मायावती को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहता है ये अभिनेता, थामा बसपा का दामन

पवन कल्याण और उनकी जनसेना पार्टी को अब तक गंभीरता से नहीं लेने वाले लोग उनकी राजामुंदरी में हुई जनसभा को देखकर चौंक गए थे.

Sanjay Tiwari | News18Hindi
Updated: March 15, 2019, 9:12 PM IST
मायावती को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहता है ये अभिनेता, थामा बसपा का दामन
अभिनेता पवन कल्याण
Sanjay Tiwari | News18Hindi
Updated: March 15, 2019, 9:12 PM IST
तेलुगू फिल्म स्टार पवन कल्याण ने मायावती से हाथ मिलाकर एक बार फिर साबित करने की कोशिश की है कि आंध्र प्रदेश की राजनीति में वो तीसरे विकल्प हैं. लखनऊ पहुंचकर पवन कल्याण ने मायावती से बातचीत की और फिर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने कहा कि वो पवन कल्याण को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहती हैं. मायवती ने पवन कल्याण की जनसेना पार्टी को बहुजन समाजवादी पार्टी के समर्थन का भी ऐलान किया. लेकिन सवाल यह है कि क्या पवन कल्याण आंध्र प्रदेश विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कुछ कमाल करने वाले हैं और बहुजन समाजवादी पार्टी के समर्थन से क्या उन्हें वाकई कोई फायदा होगा?

पवन कल्याण के विरोधी कहते हैं कि फिल्म स्टार से मिलने और उसे देखने को लालायित लोग वोट नहीं देने वाले. लेकिन पवन कल्याण और उनकी जनसेना पार्टी को अब तक गंभीरता से नहीं लेने वाले लोग उनकी राजामुंदरी में हुई जनसभा को देखकर चौंक गए थे. चंद दिनों पहले हुई उस जनसभा में 1 लाख से ज्यादा लोग इकट्ठा हुए थे. पवन कल्याण इससे खासे उत्साहित हैं. मायावती का साथ पाकर जाहिर तौर पर उनका उत्साह बढ़ा होगा. लेकिन राजनीति के जानकार मानते हैं कि संकेतों की इस राजनीति से ज्यादा कुछ नहीं होने वाला.





2014 के लोकसभा चुनाव में पवन कल्याण ने बीजेपी के समर्थन में जनसभाएं की थीं. उन्होंने नरेंद्र मोदी और चंद्रबाबू नायडू के लिए वोट मांगे थे. इस बार वो अपनी राजनीतिक पार्टी जनसेना तैयार कर मैदान में हैं. लेकिन आंध्र में कई लोग मानते हैं कि पवन कल्याण बीजेपी के संपर्क में हैं. उनके लिए इस छवि को तोड़ना सबसे जरूरी है. प्रोफेसर बी. जमीदार कहते हैं कि ‘मायावती का समर्थन मिलने से पवन कल्याण आंध्र में यह साबित कर पाएंगे कि वो बीजेपी के साथ नहीं हैं. लेकिन जमीन पर बहुजन समाज पार्टी और मायावती का बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं है. ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि सिर्फ मायावती के समर्थन के चलते पवन कल्याण को अनुसूचित जाति-जनजाति के वोट मिल जाएंगे.
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पवन कल्याण खुद कापू समाज से हैं और अनुसूचित जाति-जनजाति में उनकी सीधी पकड़ नहीं है. आंध्र प्रदेश में 18 फीसदी से ज्यादा SC/ST वोट हैं. पिछड़े वर्ग के बाद एससी-एसटी का वोट आंध्र की राजनीति में अहम रोल निभाता है. जगन मोहन रेड्डी की निगाह अनुसूचित जाति-जनजाति के वोटों पर लंबे समय से है. अगर यह वोट बंटता है, तो चंद्रबाबू नायडू को फायदा मिल सकता है.​

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