मेरा असली नाम 'राहुल कुमार जौहर' था और मेरे दो चेहरे हैं: करन जौहर

करन ने माना कि शाहरुख़-सलमान वाला 90ब्बे वाला दशक ज्यादा बेहतर था और तब लोग ज्यादा खुलकर अपनी बात रख सकते थे.

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: December 7, 2018, 7:42 PM IST
मेरा असली नाम 'राहुल कुमार जौहर' था और मेरे दो चेहरे हैं: करन जौहर
कॉफी विद करण'
Ankit Francis | News18Hindi
Updated: December 7, 2018, 7:42 PM IST
दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम 'जागरण फोरम' में फिल्म निर्माता-निर्देशक करन जौहर ने खुलासा किया कि जन्मपत्री में उनका नाम राहुल कुमार जौहर था जिसे बाद में बदल कर करन कर दिया गया. करन ने बताया कि ये सच है कि मेरे दो चेहरे हैं, मैं कॉर्पोरेट मीटिंग्स में सूट पहन सकता हूं और फैशन शो में चमकीली ड्रेस भी पहन लेता हूं.

फिल्म क्रिटिक मयंक शेखर से बातचीत में करन ने माना कि शाहरुख़-सलमान वाला 90ब्बे वाला दशक ज्यादा बेहतर था और तब लोग ज्यादा खुलकर अपनी बात रख सकते थे. आजकल जो स्टार्स हैं उन्हें हर एक बात बोलने और कुछ भी करने से पहले कई बार सोचना पड़ता है. सोशल मीडिया के आने के बाद से उन्हें ये डर सताता है उनकी किस बात पर वो ट्रोल हो जाएंगे.

करन ने कहा कि मैं लोगों की सीधी आलोचना करने से बचता हूं क्योंकि उसका ज्यादातर उलटा असर होता है मैं तारीफ करने में भरोसा रखता हूं. अगर कभी आलोचना करनी भी पड़े तो मेरा तरीका एकदम अलग होता है. लोग इसे मेरा दुनियादारी वाला रवैया भी कह सकते हैं पर मुझे लगता है इससे लोगों से बात करने में आसनी होती है. आपको अपने ईगो को किनारे करना होता है और उसके बाद आप एक सफल आदमी बन जाते हैं.

कॉफ़ी विद करन से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा कोई स्टार नहीं है जिसके पास बताने के लिए कुछ भी न हो या फिर उसकी जिंदगी में कोई ग्रे एरिया न रहा हो लेकिन हर कोई उसे पब्लिक स्फेयर में शेयर करे ऐसा नहीं है, कुछ लोग ऐसा नहीं चाहते. उन्होंने ये भी माना कि इस शो के बाद उनसे लोग उनकी फिल्मों से ज्यादा इस सो के बारे में बातें करते हैं.

करन ने कहा कि बतौर डायरेक्टर मैं इंडस्ट्री में 20 साल पूरे कर लिए हैं और मैं अपने काम से काफी खुश हूं. मुझे स्पॉटलाइट में रहना पसंद है. मुझे कुछ लोगों ने कॉफ़ी विद करण करने से भी मना किया गया था, सब कहते थे तुम्हें फिल्म निर्माता के बतौर एक मिस्ट्री जो तुमसे जुड़ी रहती है उसे बचाए रखना चाहिए हालांकि मैंने ऐसा कुछ नहीं किया.

करन ने ये भी माना कि उन्होंने अभी तक एक भी ऐसी फिल्म नहीं बनाई है जिसे सबसे बढ़िया भारतीय सिनेमा में गिना जाए, यही बात मुझे और फ़िल्में बनाने के लिए प्रेरित करती है. करन ने ये भी बताया कि मेरे पिता चाहते थे मैं एक्सपोर्ट फर्म चलाऊं और फ़िल्में नहीं बनाऊं. ये वो वक़्त था जब मेरे पिता फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे थे. मैंने देखा जब मेरे पिता को फिल्म प्रीमियर में सबसे पीछे की या एकदम कोने की सीट दी जाती थी. हालांकि वो वक़्त भी गुजर गया और आज मैं आपके सामने हूं.
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