Chhichhore: इन 5 वजहों से छिछोरे देखना रहेगा 'पैसा वसूल'

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Updated: September 6, 2019, 11:23 AM IST
Chhichhore: इन 5 वजहों से छिछोरे देखना रहेगा 'पैसा वसूल'
नीतिश तिवारी की फिल्म छिछोरे आज रिलीज हो चुकी है. पढ़ें फिल्म का रिव्यू.

छिछोरे (Chhichhore) में किरदारों को कुछ इस तरीके से गढ़ा गया है, कि उनके नाम, उनका हुलिया, उनकी हरकतें और उनके बतियाने का अंदाज आपको पुरानी यादों में ले जाता है. (Chhichhore Movie Review)

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कॉलेज लाइफ पर तमाम फिल्में (Movie) बनती हैं. लेकिन साल 1992 में आई 'जो जीता वही सिकंदर (jo jeeta wohi sikandar)' और साल 2009 में आई 'थ्री ईडियट्स (3 idiots)' की बात किए बिना ये सब्जेक्ट अधूरा लगता है. कॉलेज लाइफ पर बनी आज एक और फिल्म रिलीज हुई है, छिछोरे (Chhichhore). फिल्म को लेकर तमाम रिव्यूज में यही कहा जा रहा है कि ये 'जो जीता वही सिकंदर' और 'थ्री ईडियट्स' का कॉकटेल है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या इस फिल्म में इतना दम है कि थियेटर में जाकर इसे देखा जाए. ऐसे में हम आपको 5 कारण बता रहे हैं, जिससे आपका फिल्म देखना पैसा वसूल साबित हो सकता है.

1. हॉस्टल लाइफ
कॉलेज लाइफ पर बनी फिल्म है, जाहिर सी बात है हॉस्टल की कहानी ही इस फिल्म की जान है. छिछोरे में किरदारों को कुछ इस तरीके से गढ़ा गया है, कि उनके नाम, उनका हुलिया, उनकी हरकतें और उनके बतियाने का अंदाज आपको पुरानी यादों में ले जाता है. हॉस्टल लाइफ में आपकी मुलाकात मुख्य रूप से अन्नी (सुशांत सिंह राजपूत), सेक्सा (वरुण शर्मा), एसिड (नवीन पॉलिशेट्टी), डेरेक (ताहिर राज भसीन), बेबड़ा (सहर्ष कुमार शुक्ला) और मम्मी (तुषार पांडे) से होगी. मसलन इनकी हरकतें देखिए, बेबड़ा को शराब की लता है. मम्मी अपनी मां के पल्लू से चिपकने वाला पढ़ाकू बच्चा है. यानी सब किरदार मिलकर आपको अतीत की यादों में ले जाते हैं, जिन्हें देखकर आपको अच्छा लगेगा.

2. विफलता की बात

आजकल पढ़ाई का मतलब है परसेंटेज. लेकिन क्या उस बच्चे के बारे में कोई बात करना चाहता है, जो विफल है? छिछोरे में आपको ये समझने के लिए मिलेगा कि बात अच्छे की होगी, तो बुरे की भी होनी चाहिए. फिल्म में अनिरुद्ध पाठक (सुशांत सिंह राजपूत) और माया (श्रृद्धा कपूर) का बेटा जब इंजीनियरिंग का एडमिशन लेने में विफल हो जाता है तो वह आत्महत्या का प्रयास करता है और इस तरह फिल्म विफलताओं पर भी बात करती है.

chhichhore
छिछोरे में सुशांत सिंह राजपूत प्रमुख भूमिकाओं में यह फिल्म कॉलेज और हॉस्टल लाइफ पर बनी है.


3. जीवन का संघर्ष
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कामयाब होने के लिए जो सबसे जरूरी चीज हैं वो है मेहनत और खुद पर आत्मविश्वास. ऐसे में फिल्म आपको ये भी बताएगी की जीवन में संघर्ष कितना जरूरी है. हालांकि, इस दौरान आपको 'थ्री ईडियट्स' की याद भी आएगी, लेकिन फिर भी छिछोरे आपको बांधे रखने में सफल होती है.

4. पीढ़ी का गैप
जैसे की शुरू से ही आप फिल्म के ट्रेलर में दो तरह के किरदार देख रहे हैं. हॉस्टल लाइफ के जवान लड़के-लड़कियां और वो बूढ़े दोस्त जो किसी खास वजह से आपस में मिलते हैं और फिर कहानी आपको कभी पुरानी यादों में तो कभी ताजी परिस्थियों की सैर पर ले जाती है. इस तरह के सीन भी आपको सुखद एहसास देते हैं.

5. ड्रामा, कॉमेडी और सबक
अंतिम बात ये है कि फिल्म में ड्रामा, कॉमेडी और जीवन के सबक का भरपूर डोज आपको मिलेगा. पिछले कुछ समय से एक अच्छी कॉमडी फिल्म की तलाश भी दर्शकों को है और वो फिल्म जिसे दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर देखा जा सके. ऐसे में छिछोरे आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी उतर सकती है. यानी 'छिछोरे' आपके मनोरंजन के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

यहां देखें फिल्म का ट्रेलर

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First published: September 6, 2019, 10:05 AM IST
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