15 सितंबर 1959 को हुआ था दूरदर्शन का आगमन, छोटे से डिब्बे में समाया सारा जहां

15 सितंबर 1959 को हुआ था दूरदर्शन का आगमन, छोटे से डिब्बे में समाया सारा जहां
दूरदर्शन का लोगो

दूरदर्शन (Doordarshan) आज यानी मंगलवार (15 सितंबर 2020) को अपनी 61वीं सालगिरह मना रहा है. साल 1959 में 15 सितंबर को सरकारी प्रसारक (Public Broadcaster) के तौर पर दूरदर्शन की स्थापना हुई.

  • भाषा
  • Last Updated: September 15, 2020, 9:16 PM IST
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नई दिल्ली. संचार और डिजिटल क्रांति के इस युग में जीने वाली आज की युवा पीढ़ी को दूरदर्शन (Doordarshan) के आगमन के बारे में शायद ही ज्यादा पता हो, लेकिन पिछली पीढ़ी का दूरदर्शन के साथ गहरा नाता रहा है. साल 1959 में 15 सितंबर को सरकारी प्रसारक (Public Broadcaster) के तौर पर दूरदर्शन की स्थापना हुई.

छोटे से पर्दे पर चलती बोलती तस्वीरें दिखाने वाला बिजली से चलने वाला यह डिब्बा लोगों के लिए कौतुहल का विषय था, जिसके घर में टेलीविजन होता था, लोग दूर दूर से उसे देखने आते थे. छत पर लगा टेलीविजन का एंटीना मानो प्रतिष्ठा का प्रतीक हुआ करता था और देश की कला और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम इस सरकारी प्रसारण सेवा का अभिन्न अंग थे.





दूरदर्शन ने 61वीं सालगिरह पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, ''Celebrating 61 Glorious Years of Doordarshan!''


दूरदर्शन की शुरुआत के समय इसमें कुछ देर के लिए कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता था. नियमित दैनिक प्रसारण की शुरुआत 1965 में आल इंडिया रेडियो के एक अंग के रूप में हुई. 1972 में यह सेवा मुंबई (तत्कालीन बंबई) और अमृतसर तक विस्तारित की गई, जो आज देश के दूरदराज के गांवों तक उपलब्ध है. राष्ट्रीय प्रसारण की शुरूआत 1982 में हुई. इसी वर्ष दूरदर्शन का स्वरूप रंगीन हो गया. इससे पहले यह श्वेत श्याम ही हुआ करता था.
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