बॉलीवुड में सालों काम करने के बाद नहीं मिली पहचान, फिर इस तरह घर-घर में पॉपुलर हुईं सुधा शिवपुरी

बॉलीवुड में सालों काम करने के बाद नहीं मिली पहचान, फिर इस तरह घर-घर में पॉपुलर हुईं सुधा शिवपुरी
क्योंकि सास भी कभी बहू थी की एक झलक.

सुधा शिवपुरी ने अपने कारियर की शुरुआत साल 1977 में आई डायरेक्टर बासु चैटर्जी की फिल्म 'स्वामी' के साथ की थी. इसके बाद कई बड़ी फिल्मों में नजर आईं.

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मुंबई. एकता कपूर के मशहूर टीवी सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में 'बा' का किरदार निभाने वाली सुधा ‌शिवपुरी का जन्म 14 जुलाई 1937 को हुआ था. उन्होंने 20 मई 2015 को इस दुनिया को अलविदा कहा था. इसके बीच में उन्होंने बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री से लेकर टीवी तक में एक्टिंग करती रहीं. हालांकि बेहद शानदार फिल्मों में अभिनय करने के बाद उन्हें पहचान 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से मिली.

जबकि सुधा ने अपने कारियर की शुरुआत साल 1977 में आई डायरेक्टर बासु चैटर्जी की फिल्म 'स्वामी' के साथ की थी. लेकिन तीन दशक काम के बाद भी बतौर बॉलीवुड कलाकार वो अपनी जगह नहीं बना सकीं. हालांकि उनके करियर में बॉलीवुड की 'इंसाफ का तराजू', 'हमारी बहू अलका', 'सावन को आने दो,' 'सुन मेरी लैला', 'बर्निंग ट्रेन', 'विधाता', 'माया मेमसाब' और 'पिंजर' जैसी कई बेहतरीन फिल्में आईं. लेकिन इतनी शानदार फिल्मों के बावजूद वो अपनी जगह बनाने में असफल रहीं.

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हालांकि कहते हैं कि प्रतिभा कभी किसी खास चीज का मोहताज नहीं होती ठीक उसी तरह सुधा ने एकता कपूर के सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से अपनी जगह बना ली. उन्हें देश के घर-घर में बतौर 'बा' पहचान मिल गई. इसके बाद सुधा शिवपुरी ने 'शीशे के घर', 'आ बैल मुझे मार', 'वक्त का दरिया', 'दामन', 'संतोषी मां', 'कसम से' और 'किस देश में है मेरा दिल' जैसे कई अन्य सीरियल्स में भी काम किया था.
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