...जब हाॅल में रोने और चीखने लगे दर्शक, यही है मार्वल फिल्मों का जादू

11 साल से चला आ रहा यह कल्ट जिसे हम Avengers के नाम से जानते हैं अब खत्म होने जा रहा है और ये लोग इस इतिहास का हिस्सा बन रहे थे.

Sushant Mohan | News18Hindi
Updated: April 26, 2019, 8:57 PM IST
Sushant Mohan | News18Hindi
Updated: April 26, 2019, 8:57 PM IST
किसी फिल्म का 75 रुपये का टिकट अगर 375 रुपये में ब्लैक हो रहा हो. फिर भी लोग कतार में खड़े होकर टिकट ब्लैक करने वाले से रिक्वेस्ट करते दिखें तो आपको समझ जाना चाहिए की आप किसी खास फिल्म को देखने जा रहे हैं. हमारे टिकट पर लोगों की नज़र थी और हमसे ईर्ष्या भी. स्कूल ड्रेस में फिल्म देखने आए एक लड़के ने मुझसे पूछा, "भईया फिल्म का टिकट बेचेंगे. हमें तो मिल ही नहीं रहा है. आप को दूसरा मिल जाएगा." मैंने टिकट वाली जेब को फिर से टटोला और अब सीधा हॉल के अंदर का रुख किया.

भारत में किसी फिल्म को लेकर ऐसा क्रेज़ तभी बनता है जब उसमें सलमान होते हैं या रजनीकांत. हाल ही में 'बाहुबली 2' (2017) के लिए ऐसा दीवानापन देखने को मिला था, क्योंकि लोगों को जानना था 'कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा ?' और अब Avengers Endgame के लिए ऐसा जोश दर्शको में दिख रहा है.



दुनिया भर में इस फिल्म को लेकर एक अजीब सी दीवानगी है. इसका प्रमाण है एक दिन में इस फिल्म की रिकॉर्ड 1186 करोड़ रुपये की कमाई. ये पहली फिल्म है जिसके लिए भारत में सिनेमा हॉल 24 घंटों के लिए खोले जा रहे हैं. कारण है दर्शकों की डिमांड. वो जानना चाहते हैं कि उनके सुपरहीरोज़ वापसी कैसे करेंगे?

क्यों है दीवानगी ?

ठीक एक साल पहले आई 'Avengers Infinity War' (अप्रैल 2018) में आए सुपरविलेन थानोस ने आधे से ज्यादा सुपरहीरोज़ को एक चुटकी में गायब कर दिया था. इस घटना के बाद गायब हुए सुपरहीरोज़ को वापस बुलाने का ज़िम्मा बचे हुए सुपरहीरोज़ के पास था. वो इस मिशन को 'Avengers Endgame' में पूरा करते नज़र आएंगे.  लेकिन इस फिल्म के लिए दीवानगी एक ही साल में बनी हो, ऐसा नहीं है. ये मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की 11 साल की मेहनत है जिसका फल आज वो एक दिन में एक हज़ार करोड़ की कमाई के रूप में हासिल कर रहे हैं.

Avengers Endgame Movie Review: सुपर हीरोज का ये अंदाज़ आपके होश उड़ा देगा

11 साल से चला आ रहा यह कल्ट जिसे हम Avengers के नाम से जानते हैं अब खत्म होने जा रहा है. ये लोग इस इतिहास का हिस्सा बन रहे थे. इस फिल्म की कहानी के बारे में कुछ भी लिखना फिल्म का स्पाॅइलर देना होगा. इसलिए कहानी पर बात नहीं करेंगे, लेकिन बतौर फिल्म ये मार्वल की सबसे लंबी फिल्मों में से एक है और बिना किसी शक के कह सकते हैं कि ये उनकी सबसे भावुक फिल्म है.
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साल 2008 में 'आयरन मैन' के साथ शुरू हुआ ये सफर मार्वल कॉमिक्स के रचियताओं में से एक स्टैन ली के किरदारों को एक-एक कर पर्दे पर लाने लगा. 'कैप्टन अमेरिका', 'थॉर', 'ब्लैक विडो', 'हल्क' के साथ शुरू हुई इन फिल्मों में धीरे धीरे 'स्पाइडर मैन' और 'कैप्टन मार्वल' जैसे हीरोज़ ने एंट्री ली और बन गया दुनिया का सबसे बड़ा स्टारकास्ट.

बदला इतिहास

मार्वल कॉमिक्स से निकले ये किरदार अमेरिका की सबसे बड़ी कॉमिक वॉर का अंत भी कर गए. क्योंकि जैसे भारत में 'डायमंड कॉमिक्स' (चाचा चौधरी, बिल्लू, पिंकी) और 'राज कॉमिक्स' (नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव, भोकाल) के बीच एक लंबा वॉर चला. वैसे ही अमेरिका में भी 'मार्वल कॉमिक्स' (एवेंजर्स, एक्स मैन, स्पाइडर मैन) और 'डीसी कॉमिक्स' (सुपरमैन, बैटमैन और जस्टिस लीग) के बीच लंबी लड़ाई थी. बैटमैन और सुपरमैन की कॉमिक सेल के आगे मार्वल कमज़ोर पड़ने भी लगा था. लेकिन फिर फिल्में बननी शुरू हुई.

मार्वल की फिल्मों के आगे डीसी कॉमिक की फिल्में असफल रहीं और ज़ाहिर तौर पर कॉमिक की सेल पर भी फिल्मों की सफलता का प्रभाव पड़ा.  इस फिल्म का ही कमाल है कि 2007 में अमेरिका के मात्र 27% कॉमिक बाज़ार पर कब्ज़ा रखने वाले मार्वल कॉमिक ने 2017 में 40% प्रतिशत कॉमिक बाज़ार अपने कब्ज़े में ले लिया.

इस फिल्म की ताकत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अपने सबसे ज्यादा बिकने वाले कॉमिक्स 'जस्टिस लीग' पर करोड़ों रुपये लगाने के बाद भी डीसी कॉमिक्स और वॉर्नर ब्रदर्स की फिल्मों को वैसा फायदा नहीं मिला जैसा 'Avengers' फिल्मों को मिला और वॉर्नर ब्रदर्स ने चुपचाप अपनी कुछ फिल्मों को ठंडे बस्ते में डाल दिया.

बात जहां तक इस फिल्म की है तो इस फिल्म का पूरा श्रेय निर्देशक रूसो बंधुओं को मिलना चाहिए, क्योंकि उन्होंने इस आखिरी फिल्म को सिर्फ एक्शन फिल्म नहीं बनाया. उन्होंने इस फिल्म के जरिए सुपरहीरोज़ का एक नया चेहरा दिखाया. सुपरहीरोज़ जो हारना भी जानते हैं और रोना भी.

फिल्म समीक्षा

जिस फिल्म के लिए 24 घंटे सिनेमा हॉल खोले जा रहे हैं ज़ाहिर है कि उसके पहले शो में भीड़ मिलनी तय थी.  मेरे आसपास छोटे बच्चों और युवाओं का समूह था, वो स्कूल बंक कर आए थे, काॅलेज से आए थे और वो शांत थे, एग्जाम हाॅल जैसी शांति. खचाखच भरे हाॅल में जैसे ही हीरोज़ की एंट्री होनी शुरू हुई इस भीड़ में जोश आ गया. लोगों ने सुपरहीरोज़ के नाम के नारे लगाने शुरू कर दिए.

हर सुपरहीरो की एंट्री पर भीड़ जोरदार आवाज़ निकालती और निर्देशकों को ये मालूम था इसलिए फिल्म में बहुत सारा इमोशन है और मार्वल फैंस के लिए ये किसी जाॅयराइड से कम नहीं था. आपको लिखे हुए पर यकीन नहीं होगा पर मैंने अपनी आंखो से देखा जब थानोस उनके चहेते हीरो की धुनाई कर रहा था तो हॉल में बैठे दर्शक चिल्ला रहे थे,"इसे बचा लो भगवान, नहीं नहीं, ये नहीं मरना चाहिए."

कई लोगों ने पूछा कि फिल्म आपको कैसी लगी तो मेरी राय से ज्यादा आपको उस लड़के का रिएक्शन सुनना चाहिए जो इस फिल्म को देख रहा था और मार्वल का फैन था. फिल्म में एक दृश्य है जिसमें थानोस एक बार फिर सभी सुपरहीरोज़ पर भारी पड़ने लगता है और लगने लगता है कि वो फिर से जीत जाएगा. इस सीन के दौरान वो लड़का उठ खड़ा हुआ और चिल्लाया,"इसको मार कैप्टन अमेरिका, इसको मार, भाई हम सब हैं, तू मार..."

इस फिल्म की यही खासियत है कि पर्दे पर मौजूद इन सुपरहीरोज़ से लोग ऐसे जुड़ गए हैं जैसे वो उनके असल ज़िंदगी के दोस्त हैं. इस फिल्म के साथ हम सभी मार्वल फैंस की ज़िंदगी का एक अध्याय भी पूरा हो गया है.

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