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TMKOC: अंतिम समय में अपना नाम तक भूल गए थे 'नट्टू काका', बेटे ने बताई क्या थी आखिरी ख्वाहिश

TMKOC: अंतिम समय में अपना नाम तक भूल गए थे 'नट्टू काका', बेटे ने बताई क्या थी आखिरी ख्वाहिश

'नट्टू काका' (Nattu Kaka) एक ऐसा किरदार था जिसे भुलाया नहीं जा सकेगा. (फोटो साभारः Instagram/ghanshyamnayak_official)

'नट्टू काका' (Nattu Kaka) एक ऐसा किरदार था जिसे भुलाया नहीं जा सकेगा. (फोटो साभारः Instagram/ghanshyamnayak_official)

घनश्याम नायक (Ghanshyam Nayak) द्वारा निभाया गया 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) का 'नट्टू काका' (Nattu Kaka) एक ऐसा किरदार था जिसे भुलाया नहीं जा सकेगा. हाल ही में एक इंटरव्यू में घनश्याम नायक के बेटे विकास (Vikas) ने उनके अंतिम क्षण से जुड़ी कुछ बातें बताईं.

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    मुंबई: घनश्याम नायक (Ghanshyam Nayak) द्वारा निभाया गया ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) का ‘नट्टू काका’ (Nattu Kaka) एक ऐसा किरदार था जिसे भुलाया नहीं जा सकेगा. एक साल तक कैंसर से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद वरिष्ठ अभिनेता ने 3 अक्टूबर को अंतिम सांस ली. हाल ही में एक इंटरव्यू में घनश्याम नायक के बेटे विकास (Vikas) ने उनके अंतिम क्षण से जुड़ी कुछ बातें बताईं. विकास ने बताया की वह अपने आखिरी समय में अपना नाम तक भूल गए थे.

    ईटाइम्स से बातचीत में विकास नायक ने कहा, ‘एक साल पहले मेरे पिताजी की कैंसर की सर्जरी हुई थी. इसके बाद कीमोथेरेपी हुई. उनका कैंसर इतना दुर्लभ था कि उपचार बेअसर लगता था. उनके 9 कीमोथेरेपी सत्र थे, पिछले साल 5 और 4 इस साल. यह सितंबर 2020 के आसपास का समय था और चीजें नियंत्रण में होती दिख रही थीं. लेकिन मार्च 2021 में पापा के चेहरे पर सूजन आ गई. हमें लगा कि ये रेडियेशन का परिणाम है, लेकिन टेस्ट से पता चला कि कैंसर उनके फेफड़ों में फैल गया था.

    उन्होंने आगे कहा, ‘अप्रैल 2021 में, हमने कीमोथेरेपी फिर से शुरू की. जून तक यह चलता रहा. लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ. सूजन भी कम नहीं हुई. लेकिन पापा ने जोर देकर कहा कि वह अभी भी काम पर जाना चाहते हैं और इसलिए उन्होंने ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के लिए थोड़ी शूटिंग की और एक विज्ञापन भी किया. हमने एक बार फिर से एक टेस्ट किया और महसूस किया कि कैंसर अब केवल फेफड़ों में ही नहीं बल्कि शरीर के अन्य अंगों में भी था. हमने कीमोथेरेपी बंद कर दी और होम्योपैथी और आयुर्वेद की कोशिश की. लेकिन हालत बिगड़ती चली गई.

    विकास ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से पापा को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और हमने घर पर ऑक्सीजन और नर्सों की व्यवस्था करने की कोशिश की. लेकिन वह कामेयाब नहीं रहा और, हम उन्हें अस्पताल ले गए. उन्हें आईसीयू में भर्ती होना पड़ा, फिर एक कमरे में ले जाया गया क्योंकि वह थोड़े बेहतर हो गए थे, लेकिन फिर से आईसीयू में वापस भेज दिया गया क्योंकि हालत फिर से बिगड़ गई. निधन से 15 दिन पहले उनकी शुगर बढ़ गई थी. वह अब किसी को पहचान नहीं रहे थे, लेकिन शुगर लेवल नीचे जाने के बाद पहचानने लगे.

    विकास कहते हैं, ‘हालाँकि 2 अक्टूबर को पापा ने मुझसे पूछा कि मैं कौन हूँ? वह अपना ही नाम भूल गए थे. उसी समय मुझे एहसास हुआ कि वह दूसरी दुनिया में जाने लगे हैं. जब उनका निधन हुआ तो, हमने एक प्रोफेशन मेकअप आर्टिस्ट को उनका मेकअप करने के लिए बुलाया, क्योंकि वह अपने मेकअप के साथ मरना चाहते थे. मैं आपको बता दूं कि जब उनकी नब्ज बंद हुई तो उनके चेहरे पर अपार शांति थी.

    Tags: Ghanshyam Nayak, Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah

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