अपने दैनिक आहार पर नजर रखें, ऐसे बनाएं अपना प्रोटीन रिपोर्ट कार्ड

प्रोटीन डायट का रखे खयाल
प्रोटीन डायट का रखे खयाल

हाल ही में मन की बात एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूट्रिशनल रिपोर्ट कार्ड के बारे में बात की, जो विद्यार्थियों के बीच न्यूट्रिशन की जागरुकता बढ़ाने में मदद करेगा. यह विचार आकर्षक है, लेकिन भारत में केवल स्कूल के बच्चे ही नहीं, जिनके बीच जागरुकता का फैलाया जाना जरूरी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 10, 2020, 10:30 AM IST
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हम जो आहार रोज लेते हैं, उससे निर्धारित होता है कि हमारे शरीर का विकास कैसा होगा और यह कैसे काम करेगा. यह तो सभी जानते हैं कि सेहतमंद जीवनशैली के लिए सही न्यूट्रिशन के साथ प्रोटीन, आवश्यक कार्ब्स एवं फैट और विटामिन आदि युक्त संतुलित आहार लिया जाना जरूरी है. लेकिन हमारे देश के नागरिक प्रोटीन की कमी से जूझते हैं क्योंकि भारतीय घरों में लिए जाने वाले आम आहार में प्रोटीन की कमी होती जा रही है. भारतीय आहार में कार्बोहाईड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है और आजकल प्रोटीन की मात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा कम होती जा रही है.

हाल ही में किए गए एक अध्ययन, इंडियाज़ प्रोटीन पैराडॉक्स में सामने आया है कि ज्यादातर भारतीय घरों को यह जानकारी नहीं होती है कि हमें प्रोटीन इतना जरूरी क्यों है और प्रोटीन से इम्युनिटी बढ़ती है. एक अध्ययन में दावा किया गया कि जब कुछ लोगों को 20 से ज्यादा खाद्य सामग्री की सूची दी गई, तो वो उसमें मौजूद 11 प्रोटीनयुक्त खाद्य सामग्री में 3 से ज्यादा की पहचान नहीं कर पाए. इस अध्ययन में सामने आया कि भारतीय घरों में कुछ भ्रांतियां हैं, जो देश में प्रोटीन के उपभोग को प्रभावित करती हैं, और भारत में प्रोटीन की कमी का कारण हैं.

हाल ही में मन की बात एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूट्रिशनल रिपोर्ट कार्ड के बारे में बात की, जो विद्यार्थियों के बीच न्यूट्रिशन की जागरुकता बढ़ाने में मदद करेगा. यह विचार आकर्षक है, लेकिन भारत में केवल स्कूल के बच्चे ही नहीं, जिनके बीच जागरुकता का फैलाया जाना जरूरी है.



व्यक्तिगत कमी, उसके प्रभाव और इस कमी को कैसे दूर किया जाए, इस विवरण के साथ रिपोर्ट कार्ड सभी के लिए फायदेमंद होगा. बीएमआई, कमर की मोटाई, कमर व नितंब का अनुपात किसी के भी प्राथमिक हैल्थ रिपोर्ट कार्ड के सही विषय हैं, लेकिन हममें से अधिकांश लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती कि हमारे दैनिक आहार में कौन से माईक्रो व मैक्रो न्यूट्रिएंट्स की कमी है. उदाहरण के लिए 73 प्रतिशत शहरी भारत के दैनिक आहार में प्रोटीन की कमी है और 93 प्रतिशत लोगों को प्रोटीन की दैनिक जरूरत का अंदाजा नहीं.
इस महत्वाकांक्षी अभियान को गति देने के लिए भारत के प्रसिद्ध जन स्वास्थ्य जागरुकता अभियानों में से एक, ‘राईट टू प्रोटीन’ (righttoprotein.com) ने भारत सरकार के इस उद्देश्य के लिए काम करना शुरू किया और एक एक्सक्लुसिव ‘प्रोटीन रिपोर्ट कार्ड’ लॉन्च किया. यह रिपोर्ट कार्ड खुद के आंकलन व जागरुकता की इस कमी को पूरा करेगा.

प्रोटीन रिपोर्ट कार्ड निम्नलिखित प्रक्रिया द्वारा बनाया जा सकता है-
1. righttoprotein.com पर प्रोटीन-ओ-मीटर पर जाएं.
2. अपना नाम, उम्र, वजन, लंबाई, जीवनशैली, लिंग एवं खाने की पसंद डालकर प्रोटीन की दैनिक जरूरत की गणना करें.
3. ब्रेकफास्ट, लंच, स्नैक्स एवं डिनर सहित खाना खाने का विवरण डालें.
4. इसके बाद प्रोटीन-ओ-मीटर डाले गए खाने के सामान से मिलने वाले प्रोटीन की मात्रा की गणना करेगा.
5. खाने की आदत के आधार पर यूज़र्स अपना कस्टमाईज़्ड प्रोटीन रिपोर्ट कार्ड ऑटो-डाउनलोड कर सकते हैं.
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