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रामायण: जिस राम को 'श्री' कहने पर भड़कता था रावण, उनको 'श्रीराम' कहकर त्यागे प्राण

राम-रावण का युद्ध रामायण का अहम भाग है.

राम-रावण का युद्ध रामायण का अहम भाग है.

रामायण (Ramayan) में रावण के पुत्र मेघनाद, पत्नी मंदोदरी, अपने नाना, भाई विभीषण आदि कई लोगों को रावण ने कई बार ये चेतावनी दी कि उनके दुश्मन के नाम के आगे श्री न लगाया जाए.

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    मुंबई- रामानंद सागर (Ramanand Sagar) की रामायण (Ramayan) का आज आखिरी दिन हैं. राम (Ram) ने रावण (Ravan) का वध करके अधर्म पर धर्म को विजयी बनाया. जहां एक तरफ रावण की सेना के तमाम महाबली रणभूमि में धराशाई हो गए थे, तो वहीं श्री राम की सेना के सभी पराक्रमी योद्धा रावण वध के साक्षी बने. लेकिन प्राणों के जाते-जाते रावण वो कह गए, जिस शब्द से वो सबसे ज्यादा नफरत करते थे.

    रावण (Ravan) के लंकेश को ये बिलकुल पसंद नहीं था कि कोई भी सीता के पति यानि प्रभू श्रीराम को नाम के आगे श्री कहकर पुकारे. रावण के युद्ध पर जाने से पहले जब भी कोई प्रभू को श्रीराम कहकर पुकारता था. तो रावण उसे ललकार देते थे. रामायण में रावण के पुत्र मेघनाद, पत्नी मंदोदरी, अपने नाना, भाई विभीषण आदि कई लोगों रावण ने कई बार ये चेतावनी दी कि उनके दुश्मन के नाम के आगे श्री न लगाया जाए.

    रामायण में अब तक कई प्रसंग दिखाए जा चुके हैं लेकिन राम-रावण का युद्ध बहुत अहम भाग है. क्योंकि राम-रावण का युद्ध केवल माता सीता को रावण की चुंगल से मुक्ति के लिए ही नहीं था बल्कि यह युद्ध असत्य पर सत्य की जीत के लिए भी था. भगवान राम और रावण के बीच घमासान युद्ध चला, राम जैसे ही रावण के शीश काटते एक और शीश रावण के सर पर आ जाता. राम ने रावण के दस सिरों और भुजाओं में दस-दस बाण मारे लेकिन वे फिर नए हो गए. ऐसा उन्होंने कई बार किया लेकिन रावण को मारने पाने की कोशिश हर बार नाकाम हो जाती.

    भगवान राम और रावण के बीच भयंकर, विध्वंसक और तीनों लोकों को हिला देने वाला युद्ध हुआ. एक के बाद एक तीर चलाने के बाद भी रावण का खात्मा नहीं हो पा रहा है. इसके बाद विभीषण ने भगवान श्रीराम को रावण के नाभि में मौजूद अमृत के बारे में बताया और उस पर प्रहार करने को कहा. भगवान ने आतातायी राक्षस रावण की नाभि पर तीर चलाकर उसका अमृत को सुखा दिया.

    नाभि में मौजूद अमृत सुखने के बाद रावण का मन विचलित हो गया और उसके हृदय से पलभर के लिए सीताजी से मन हट गया. तभी भगवान राम ने अगस्त्य मुनि द्वारा दिए गए ब्रह्मास्त्र से उसके हृदय पर प्रहारकर उसका अंत कर दिया.

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