'जिसके साथ होता है, वही समझ सकता है', भव्या गांधी के पापा को तारक मेहता के 'गोगी' ने दी श्रद्धांजलि

भव्या गांधी और समय शाह दोनों कजिन्स हैं.

भव्या गांधी और समय शाह दोनों कजिन्स हैं.

समय शाह (Samay Shah) ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर भव्या गांधी (Bhavya Gandhi) के पिता विनोद गांधी (Vinod Gandhi) संग अपनी एक फोटो शेयर करते हुए इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखी है.

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मुंबई. टीवी के सबसे चर्चित शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashma) के पुराने 'टप्पू' यानी भव्या गांधी (Bhavya Gandhi) के पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. लाख कोशिशों के बाद भी भव्या अपने पिता विनोद गांधी (Vinod Gandhi) को नहीं बचा सके. कोरोना संक्रमण के कारण मंगलवार को पुराने 'टप्पू' के पापा का निधन हो गया, उनका कोकिलाबेन अस्पताल में इलाज चल रहा था. विनोद गांधी के निधन पर शो में 'गोगी' का किरदार निभाने वाले समय शाह (Samay Shah) ने भव्या के पिता को श्रद्धांजलि देते हुए इमोशनल पोस्ट लिखी है.

भव्या गांधी (Bhavya Gandhi) और समय शाह (Samay Shah) दोनों कजिन्स हैं. समय ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर भव्या के पिता विनोद संग अपनी एक फोटो शेयर करते हुए इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखी है.

उन्होंने लिखा, 'जिसके साथ होता है, वही समझ सकता है. औरों को तो सिर्फ दिखावे का खेल रचना होता है. औरों को तो बस दूर बैठकर बातें बनानी होती हैं. मगर, असल में जिसके साथ होता, वही किसी को खोता. और फिर रोते-रोते खुद को ही चुप कराता. अंधेरे में चीखता और पूछता कि आखिर मेरे साथ ही क्यों? क्यों सिर्फ मेरे साथ ही ऐसा होता?'

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भव्या के पिता कंस्ट्रक्शन बिजनेस में थे. आपको बता दें कि स्पॉटबॉय को दिए इंटरव्यू में विनोद गांधी की पत्नी यशोदा गांधी ने उन्हें बचाने के अपने संघर्ष के बारे में जानकारी दी थी. उन्होंने बताया कि दो दिनों में जब उनका इंफेक्शन डबल हो गया तो उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट कराने की जंग शुरू हुई, लेकिन कहीं बेड नहीं मिल रहा था. जहां भी फोन करो तो बताते थे कि बीएमसी में रजिस्ट्रेशन कराओ, जब नंबर आएगा तो बुलाएंगे. भव्या के मैनेजर के हेल्प से उन्हें एक हॉस्पिटल में ए़डमिट कराया गया. 2 दिन बाद उसने उन्हें आईसीयू में रखने के लिए दूसरे हॉस्पिटल में शिफ्ट करने को कहा, क्योंकि वहां आईसीयू नहीं था.'

गांधी ने आगे बताया कि, 'आईसीयू बेड्स के लिए मैंने कम से कम 500 कॉल किए. अस्पताल, राजनेता, कार्यकर्ताओं से लेकर एनजीओ तक, मेरे परिवार के सदस्यों ने भी कोशिश की, लेकिन आईसीयू बेड नहीं मिला. मैं और मेरा परिवार असहाय महसूस कर रहे थे. इसके बाद मेरे एक दोस्त ने गोरेगांव के छोटे से अस्पताल में आईसीयू बेड की व्यवस्था कराई.'

इसके बाद डॉक्टर ने मुझे 'टॉक्सिन' इंजेक्शन की व्यवस्था करने के लिए कहा. मुझे यह बताने में बहुत बुरा लगता है कि जो इंजेक्शन देश में बनता है वो मुझे नहीं मिला. मुझे दुबई से इंजेक्शन मंगाना पड़ा और 45 हजार के इंजेक्शन के लिए 1 लाख रुपये चुकाने पड़े फिर भी हम उनकी जान नहीं बचा सके.

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