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Ashley Judd ने लड़ी 55 घंटों तक मौत से जंग फिर फरिश्ते बनकर आए अंजान लोगों ने बचाई जान

एश्ले जूड ने सोशल मीडिया पर इस घटचना का जिक्र किया है.
एश्ले जूड ने सोशल मीडिया पर इस घटचना का जिक्र किया है.

अमेरिकी एक्ट्रेस एश्ले जूड (Ashley Judd) हाल में एक घटना में बुरी तरह जख्मी हो गई थीं, जिसमें उनके एक पैर की हड्डियां टूट गई थीं. कोन्गो (Congo) के रेनफॉरेस्ट में गिरने से यह हादसा हुआ था. तब वहां के लोगों ने उन्हें मौत के मुंह से बाहर निकाला. इस पूरी घटना का जिक्र एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पर किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 18, 2021, 2:43 PM IST
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नई दिल्लीः जब हम मुसीबत में होते हैं, तब अक्सर कोई अंजान इंसान हमारी निःस्वार्थ भाव से मदद करता है. तब ऐसी घटनाएं हमेशा हमारे मन में बस जाती हैं. कुछ ऐसा ही अमेरिकी एक्ट्रेस और एक्टिविस्ट एश्ले जूड (Ashley Judd) के साथ हुआ है. उन्होंने इस घटना का जिक्र सोशल मीडिया पर दिया है. एश्ले ने अपनी जिंदगी की इस बड़ी घटना के बारे में इंस्टाग्राम पर बताया है. उन्होंने घटना की कई तस्वीरों के साथ जिंदगी और मौत से जूझती अपनी कहानी शेयर की है. वह अफ्रीका के कोन्गो (Democratic Republic of the Congo) में थी, जब यह घटना उनके साथ घटी. उन्होंने वहां के लोगों के हिम्मत और इच्छाशक्ति की भी काफी प्रशंसा की है.

दरअसल, एश्ले जूड (Ashley Judd) कोन्गों के वर्षा वन से गुजर रही थीं. वहां जंगल में गिरने से वह गंभीर रुप से जख्मी हो गई थीं. एश्ले ने इंस्टाग्राम पर बताया कि इस घटना में उनका एक पैर बुरी तरह जख्मी हो गया था, जिससे पैर की हड्डियां टूट गई थीं. इस हालात में अक्सर इंटरनल ब्लीडिंग से मौत हो जाती है. अगर कोन्गो के भाई-बहनों ने समय पर उनकी मदद न की होती, तो एश्ले की भी मौत इंटरनल ब्लीडिंग से हो चुकी होती या फिर वो अपना पैर गंवा चुकी होतीं. एश्ले लिखती हैं, ' मैं आज कोन्गो के लोगों की मदद के बारे में सोचकर काफी इमोशनल हूं. मेरी 55 घंटों की यात्रा में मेरी लाइफ बचाने में उनका पूरा योगदान है.'

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एश्ले ने बताया कि इस हादसे के बाद के 55 घंटे उनकी जिंदगी के बेहद अहम पल थे. ये समय बेहद चुनौतीपूर्ण, मुश्किल और दर्द भरा गुजरा था. घटना के करीब 5 घंटे बाद एक शख्स ने उनकी हड्डियों को रीसेट करने की कोशिश की. दर्द इतना भयानक था कि कई बार एश्ले शॉक में चली गई थीं और कई बार बेहोश हुईं. इसके बाद अगले डेढ़ घंटे उन्होंने एक हैमॉक में लेटे हुए बिताए और उन्हें कोन्गो के लोगों ने उठाया हुआ था. कोन्गो के लोग ये काम नंगे पैर ही कर रहे थे और इस दौरान वे नदी और पहाड़ों को पार करते हुए कैंप पहुंचे.
आखिर में एश्ले ने कहा कि कोन्गो से दक्षिण अफ्रीका के आईसीयू ट्रॉमा यूनिट तक पहुंचने का सफर अविश्वसनीय था, मेरे और कोन्गो के लोगों के बीच एक अंतर ये था कि मेरे पास ऐसी आपदाओं और घटनाओं के लिए इंश्योरेंस था, पर कोन्गो के लोगों के पास ऐसी सुविधा नहीं है.
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