एक्टर हूं लेकिन कास्टिंग एजेंसी को ऑडिशन नहीं दूंगा

मिखाइल कांतरु
मिखाइल कांतरु

थिएटर के जाने माने स्टार कास्टिंग एजेंसी को ऑडिशन नहीं देना चाहते. उन्होंने इसके पीछे गंभीर वजह बताई है.

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थिएटर कलाकार और लेखक मिखाइल कांतरु इन दिनों अपने आने वाले नाटक “दोराहा” में लेखक और अभिनेता दोनों की दोहरी भूमिका निभा रहे हैं. मिखाइल कहते हैं कि भारतीय सिनेमा और थिएटर में काम करने वाले लोगों को अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है. खासकर काम करने के तरीके में नए तरीके लाना ज़रुरी है. इस समय दोगुनी ज़िम्मेदारियों के बारे में बात करते वक्त उन्होंने कहा, “लेखकों के मुद्दों पर तो बात हुई है और होती रहेगी. लेकिन एक्टर्स की कुछ समस्याओं के बारे में कभी बात नहीं होती. मैं बतौर एक्टर एक बदलाव देखना चाहता हूं. समस्या यह है कि कास्टिंग एजेंसी अपनी ज़िम्मेदारी से चूक रही हैं और वह एक्टर्स को एक ही तरह का काम देते हैं.”

कान फ़िल्म फ़ेस्टिवल में सबमिट की गई अपनी शॉर्ट फ़िल्म “दि एंड गेम” में 35 साल के गुजराती बिज़नेसमैन का किरदार निभाने वाले मिखाइल अपने नाटक “जायंट” में 45 साल के ज़मींदार का रोल कर रहे थे और “दोराहा” नाटक में वह आर्मी परिवार में पले 25 साल के बेटे का रोल निभा रहे हैं. मिखाइल को ये बात अपसेट करती है कि कास्टिंग एजेंसी कुछ नया नहीं ऑफर कर रहीं, "अगर 30% कमिशन मिलने पर भी उनके लिए एक्टर की रोल वेल्यू मायने ही नहीं रखती तो मैं क्यों उनके पास जाऊं और इसलिए मैंने तय किया है कि मैं ऑडिशन्स नहीं दूंगा."





मिखाइल के अनुसार वो किसी कास्टिंग एजेंसी से जुड़ना नहीं चाहते हैं क्योंकि वहां एक्टर को सेट कर दिया जाता है, "एक्टर तभी इवॉल्व होगा जब वो अलग अलग किरदार निभाएगा लेकिन कास्टिंग एजेंसी मुझे हर बार कॉलेज गोइंग लवर बॉय का रोल ही ऑफ़र करते हैं. इस तरह तो एक्टर टाइप कास्ट हो जाएगा.”
दी रॉयल एकेडमी ऑफ़ ड्रामेटिक आर्ट यूके और न्यूयॉर्क फ़िल्म एकेडमी के विद्यार्थी रह चुके मिखाइल बताते हैं, “विदेश मैं कास्टिंग एजेंट अपने क्लाइंट के यानि कि एक्टर के करियर ग्राफ़ के विकास का पूरा ध्यान रखते हैं. आप को हर बार सेम रोल नहीं ऑफ़र होता. यहाँ कास्टिंग एजेंसी ख़ुद कल्पनाशील नहीं है. एक एक्टर के लिए अलग अलग तरह के कई रोल्स का लिस्ट होने की बजाए यहाँ कास्टिंग एजेंसी एक रोल के लिए एक जैसे ही 10 एक्टर्स का लिस्ट रखते है. यही साबित करता है कि अपने काम को लेकर बिलकुल भी क्रिएटिव नहीं होना चाहते.”



उनके मुताबिक कुछ नए कास्टिंग डायरेक्टर्स अच्छा काम करते हैं लेकिन ज़्यादातर कास्टिंग एजेंसी के लिए अपने क्लाइंट के करियर से ज़्यादा कमीशन मायने रखता है और शायद इसलिए वो कलाकारों के साथ गरिमापूर्ण और मानवीय व्यवहार नहीं करते.

मिखाइल के पिता इनायतुल्ला कांतरु “दोराहा” के निर्देशक हैं. मिखाइल ने कहा, “जब उनका निर्देशन होता है तब हर किरदार मंच पर जी उठ़ता है. इस नाटक में परफॉर्मन्स नहीं, अनुभव मिलेगा. दर्शको को भी इस जटिल घटना का साक्षी बनने का मौका मिलेगा.”

मिखाइल के अलावा, संजय गुरुबक्षानी, वरुण तिवारी, विजय विक्रम सिंह, नव्यता मलकानी, संकल्प जोशी, प्रखर तोशनीवाल और सीमा सहगल इस नाटक में अभिनय कर रहे हैं.

“दोराहा” की कहानी आर्मी फ़ैमिली रंधावाज़ के बारे में हैं जिनकी ज़िंदगी एक अनअपेक्षित घटना के चलते बदल जाती है. “दोराहा” इन राहगीरों को कहाँ लेकर जाता है जानने के लिए 14 अप्रैल को रंगशारदा बांद्रा और 18 अप्रैल को सेंट. एंड्र्यूज़ बांद्रा में इस नाटक या कहिए अनुभव को देखना चाहिए.

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