KBC: 20 साल की उम्र में इस कंटेस्टेंट को ससुराल वालों ने घर से निकाला था, श्मशान में गुजारनी पड़ी थी कई रातें

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Updated: August 24, 2019, 5:24 AM IST
KBC: 20 साल की उम्र में इस कंटेस्टेंट को ससुराल वालों ने घर से निकाला था, श्मशान में गुजारनी पड़ी थी कई रातें
सिंधूताई ने बहुत संषर्घ से जिंदगी गुजारी है.

केबीसी 11 (KBC season 11) भारत की कई सच्चाइयों को उजागर कर रहा है. अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर बैठी सिंधूताई ने एक ऐसा सच बताया जिसे सुनकर अमिताभ भी आश्चर्यचकित रह गए.

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कौन बनेगा करोड़पति (Kaun Banega Crorepati) 11वें सीजन (KBC Season 11) में अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) पहले करमवीर कंटेस्टेंट महाराष्ट्र की वरिष्ठ समाजसेवी सिंधुताई सपकाल को हॉट सीट पर लाए. अमिताभ ने उनका पैर छूकर शो में स्वागत किया. सिंधूताई के बारे में बताते हुए अमिताभ ने बताया कि ये उनकी तीसरी मुलाकात है. इससे पहले आनंद महादेवन ने सिंधूताई के जीवन पर एक फिल्म बनाई थी. इसका उद्घाटन अमिताभ ने किया था. इसके अलावा एक बार अवार्ड देने के समय भी अमिताभ से मुलाकात हुई थी. असल में सिंधूताई एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने 1200 बच्चों को गोद ले रखा है और उनका देखभाल करती हैं.

ऐसा भाव उनके मन में क्यों आया, हम सब के मन ये सवाल उठता है. अमिताभ ने भी पूछा. इसके जवाब में जब सिंधूताई ने बोलना शुरू किया तो लोगों के रोंगटे खड़े हो गए.

ट्रेन में गाना गाकर भरती थी पेंट
केबीसी में सिंधूताई ने बताया कि जब उनकी उम्र में महज 20 साल की थी तब घर में बहुत मामूली बात पर ससुराल वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया. कोई ठोस वजह नहीं थी. लेकिन सिंधूताई को उनकी दुधमुंही बच्ची के साथ घर छोड़ना पड़ा. इसके बाद सिंधूताई के पास कोई खाने-रहने के लिए कुछ नहीं बचा था. वह ट्रेन में विदाउट टिकट यात्रा करती थीं. पेट भरने के लिए उन्होंने ट्रेन में गाना शुरू कर दिया.

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दिनभर ट्रेन में गाना गाने के बाद रेलवे स्टेशन के भिखारियों के साथ खाना खाती थीं. लेकिन रात को मर्दों की बुरी नजर से बचने के लिए वो श्मशान में रहने लगीं. उन्हें लगा कि शायद यहां लोगों में रात में आने की हिम्मत नहीं होगी.

सबसे पहले अपनी बेटी को किया खुद से दूर
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एक समय के बाद सिंधूताई ने तय किया वो सभी अनाथ बच्चों की देखरेख करेंगी. लेकिन उन्होंने ये काम शुरू किया तो सबसे पहले उन्हें लगा कि उनकी अपनी बच्ची उनके साथ रहेगी तो दूसरे बच्चे भेदभाव की भावना झेल सकते हैं. इसलिए उन्होंने सबसे पहले अपनी बेटी ममता को खुद से दूर कर दिया.

जब दिवाली पर कुछ नहीं था खाने को
सिंधुताई ने बताया‌ कि उन्हें साढ़े सात सौ अवार्ड मिले लेकिन इनसे उन्हें खाने को नहीं मिलता. उन्हें आज भी अपने खाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है. आज भी वो यहां-वहां उद्घाटन और भाषण के लिए जाती हैं और वहां से पैसे इकट्ठा करती हैं. अब उन्हें महिला बाल विकास मंत्रलाय से भी बच्चे भेजे जाते हैं. वह इसमें पहले बच्चियों को लेती हैं.

इस दौरान उन्होंने बताया कि दिवाली के अवसर पर एक बार उनका एक्सिडेंट हो गया था. तब उनके बच्चों ने लोगों से जाकर उनका नाम बताया और लोगों से खाना मांगा. पूरी दिवाली के मौके पर उनके बच्चों ने कुछ खाया-पिया नहीं. वो रात भर रोते रहे.

एक बच्ची को जन्म लेते ही रात के 12 बजे लेकर आई थीं सिंधू ताई
एक बार एक अस्पताल से फोन आया कि एक बच्ची ने जन्म लिया है. क्या सिंधूताई उस बच्ची को लेंगी अगर नहीं तो... इसका सीधा मतलब होता है कि वे बच्ची को मार देंगे. यह सुनते ही सिंधूताई ने बच्ची को लेने के लिए हाथ आगे बढ़ा दिया.















सिंधूताई की मां ने भी उन्हें घर से निकाल दिया था
सिंधूताई की मां नहीं चाहती थीं कि उनको बेटी हो. लेकिन बेटी हो गई. इसके बाद से उनका नाम चिन्नी रख दिया गया और उनकी मां उनसे नफरत करने लगीं. उनके पिता का नाम अभिमान था. वे सिंधू से प्यार करते थे, लेकिन वे जल्दी ही दुनिया से अलविदा कह गए. इसके बाद सिंधू अपनी मां से दूर ही रहीं.

 

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First published: August 24, 2019, 5:24 AM IST
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