में गा देस. आखिर आगे जाके भइल भी अइसन. लता जी के पहिला हिट गीत उनकरे हिन्दी फिल्म मजबूर (1948) में आइल, ‘दिल मेरा तोड़ा, मुझे कहीं का ना छोड़ा’. ई लता जी के पहिला बड़ हिट गाना रहे. एकरा बाद उनके काम मिलल चालू हो गइल.

लता जी भोजपुरी सिनेमा खातिर बहुते गीत गवली

लता मंगेशकर भोजपुरी के दुसरका भोजपुरी फिल्म ‘लागी नाही छूटे राम’ में भी एगो गाना गवली. उ गाना भोजपुरी सिनेमा के कुछ महान गीतन में से एगो बा. ‘लाली लाली होठवा से बरसे ललईया हो कि रस चुएला’ गाना के तब के हिन्दी सिनेमा के मशहूर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी कलमबद्ध कइले रहलें. लता जी के साथे तलत महमूद एह गाना के गवले रहलें. कुमकुम आ असीम कुमार पर फ़िल्मावल ई गीत आजुओ लोग बड़ा चाव से सुनेला.

मुजरा शैली में एगो गाना फिल्मावल गइल जे के स्वर लता दीदी देहली बोल रहे ‘लुक छिप बदरा में’. ई गाना तब के हिंदी सिनेमा के हिट मुजरा गीतन के बराबरी के रहे आ गैर भोजपुरी भाषी भी एके खूब चाव से सुने लोग. इहो गाना भोजपुरी के पहिलके फिल्म में रहे. लता मंगेशकर बाद के फिल्म में भी बहुते गीत गवली. उ रवि किशन के फिल्म दूल्हा अइसन चाही में एगो गाना गवले बाड़ी. गाना ‘अपना नजरिया से दूर काहें कइला’ रवि किशन आ स्वीटी छाबड़ा पर फिल्मावल गइल बा. उ रवि किशन के ही फिल्म ‘माई त बस माई बाड़ी’ में भी एगो गीत कइसन विधना के खेल हो रामा गवले बाड़ी.

लता मंगेशकर के संगीत जगत खातिर असीमित अउरी महान योगदान खातिर उनके 1969 में पद्मभूषण, 1989 में फिल्म जगत के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार आ 1999 में पद्म विभूषण से नवाजल गइल. उनके गावल गीतन के तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार आ आठ बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिलल. 15 बार उनके बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट असोसिएशन अवॉर्ड मिलल. 1984 में मध्यप्रदेश सरकार त लता मंगेशकर के नाम पर संगीत जगत में अतुलनीय योगदान खातिर पुरस्कार दिहल चालू कइलस. संजोग देखीं, लता दीदी के साथे एक से एक सुपरहिट गीत गावे वाला किशोर दा के एह सम्मान के दुसरा साल में सम्मानित कइल गइल. 2001 में लता दीदी के देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित कइल गइल.

अब उनके जन्मदिन पर इहे कामना बा कि उनके मौजूदगी असहीं हम संगीत प्रेमियन खातिर बनल रहे अउरी उ स्वस्थ रहस, शतायु होखस!

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य व सिनेमा के जानकार हैं )

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