समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं जितेंद्र खिमलानी जैसे लोग

जितेंद्र फिलहाल श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लीविंग फाउंडेशन की एक फैकलिटी हैं. वे बताते हैं कि उनकी शिक्षाएं स्वास्थ्य और कल्याण के बारे में हैं.

जितेंद्र फिलहाल श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लीविंग फाउंडेशन की एक फैकलिटी हैं. वे बताते हैं कि उनकी शिक्षाएं स्वास्थ्य और कल्याण के बारे में हैं.

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    कहा जाता है कि दुनिया के सभी सफल लोगों पर अध्ययन किया जाए तो एक चीज सबसे में समान होती है, वो है एक गुरु. अक्सर लोग अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए किसी ना किसी की सहायता लेते हैं. लेकिन जो किसी को उसके लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा या ज्ञान दे रहा होता उसकी जिम्मेदारी भी उस खास समय में काफी बढ़ जाती है. ये बातें मोटिवेशनल स्पीकर जितेंद्र खिमलानी कहते हैं.

    जितेंद्र फिलहाल श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लीविंग फाउंडेशन की एक फैकलिटी हैं. वे बताते हैं कि उनकी शिक्षाएं स्वास्थ्य और कल्याण के बारे में हैं और वे कॉरपोरेट्स, युवाओं, बच्चों, किशोर और वयस्कों को कई अन्य सेल्फ-डेवलपमेंट से जुड़ी शिक्षा भी देते हैं. उनका दावा है कि उन्‍होंने अब तक करीबन 30 हजार लोगों की जिंदग‌ियों के बारे में जाना है और उन्हें और बेहतर जीवन जीने के बारे में प्रेरित कर चुके हैं.

    इसके अलावा, वह प्रज्ञा योग (अंतर्ज्ञान) कार्यक्रम में भी हिस्सा लेते हैं जहां बच्चों को उनकी सहज क्षमता विकसित करने सिखाया जाता है. अपनी अविश्वसनीय जानकारियों के चलते खिमलानी को गुजरात के शीर्ष कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में कई सत्र आयोजित करने के लिए बुलाया जाता है.

    इसके अलावा, वह एक न्यूरो-भाषाई प्रोग्रामिंग (एनएलपी) के सर्टिफिकेट धारक हैं. एनएलपी संचार, व्यक्तिगत विकास और मनोचिकित्सा के लिए एक छद्म वैज्ञानिक दृष्टिकोण है. वह एक प्रमाणित बाच रेमेडी प्रैक्टिशनर भी है जो कई वर्षों पहले डॉ एडवर्ड बाच द्वारा विकसित की थी. यह एक भावनात्मक स्वास्थ्य और संतुलन के लिए प्राकृतिक चिकित्सा की एक प्रणाली है. अपने विविध ज्ञान और चिकित्सा जीवन में महान विशेषज्ञता के साथ, कई लोग अपने जीवन को शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक रूप से बदलने के लिए जितेंद्र खिमलानी को श्रेय देते हैं.

    वे कहते हैं कि उनके कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों ने तनाव, चिंता, रिश्ते की समस्याओं पर काबू पाकर अपने मानसिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार किया है और जीवन में बड़े पैमाने पर सफलता हासिल की है. अपने उद्यमशीलता कौशल पर प्रकाश डालते हुए, जितेंद्र खिमलानी कहते हैं कि पहले अपने परिवार के डेयरी व्यवसाय में थे, जिसके बाद उन्होंने परामर्श शुरू किया. 26 साल की उम्र में उन्होंने खनन क्षेत्र में अपनी खुद की कंपनी शुरू की, और डिजिटल मार्केटिंग के व्यवसाय में भी उनका उद्यम है.

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