मशहूर कार्टूनिस्ट केसी शिव शंकर का निधन, 'विक्रम बेताल' से मिली थी पहचान

केसी शिव शंकर ने 60 से ज्यादा सालों तक उन्होंने कला के क्षेत्र में अपना योगदान दिया है.
केसी शिव शंकर ने 60 से ज्यादा सालों तक उन्होंने कला के क्षेत्र में अपना योगदान दिया है.

केसी शिवशंकर (KC Shivshankar) ने 60 से ज्यादा सालों तक उन्होंने कला के क्षेत्र में अपना योगदान दिया है. सोशल मीडिया पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 9:02 AM IST
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मुंबई. मशहूर चित्रकार केसी शिवशंकर (Veteran illustrator KC Shivshankar) का निधन हो गया है. उन्होंने मंगलवार (29 सितंबर) को चेन्नई में 97 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. उन्हें चंदा मामा के नाम से लोग जानते हैं.  विक्रम बेताल (Vikram Betaal) की कहानियों को चंदामामा मैगजीन में चित्रित करने के बाद उन्हें देशभर में विशेष पहचान मिली. इसके अलावा उन्होंने कई कार्टून्स चित्रित किए थे. केसी शिवशंकर ने  60 से ज्यादा सालों तक उन्होंने कला के क्षेत्र में अपना योगदान दिया है.

सोशल मीडिया (Social Media) पर जैसे ही ये खबर आई, लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने लगे. जिन लोगों ने चंदा मामा मैगजीन पढ़ीं हैं, वह अपने बचपन को याद कर केसी शिवशंकर (KC Shivshankar) की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने लगे.

चन्दामामा बच्चों और युवाओं पर केंद्रित एक लोकप्रिय मासिक पत्रिका थी,  जिसमें भारतीय लोक कथाओं, पौराणिक और ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित कहानियां प्रकाशित होती थीं.



केसी शिवशंकर के निधन की खबर सुनते ही बेंगलुरु के पूर्व पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने अपनी बीते पलों के यादें ताजा की, जब बच्चे बड़े होकर चंदामामा पढ़ते थे. उन्होंने ट्वीट कर कहा- केसी शिवशंकर को श्रद्धांजलि, जिनका कल निधन हो गया. 60 से 1990 के दशक की पीढ़ी आगे बढ़ रही है. हमारे स्कूल में बेहद लोकप्रिय बहुभाषी नैतिक विज्ञान पत्रिका पढ़ रहे हैं. समय आगे बढ़ रहा है.



शिवशंकर का जन्म 1927 में हुआ था. साल 1934 में, वह अपनी मां और भाई-बहनों के साथ चेन्नई चले गए, जहां उन्होंने स्कूली शिक्षा ग्रहण की. बहुत छोटी सी उम्र में ही उन्होंने अपनी कलाकारी से स्कूल के शिक्षकों का दिल जीत लिया था. शिवशंकर ने बहुत छोटी सी उम्र में अपने प्राचार्य डीपी रॉय चौधरी को एक ब्रश तकनीक के साथ चकित कर दिया जब उन्होंने एक गजब की कलाकारी कर दिखाई थी. शिवशंकर को 1952 में नागी रेड्डी ने काम पर रखा था और उन्होंने राजा विक्रम को साठ के दशक के आस-पास अपने कंधे पर बेताल की लाश को ले जाते हुए बनाई थी.
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