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ऋषभ शेट्टी ने इस मंत्र से बनाई Kantara, 16 करोड़ की फिल्म से कमाए 400 करोड़; अब OTT पर है जलवा

कांतारा स्टार का पैन इंडिया फिल्म डिबेट पर रिएक्शन

कांतारा स्टार का पैन इंडिया फिल्म डिबेट पर रिएक्शन

Kantara Movie: 'कांतारा' स्टार ऋषभ शेट्टी ने पैन इंडिया फिल्म डिबेट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. साथ ही उन्होंने अपनी ब्ल ...अधिक पढ़ें

जब से साउथ सिनेमा की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर राज कर रही हैं, तभी से बॉलीवुड और साउथ के बीच एक डिबेट छिड़ी हुई है. इस पर कई जानी-मानी हस्तियां अपनी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं. इसी बीच ‘कांतारा’ फिल्म के निर्देशक ऋषभ शेट्टी (Rishab Shetty) ने अब पैन इंडिया फिल्म डिबेट पर अपना रिएक्शन दिया है. कन्नड़ स्टार ने कहा, फिल्में अब भाषा की बाधाओं को पार कर रही हैं. अगर सामग्री दर्शकों से जुड़ती है, तो फिल्म को एक पैन इंडिया के रूप में स्वीकार किया जाएगा.

ऋषभ शेट्टी ने कहा, कंटेंट दर्शकों को जोड़ता है

ऋषभ शेट्टी ने पैन इंडिया डिबेट (Pan India Movie Debate) पर अपना रिएक्शन गुरुवार को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में मास्टरक्लास के भाषणों के दौरान दिया. वे तब ‘सांस्कृतिक विविधता का प्रतिनिधित्व और नए बाजारों की पहचान’ के विषय पर बोल रहे थे. अभिनेता ने कहा, ‘फिल्में आज भाषा की बाधा को पार कर रही हैं. यदि कंटेट दर्शकों से जुड़ता है तो मूवी को पैन इंडिया फिल्म के रूप में स्वीकार किया जाता है. मेरा इस मंत्र में विश्वास था कि अगर कोई फिल्म अधिक स्थानीय और जड़ से जुड़ी है, तो इसकी एक बड़ी सार्वभौमिक अपील (Greater universal appeal) है.’ इसी मंत्र को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कांतारा को 16 करोड़ में बनाया था, जिसने 400 करोड़ से ज्यादा का वर्ल्ड वाइड बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर लिया है.
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प्रकृति, संस्कृति और कल्पना का सम्मेलन है कांतारा

रोहित शेट्टी ने कहा कि कांतारा इसके मूल में मानव और प्रकृति के बीच चल रहे संघर्ष को दर्शाती है. यह प्रकृति, संस्कृति और कल्पना का एक समामेलन है, हमारी संस्कृतियां और विश्वास प्रणालियां हम में से प्रत्येक में निहित हैं. यह फिल्म मेरे द्वारा सुने गए लोकगीतों और ‘तुलुनाडु’ संस्कृति (Tulunadu culture) में बचपन के अनुभवों का परिणाम है. इसलिए, मैं चाहता था कि फिल्म का पार्श्व संगीत (background music) स्वाभाविक रूप से संस्कृति का प्रकाशस्तंभ (Beacon of the culture) हो.

दूसरे लॉकडाउन में आया था कांतारा का विचार

कांतारा में शिव की भूमिका के बारे में शेट्टी ने कहा कि उन्हें बचपन से ही ऐसा किरदार निभाने का जुनून था. ऋषभ शेट्टी ने कहा, ‘दूसरे कोविड लॉकडाउन के दौरान ‘कंतारा’ के विचार की कल्पना की गई थी और मैंने पूरी फिल्म की शूटिंग अपने गृहनगर कुंडापुरा, कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में की थी.’ फिल्म में अपने दमदार प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि चरमोत्कर्ष (imperative) अनिवार्य है क्योंकि यही लोगों के साथ रहता है. ऋषभ शेट्टी ने कहा कि 90 के दशक के अंत में क्षेत्रीय सिनेमा ने पश्चिमी फिल्मों को प्रभावित किया था. हालांकि, आज वे स्थानीय संस्कृति को शामिल कर रहे हैं और विविधता ने उन्हें बहुत आवश्यक जीवंतता प्रदान की है जिसे दर्शकों द्वारा स्वीकार किया गया है.

Tags: Kannada film industry, South cinema, South cinema News

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