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अमिताभ ने कहा था- ना फिल्म है ना पैसा, घर पर बकाये का नोटिस है चस्पा, तब KBC ने बदली थी जिंदगी

Janardan Pandey | News18Hindi
Updated: November 29, 2019, 9:12 PM IST
अमिताभ ने कहा था- ना फिल्म है ना पैसा, घर पर बकाये का नोटिस है चस्पा, तब KBC ने बदली थी जिंदगी
KBC 11: 1500 रुपये सैलरी पाने वालीं बबिता ताड़े ने जीते थे एक करोड़.

अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने अपने इंटरव्यू में कहा था, "इस वक्त पूरा संसार एक नई शताब्दी का जश्न मना रहा है. तब मेरे पास ना फिल्में हैं, ना पैसा है, ना कंपनी है. घर के बाहर बकायेदारों की नोटिस लग गई है." इसके बाद KBC ने कैसे बदली उनकी जिंदगी. जानिए-

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  • Last Updated: November 29, 2019, 9:12 PM IST
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नई दिल्ली. कौन बनेगा करोड़पति (Kaun Banega Crorepati) के 11वें सीजन (KBC Season 11) का शुक्रवार को अंतिम एपिसोड प्रसारित किया जाएगा. इसमें शो के होस्ट अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के सामने हॉट सीट पर कर्मवीर स्पेशल शो में समाज सेव‌िका सुधा मूर्ति (Sudha Murthy) खास मेहमान होंगी. शो के प्रोमो में दिखाई दे रहा है कि सुधा के सेट पर आते ही अमिताभ ने पैर छूकर उनका अभिवादन किया. जबकि सुधा मूर्ति की उम्र महज 69 साल है और अमिताभ 77 साल के हैं. लेकिन अमिताभ बच्चन का बड़प्पन ही है कि उन्होंने झुककर प्रणाम किया. असल में ये पहली दफा नहीं था. बल्कि केबीसी के पहले एपिसोड से अमिताभ का यही रूप हम देखते आ रहे हैं.

कहते हैं कि अमिताभ बच्चन ने साल 2000 में जब केबीसी (KBC) में कंटेस्टेंट से बातचीत करनी शुरू की तो इतने सम्मान और हृदय से बात करते कि लोगों का उनका ये अंदाज बेहद पसंद आया. कुछ लोगों का ये भी मानना था कि जब अमिताभ बच्चन इस शो को होस्ट करने बैठे थे तब उनकी माली हालत इतनी खराब थी कि वे किसी तरह इस शो को हिट कराना ही चाहते थे. उनके चेहरे पर, उनकी बातों से उनकी मनःस्थिति साफ नजर आती थी. वे जितनी विनम्रता से हो सकता उतनी विनम्रता से अपने कंटेस्टेंट से पेश आते. आखिर ये मामला क्या था, कैसे सत्तर-अस्सी के दशक के सुपरस्टार एंग्री यंगमैन को साल 2000 में 21 सदी के आगमन पर ये कहना पड़ा-

"इस वक्त पूरा संसार एक नई शताब्दी का जश्न मना रहा है. तब मेरे पास ना फिल्में हैं, ना पैसा है, ना कंपनी है. घर के बाहर बकायेदारों की नोटिस लग गई है.- अमिताभ बच्चन"




दरअसल, फिल्म जगत में एक अदद ऊंचाई हासिल करने के बाद साल 1984 में अमिताभ अपने दोस्त राजीव गांधी की सलाह पर बॉलीवुड इंडस्ट्री छोड़कर राजनीति में उतर गए और लोकसभा का चुनाव लड़ा. उन्होंने अपने गृहनगर इलाहाबाद जाकर कद्दावर नेता हेमवतीनंदन बहुगुणा को मात दी.

लेकिन अमिताभ बच्चन के जीवन का सबसे काला अध्याय इसी दरम्यान आया. उन पर बोफोर्स घोटाले जैसे सबसे विवादित मामले के छींटे पड़े. जिससे वो अंदर तक हिल गए. उन्‍होंने राजनीति से संन्यास ले लिया. लेकिन ज्यादा पैसे कमाने की मंशा शायद उनके मन में घर कर गई थी.
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वापसी के बाद 'शहंशाह', 'गंगा जमुना सरस्वती', अग्न‌िपथ जैसी फिल्में बनाने के बाद भी उन्हें उस तरह का आर्थ‌िक लाभ दिखाई नहीं दे रहा था, जैसा वे सोच रहे थे. इसीलिए उन्होंने साल 1996 में अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ABCL) की स्‍थापना की.

Amitabh in kbc 4
केबीसी के शुरुआती सीजन की एक तस्वीर.


तब अमिताभ बच्चन का सपना था कि इस बैनर तले ढेर सारी फिल्में बनाई जाएंगी. इसी कंपनी के जरिए बॉलीवुड और फैशन जगत के बड़े इवेंट्स ऑर्गनाइज कराए जाएंगे. कंपनी का टर्न-ओवर 1000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य था. इसी सपने के साथ 'तेरे मेरे सपने' और 'मृत्युदाता' जैसी फिल्मों का निर्माण हुआ लेकिन वो नहीं हो सका जो अमिताभ चाहते थे.

अमिताभ के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ बेंगलुरु में 'मिस वर्ल्ड 1996' ब्यूटी कंटेस्ट का आयोजन. एबीसीएल ने इस प्रतियोगिता के लिए बेहद ज्यादा पैसों में लोगों की हायरिंग की. एक भव्य आयोजन कराया. उस दौरान लगातार ऐसा कहा गया कि अमिताभ को गलत सलाह दी जा रही है. उनके आसपास गलत लोग मंडरा रहे हैं. लेकिन इन सब का कोई फायदा नहीं हुआ. एबीसीएल इस प्रतियोगिता के बाद बैंकरप्ट हो चुकी थी.



एबीसीएल में काम करने वाले कई लोगों ने पैसे ना मिलने की शिकायत की. कंपनी पर कई कानूनी केस दर्ज हो गए. अमिताभ ने खुद एक इंटरव्यू में कहा कि उनके घर पर टैक्स बकाये के नो‌टिस लगा दिए गए हैं. लोग यहां तक कहते हैं कि अपने घर के बल्व भी अमिताभ को खुद ही बदलने पड़ रहे थे.

तब अमिताभ के दो बंगले भी बेचने की बात चली थी. लेकिन कानूनी कारणों से उनकी बिक्री पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगा दी. अमिताभ को घर केनरा बैंक के पास गिरवी रखना पड़ा. तब अमिताभ पर 14 मिल‌ियन डॉलर का कर्ज था. इन सबसे उबरने के लिए अमिताभ ने साउथ की रीमेक फिल्में 'सूर्यवंशम' और 'लाल बादशाह' में काम किया, लेकिन दोनों बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रहीं.

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कहा जाता है कि एक दिन सुबह अमिताभ उठे और कामयाब डायरेक्टर यश चोपड़ा के पास गए और खुद को काम देने की गुजारिश की. कुछ समय बाद यश चोपड़ा ने उनके साथ 'मोहब्बतें' बनाने की घोषणा की.



कहा जाता है उस दौर के बाद अमिताभ ने अपने पास आए किसी काम को ना नहीं कहा. लेकिन कुछ समय से वो लगातार दिल्ली के प्रोडक्शन हाउस बिग सिनर्जी के गेम्स शो "कौन बनेगा करोड़पति" की होस्टिंग को लेकर टाल-मटोल कर रहे थे. असल में वो अपने टीवी डेब्यू को लेकर चिंता में थे. शो के प्रोड्यूसर सिद्धार्थ बसु बताते हैं कि अमिताभ को जब उनकी बेटी श्वेता नंदा ने एक बार इस शो के ‌‌‌ब्रिटिश वर्जन को देखने को कहा तब उन्होंने इसे गंभीरता से लिया.

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यहां तक कि शो को होस्ट करने के लिए हामी भरने से पहले अमिताभ खुद ‌ब्रिटिश शो "हू वांट्स टू बी मिलियनेयर" की रिकॉर्डिंग देखने चले गए. पूरा शो देखने के बाद उन्होंने भारतीय शो के मेकर सिद्धार्थ और चैनल के प्रोगाम हेड समीर नायर से कहा कि अगर वे इसी रूप में अपना कार्यक्रम करते हैं तो अमिताभ उसे होस्ट करने के लिए तैयार हैं. इसके बाद उन्होंने तीन महीने तक इसकी तैयारी की और जब पर्दे पर शो रिलीज हुआ तो अमिताभ की बर्बाद हो चुकी अर्थव्यवस्‍था फिर से पटरी पर लौटने लगी.

Amitabh in kbc
अमिताभ बच्चन केबीसी बेहद सफल हुए.


कई रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया जाता है कि पहले सीजन के केबीसी के 85 एपिसोड के लिए अमिताभ को करीब 15 करोड़ रुपये दिए गए. जबकि एक इंटरनेशनल बैंक ने दोबारा अमिताभ पर भरोसा किया और 10 करोड़ रुपये का अनुबंध करने को राजी हो गया. असल में तब अमिताभ को बैंक से कर्जे मिलने बंद हो गए थे. केबीसी ने उन्हें एक बार फिर से स्‍थापित होने में महती भूमिका निभाई.

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यहां इस बात का जिक्र करना भी बेहद जरूरी है कि जिस दौर में तमाम ऐसे गेम शो महज पैसे कमाने का जरिया बनते हैं, उस दौर में आज भी केबीसी एक ऐसा गेम शो है जो वास्तव में आज भी आम लोगों को चुनकर उन्हें जिंदगी बदलने का अवसर देता है. केबीसी के पहले करोड़पति हर्थवर्धन नवाथे ने न्यूज 18 इंडिया से कहा कि एक करोड़ जीतने के बाद उनकी पूरी लाइफ ही बदल गई. जबकि केबीसी से अब तक सबसे ज्यादा पांच करोड़ रुपये जीतने वाले सुशील कुमार कहते हैं कि उनकी दिशा ही केबीसी ने बदल दी.

Amitabh in kbc 1
अब अमिताभ सदी के सबसे सफलतम शख्सियत में से एक हैं.


केबीसी 11 में पहली बार ऐसा हुआ जब एक ही सीजन में कुल चार करोड़पति बने. इस बार महाराष्ट्र की बबिता सुभाष ताडे़ करोड़पति बनीं जो कि मिड-डे-मील बनाती थीं. उनकी मासिक आय 1500 रुपये थी. अब वो करोड़पति हैं. इसी तरह केबीसी 11 में ब‌िहार के सनोज राज करोड़पति बने. वह सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल के गौतम कुमार झा और झारखंड के अजीत कुमार भी करोड़पति बने. ये सभी देश के आम परिवारों से आते हैं.

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First published: November 29, 2019, 8:44 PM IST
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