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महाभारतः आखिर दुर्योधन क्यों करना चाहता था आत्महत्या

एक दृश्य में कर्ण बांए और दुर्योधन दांए.

एक दृश्य में कर्ण बांए और दुर्योधन दांए.

टीवी पर महाभारत (Mahabharat) के दोबारा प्रसारण से इसके चहेतों में काफी उत्साह है. लोग एक-एक प्रसंग को ना केवल देख रहे हैं बल्कि आपस में उसके बारे में बात भी कर रहे हैं. ऐसा ही एक प्रसंग उठा है दुर्योधन की आत्महत्या करने के बारे में बातचीत को लेकर उठा है.

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    नई दिल्‍ली. महाभारत को कई दफा भारतीय राजनीति, यहां तक कि दुनिया की राजनीति का आधार बताया जाता है. इसके पीछे बहुतेरे प्रसंगों का जिक्र किया जाता है. लेकिन इसमें सबसे प्रमुखता जिस प्रसंग ने भूमिका अदा की है उसका प्रसारण 28वें एपिसोड देखने को मिलता है. कोरोना वायरस संक्रमण के प्रकोप के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर देश में 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया है. लोगों को घरों में रहने की लागातर अपील की जा रही है. इसी क्रम में लोगों को घरों में रखने के उद्देश्य से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दूरदर्शन पर साल 1988 में अपार सफलता पा चुके धरावाहिक 'महाभारत' का पुनः प्रसारण कर रहा है. इसी दरम्‍यान 10 अप्रैल के एपिसोड में दुर्योधन ने आत्महत्या की बात की.

    यह बात आसानी से गले नहीं उतरती. आखिर दुर्योधन जैसा राजपाठ का महामोह रखने वाला व्यक्ति आत्महत्या की बात क्यों कह रहा है. क्योंकि उसने अपने पिता धृतराष्ट्र से कहा कि वो आत्महत्या कर लेगा. असल में महाभारत की यह एक ऐसी चाल थी, जिसने दुर्योधन को राज सिंहासन तक पहुंचा दिया. राजनीति में सत्ता पाना ही सबसे बड़ी जीत मानी जाती है. यहां मूल्यों नहीं चालों की महत्ता है. दुर्योंधन की आत्महत्या वाली बात भी एक नायाब चाल थी. इसकी पृष्ठभूमि देखिए.

    हस्तिनापुर में वो दौर आ गया था जब सत्ता के उत्तराधिकारी का चुनाव हो. राजा पांडू के ज्येष्ट पुत्र युधिष्ठिर इसके सबसे योग्य उम्‍मीदवार थे. लेकिन धृतराष्ट्र व उनके पूत्र दुर्योधन कुछ और ही चाहते थे. दुर्योधन ने बड़ी चालाकी से अपने सत्ता हथ‌ियाने के अभियान में कर्ण को भी शामिल कर लिया था. मामा शकुनी इसमें उसकी रीढ़ थे.

    शकुनी ने कहा, ''दुर्योधन मुंह मत लटकाओ, न जाने तुम्हारे भाग्य में क्या लिखा है. हार मत मानो. जब तक तुम्हारा मामा जिंदा है, ये मुकुट तुम से कोई नहीं छीन सकता.''

    असल में धृतराष्ट्र अपने सारथी संजय से पूछा था. उन्होंने जान लिया था कि नगर में माहौल कैसा है. संयज ने कहा था, "महाराज, पूरा नगर युधिष्ठिर के साथ है. उनके पास इतनी ताकत है कि वो चाहें तो आपके सिर से भी मुकुट उतार सकता है. धृष्टराष्ट्र की आंखे खुलती हैं, मोह माया से ऊपर उठते हुए वो न्याय करते हैं. कहते हैं, "जेष्ठ पांडू पुत्र युधिष्ठर को युवराज बनाया जाए."

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    यह बात दुर्योधन को इस कदर नागवार गुजरी कि उस पर क्रोध और घोर निराशा एक साथ सवार हुई. मामा शकुनी ने बुद्ध‌ि लगाई. शकुनी इस कदर बलवान दुर्योधन को दिमाग में बातें भरी कि महाराष्ट्र धृतराष्ट्र को भी झुकने पर मजबूर कर देगा. हालांकि आगे का एपिसोड अभी प्रसारित नहीं हुआ है. अभी इतना दिखाया गया कि मामा शकुनी की बात सुनकर दुर्योधन अपने पिता के पहुंचा और बोला- अगर मुझे कोई नीचा दिखाने की कोशिश करेगा तो मैं आत्महत्या कर लूंगा." इकलौते पुत्र के मोह में धृतराष्ट्र पहले से अंधे थे. यह तीर उनके आर-पार हो गया. दुर्योधन के मुंह से ये बात सुनकर मानो धृतराष्ट्र के शरीर का रक्त ही सूख गया.

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