'ICU बेड के लिए 500 कॉल, दुबई से मंगाया इंजेक्शन; फिर भी नहीं बच पाए भव्या गांधी के पिता'

2 दिन में आराम नहीं हुआ तो दोबारा सीटी स्कैन कराया गया. इस बार पता चला कि विनोद गांधी का इंफेक्शन डबल हो गया है. (Photo: @bhavyagandhi97/Istagram)

2 दिन में आराम नहीं हुआ तो दोबारा सीटी स्कैन कराया गया. इस बार पता चला कि विनोद गांधी का इंफेक्शन डबल हो गया है. (Photo: @bhavyagandhi97/Istagram)

विनोद गांधी की पत्नी यशोदा गांधी (Yashoda Gandhi) ने उन्हें बचाने के संघर्ष के बारे में बताया कि, 'आईसीयू बेड्स के लिए मैंने 500 कॉल किए. फिर देश में बनने वाला इंजेक्शन दुबई से मंगवाया. एक माह तक संघर्ष करने के बाद भी हम विनोद गांधी (Vinod Gandhi) को नहीं बचा सके

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मुंबई. टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashma) के पुराने टप्पू यानी भव्या गांधी (Bhavya Gandhi) के पिता विनोद गांधी (Vinod Gandhi) का मंगलवार को निधन हो गया. वे कोरोना वायरस से संक्रमित थे. उनका कोकिलाबेन अस्पताल में इलाज चल रहा था.

स्पॉटबॉय को दिए इंटरव्यू में विनोद गांधी की पत्नी यशोदा गांधी (Yashoda Gandhi) ने उन्हें बचाने के अपने संघर्ष के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 'जब से कोरोना वायरस आया है मेरे पति सारे प्रीकॉशन ले रहे थे. मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंस मेंटेंन करने और हाथ सेनिटाइज करने जैसे सारे उपाय किए, फिर भी वायरस से संक्रमित हो गए. उन्होंने बताया कि वे अच्छा महसूस नहीं कर रहे हालांकि उन्हें कोई सिंपटम नहीं थे. इसके अगले दिन उन्हें हल्का बुखार था तो मैंने दवा दे दी. इसके बाद चेस्ट स्कैनिंग में उन्हें 5 प्रतिशत इंफेक्शन निकला. डॉक्टर ने उन्हें आइसोलेशन में घर पर रखने की बात कही. 2 दिन में कोई आराम नहीं होने पर दोबारा सीटी स्कैन कराने पर पता चला कि उनका इंफेक्शन डबल हो गया है.'

यशोदा ने आगे बताया कि, 'इसके बाद उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट कराने की जंग शुरू हुई, लेकिन कहीं बेड नहीं मिल रहा था. जहां भी फोन करो तो बताते थे कि बीएमसी में रजिस्ट्रेशन कराओ, जब नंबर आएगा तो बुलाएंगे. भव्या के मैनेजर के हेल्प से उन्हें एक हॉस्पिटल में ए़डमिट कराया गया. 2 दिन बाद उसने उन्हें आईसीयू में रखने के लिए दूसरे हॉस्पिटल में शिफ्ट करने को कहा, क्योंकि वहां आईसीयू नहीं था.'

गांधी ने आगे बताया कि, 'आईसीयू बेड्स के लिए मैंने कम से कम 500 कॉल किए. अस्पताल, राजनेता, कार्यकर्ताओं से लेकर एनजीओ तक, मेरे परिवार के सदस्यों ने भी कोशिश की, लेकिन आईसीयू बेड नहीं मिला. मैं और मेरा परिवार असहाय महसूस कर रहे थे. इसके बाद मेरे एक दोस्त ने गोरेगांव के छोटे से अस्पताल में आईसीयू बेड की व्यवस्था कराई.'
इसके बाद डॉक्टर ने मुझे 'टॉक्सिन' इंजेक्शन की व्यवस्था करने के लिए कहा. मुझे यह बताने में बहुत बुरा लगता है कि जो इंजेक्शन देश में बनती है वो मुझे नहीं मिली. मुझे दुबई से इंजेक्शन मंगाना पड़ा और 45 हजार के इंजेक्शन के लिए 1 लाख रुपए चुकाने पड़े फिर भी हम उनकी जान नहीं बचा सके.'

यशोदा ने बताया कि 'अंत में उन्हें कोकिलाबेन में शिफ्ट करना पड़ा. वे एडमिट करने को तैयार नहीं थे क्योंकि उन्होंने कहा कि BMC पंजीकरण के बिना वे कोविड पेशेंट को एडमिट नहीं कर रहे हैं. उन्होंने मुझसे उन्हें कहीं और ले जाने को कहा, लेकिन मैं उन्हें लेकर कहां जाऊं वे बेहोश थे. मैंने उन्हें किसी तरह मनाया और आखिरकार उन्होंने मुझे ICU बेड दे दिया. हॉस्पिल में वायरस से 15 दिन तक लड़ने के बाद वे जिंदगी की जंग हार गए.'

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