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B'day Spl: जन्मदिन पर जानीं, बनारसी घाट पर घूमे वाला बिहारी बबुआ संजय मिश्रा के संघर्ष के कहानी

B'day Spl: जन्मदिन पर जानीं, बनारसी घाट पर घूमे वाला बिहारी बबुआ संजय मिश्रा के संघर्ष के कहानी

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बॉलीवुड के दिग्गज और हास्य एक्टर संजय मिश्रा के जन्मदिन ह. उनकर जन्म 6 अक्टूबर, 1963 के दरभंगा जिला में भइल रहे. आज संजय मिश्रा कवनो पहचान के मोहताज नइखन आ सभके चहेता बाड़ें. बाकिर ई बिहारी बाबू के बहुत पापड़ बेले के पड़ल तब जाके सफलता के स्वाद चीखे के मिलल.

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आज एप्पल सिंह उर्फ ऑफिस-ऑफिस के पान चबावे वाला शुक्ला उर्फ संजय मिश्रा के जन्मदिन ह. संजय मिश्रा के फिल्मन के चहेता कहल जाला, काहे कि उ फिल्म के ना चुनेले, फिल्म उनके चुनेला. एही से उ फिल्मन के चहेता हवें. हंसमुख अउर हाजिर जवाब संजय मिश्रा के स्क्रीन भा सामान्य जिंदगी में जे भी देखेला उनके व्यक्तित्व के कायल हो जाला. अपना करियर में उ हर तरह के, हर शेड के किरदार निभवले बाड़ें बाकिर उनके हँसावे आ गुदगुदावे वाला किरदार सबसे ढेर लोकप्रिय भइल बा, एही से उनके अक्सर लोग कॉमेडियन समझे के भूल करेला जबकि संजय मिश्रा कॉमेडी में बादशाह त हउवें ही, गंभीर अउरी संजीदा किरदार में भी उ किंग हवें.

फिल्म के जे भी लोग उनका साथे काम कइले बा, ई कहेला कि उ बड़ा स्पोंटेनियस अउरी सहज कलाकार हवें. उ अपना किरदार आ ओकरा संवाद में बड़ा इमप्रोवाईजेशन करेलें. उनके प्रयोग इतना प्रभावी होला कि अक्सर निर्देशक आ सह कलाकार भौंचक्का हो जालें. संजय मिश्रा के अभिनय शिल्प एतना लाजवाब बा कि रउआ जब भी उनके स्क्रीन पर देखब, उनके हर किरदार से अपना के जोड़ लेब. जे उनके खाली हास्य कलाकार बुझेला, उ मिश्रा जी के आँखों देखी, दम लगा के हईशा, मसान, कड़वी हवा, अंग्रेजी में कहते हैं, कामयाब आदि फिल्म में देख लेव. ओकर सगरी भरम दूर हो जाई.

बिस्मिल्लाह खां जब इशारा में डंटले किशोर संजय के

6 अक्तूबर 1963 के दरभंगा बिहार के सकरी नारायणपुर में जनमल संजय मिश्रा के परिवार बहुत शिक्षित रहे. उनके दादा दादी दुनू जाना सिविल सेवा में रहे लोग. संजय मिश्र के पिता जी प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो में काम करत रहलें आ काफी प्रभावशाली छवि रहे. उनके कलाकार अउरी समाज के बुद्धिजीवी लोग से जान पहचान रहे. जब उनके पिता जी शंभू नाथ मिश्रा के बनारस बदली भइल त उहो बनारस चल अइलें. इहाँ उनके किशोरावस्था बीतल. इहाँ बनारस के घाटन पर पंडा-पुजारी लोग के बीच, गवईया-बजईया के संगत में बचपन गुजरल.

उ कई बार अपना साक्षात्कार में कहले बाड़ें कि बिस्मिल्लाह खां जब कबो कबीर-चौरा में मंदिर में कबो आपन शहनाई बजावत होखस त उहो बइठ के मुंह से तबला के आवाज निकाले लागस. खां साहेब कहस कि ‘ई शंभू के लौंडा ह न, इसको बोलो ई अपना ना बजावे, वरना हमारा गड़बड़ाने लगेगा.’ उ संजय के अपना लगे बोला लेस. ओसहीं प्रख्यात तबला वादक गुदई महाराज से उनके पिता जी के परिचय रहे आ उ अक्सरहा घरे आवस. एही कारण संजय मिश्रा शुरू में तबला वादक बने के चाहत रहलें. बाकिर जब उनके पिता जी के बनारस से दिल्ली बदली भइल त इहाँ उनके रास्ता बदल गइल.

जब संजय के मजदूरी करत उनके पिता जी पकड़ लेहलें

संजय के पढ़े-लिखे में मन ना लागे. उ 20 साल के उमीर में भी स्कूल में ही रहलें. उ हालांकि स्कूले पढ़े ना जास, उल्टा कहीं कुछ काम करे लागस आ जीवन के करीब से अनुभव करे के कोशिश करस. उनके माई-बाप के बड़ा चिंता होखे. उनके पिता जी के ओहदा बढ़ गइल रहे आ उ अक्सरहा प्रधानमंत्री के साथे दौरा पर रहस अधिकारी के रूप में. एक बार तालकटोरा स्टेडियम में राजीव गांधी के कार्यक्रम रहे आ उनके पिता जी भी आइल रहलें. ओही जा संजय एगो निर्माण स्थल पर मजदूरी करत रहलें. उ उहाँ जब छड़ मोड़-मोड़ के रखत रहलें तले उनके पिता जी पीछे से अइलें आ उनसे पुछलें कि तोहार पिता जी प्रधानमंत्री के साथे चलत बाड़ें आ तू इहाँ मजदूरी करत बाड़s. उनके पिता जी के बड़ा खराब लागल. बाकिर उ संजय के रंगमंच के लोग से मिले जुले के प्रेरित कइलें.

एकरा बाद संजय मिश्रा के आपन असली रास्ता मिलल आ उ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दाखिला लेहलें. फेर ओकरा बाद उ बंबई के रुख कइलें. जब उ बंबई आवत रहलें त उनके माई ट्रेन के साथे कुछ दूर ले चलत चलत अइली. उनके आँख में लोर रहे आ ई डर रहे कि का पता हमार बबुआ उहाँ जाके फिल्मन में टिक पाई कि ना. बाकिर माई आ बाबूजी के आशीर्वाद फरल आ आज सभे संजय मिश्रा के अभिनय के मुरीद बा.

संजय मिश्रा के शुरुआती दौर में छोट मोट ही रोल मिलल. उनके पहिला काम दूरदर्शन के शो चाणक्य में मिलल जवना के पहिला ही शॉट में उ 28 गो टेक लेहलें. निर्देशक अपना सहायक के छोड़ के सेट से चल गइलें कि उ ई शॉट पूरा करावस. उनके बीच में कवनो काम ना मिलल आ उ जइसे तइसे आपन गुजारा कइलें बाकिर 1995 में ये है इंडिया में उनके एगो छोट रोल मिलल. ओकरा बाद उ ‘सत्या’ आ ‘दिल से’ में काम कइलें. एकरा बाद उनके ‘ऑफिस ऑफिस’ में शुक्ला के रोल मिलल जहां से उनके चेहरा लोग जाने लागल. फेर 1999 में क्रिकेट वर्ल्ड कप के विज्ञापन में ईएसपीएन उनके एप्पल सिंह के एगो आइकान रोल देहले आ इहे संजय मिश्रा के करियर के बदलाव के कारण बनल.

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य व सिनेमा के जानकार हैं )

Tags: Bollywood actors, Sanjay Mishra

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