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पाकिस्तान में भी याद आते हैं 'कन्हैय्या', सूफ़ी कव्वालों ने गाए हैं कृष्ण के गीत...

फ़रीद अयाज़ की कव्वाली कन्हैय्या  यूट्यूब पर मौजूद है

फ़रीद अयाज़ की कव्वाली कन्हैय्या यूट्यूब पर मौजूद है

पाकिस्तान में भी मिलते हैं कृष्ण, सूफ़ी क़व्वालों की कव्वालियों में आता है ज़िक्र कन्हैय्या का.

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    कृष्ण जन्माष्टमी पर आपने कृष्ण से जुड़े कई भजन, कई गीत सुने होंगे लेकिन कृष्ण भक्ति में डूबी कव्वाली कई लोगों के लिए एक नई मिसाल है. पाकिस्तानी कव्वाल फ़रीदुन अयाज़ और अबु मोहम्मद की एक कव्वाली 'कन्हैय्या' इस साल चर्चा का विषय है. सूफ़ी संगीत में कबीर और सूरदास के कई पदों और रचनाओं को गाया जाता है लेकिन हिंदू मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण पर किसी पाकिस्तानी द्वारा गाई एक कव्वाली कौतुहल पैदा करती है.

    पाकिस्तानी कव्वाल फ़रीद अयाज़ और अबु मुहम्मद की कृष्ण के ऊपर कव्वाली 'कन्हैय्या' को पाकिस्तानी सूफ़ी कलाकारों की उस कोशिश का हिस्सा माना जाता है जिसमें सूफ़ी परंपरा को धर्म और मज़हब से उपर ले जाने की कोशिश की जा रही है.

    फ़रीद के शब्दों में,"मैंने कॉम्पेरिटिव रिलीजन पर काम किया है और मैं समझता हूं कि हर धर्म के अंत में जो एक चीज़ महत्वपूर्ण है वो है, सच्चाई. जो चीज़ सच को दिखा दे वो सूफ़ी है और इसके लिए हर धर्म - हिंदू, मुस्लिम, ईसाई आदि में रास्ते हैं. मतलब हर धर्म में कुछ सूफियाना है."

    फरीद अयाज़ और अबु मुहम्मद की कव्वाली 'कन्हैय्या' में कृष्णा के वियोग में राधा का गीत है. कृष्ण किस तरह राधा को भूल गए हैं और वो अपने वियोग को गा रही हैं.

    "कहूं क्या तेरे भूलने की मैं वारी
    कन्हैय्या याद है कुछ भी हमारी"

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    इस कव्वाली को सूफ़ी में इस तरह भी समझा जा सकता है कि अपने प्रियतम को पाने के लिए आत्मा तरस रही है और उसे खुद को भुला देने का उलाहना दे रही है.

    बीते साल भी पाकिस्तानी कवियों की कविताओं में कृष्ण या कन्हैय्या के ज़िक्र की बात तब चली थी जब पाकिस्तानी स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी का पर्व एक ही दिन पड़ा था. कृष्ण के उपर एक पूरी कविता पाकिस्ताना का कौमी तराना (राष्ट्रगान) लिखने वाले हफ़ीज़ जालंधरी ने भी लिखी है. हफ़ीज़ के शब्दों में उनके वतन की रक्षा के लिए एक दिन कृष्ण अवतार लेकर फिर वापसी करेंगे.

    "ए देखने वालों
    इस हुस्न को देखो
    इस राज़ को समझो...
    ये पैकार-ए-तनवीर
    ये कृष्ण की तस्वीर..."

    कई मान्यताओं के अनुसार कृष्ण को भी एक पैगंबर माना जाता है और हफीज़ अपनी इस नज़्म में इस बात पर ज़ोर देते हैं कि कृष्ण भी एक इंसान नहीं एक रोशनी है जो लोगों को सही राह पर लाएंगे.

    पाकिस्तानी कव्वाल अजीज़ मियां भी मीरा के भजन को गाते हैं और कृष्ण को गाते हैं. उनके अनुसार मीरा या गोपियों का प्यार भी सूफ़ियाना है और इसलिए वो हमारे करीब है.

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    साबरी ब्रदर्स ने भी साल 1981/82 में भारत में किए एक कंसर्ट के दौरान मीरा के भजन 'ए री मैं तो प्रेम दीवानी' को गाया था. इस लाइव कंसर्ट को आप यहां सुन सकते हैं हालांकि इसका वीडियो उपलब्ध नहीं है. ग़ुलाम फ़रीद साबरी और मक़बूल अहमद साबरी की इस कव्वाली को उन्होंने हालांकि पाकिस्तान में कभी परफॉर्म नहीं किया लेकिन ये अपने आप में एक अदभुत अनुभव है.

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    Tags: Abu muhammad, Fareed Ayaz, Janmashtami 2018, Kanhayya, Qawwali

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