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Escaype Live Review: लोकप्रियता की होड़ में नैतिकता की बलि चढ़ा रही है वेब सीरीज

एस्केप लाइव डिज्नी+हॉटस्टार पर स्ट्रीम हुई है.

एस्केप लाइव डिज्नी+हॉटस्टार पर स्ट्रीम हुई है.

Escaype Live Review: इस सीरीज की एक खासियत है अनुभवी एडिटर चन्दन अरोरा की एडिटिंग. एक भी कट ऐसा नहीं है जिस से एक कहानी खत्म होने की और दूसरी शुरू होने की फीलिंग आये.  कॉन्टेंट की बाढ़ में कहीं ये अच्छी सी वेब सीरीज कहीं छूट न जाए. इसे ज़रूर देखिये, अपने परिवार के बच्चों को भी दिखाइए जो आजकल इन्फ्लुएंसर बनने को सबसे बढ़िया काम मानते हैं.

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सोशल मीडिया के दुष्परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं. फेसबुक पर कमैंट्स के ज़रिये जहालत परोसी जा रही है. ट्विटर पर अनजान शख्स गरिया रहा है, गालियां दे रहा है और कभी कभी हत्या की धमकियां भी मिल रही हैं. इंस्टाग्राम पर अश्लीलता परोसी जाती है तो कमैंट्स में भी वैचारिक कंगाली और हवस का प्रदर्शन किया जाने लगा है. सबसे ज़्यादा नुकसान टिकटॉक की वजह से हुआ है. लोकप्रिय होने के लिए देश-विदेश में लोग छोटे छोटे वीडियो बना कर अपलोड करने लगे. कॉन्टेंट की इतनी कमी थी और भूख इतनी ज़्यादा कि इस एप पर करोड़ों लोगों ने छोटे छोटे वीडियो देखना शुरू कर दिए और जल्द ही कोने कोने में छिपी प्रतिभाओं के साथ, कुछ घटिया कॉन्टेंट भी दिखाई देने लगा. जल्द ही वो परिस्थिति आ गयी कि अच्छे कॉन्टेंट के बजाये क्रिंज कॉन्टेंट चल पड़ा. बस स्टैंड पर मिलने वाली चुटकुलों की किताब से चुटकुले चुरा कर लेकर, अश्लील और घटिया भाषा वाले वीडियो भी चल पड़े. नग्नता और फूहड़ भाव भंगिमा वाले डांस वीडियोस की भरमार हो गयी. इसमें बढ़ौतरी का एक कारण ये भी था कि ऐसे कॉन्टेंट बनाने वालों को प्रश्रय देने के लिए कुछ कम्पनीज ने पैसे भी देना शुरू कर दिया. भारत में टिकटॉक बैन किया गया तो उसके कई हमशकल कूद पड़े. इंस्टाग्राम रील्स ने पूरे मार्किट पर एक तरह से कब्ज़ा कर लिया और ऐसे कॉन्टेंट क्रिएटर जिनको पसंद करने वालों की संख्या लाखों करोड़ों में हैं, उन्हें बड़े छोटे सभी किस्म के प्रोडक्ट्स और ब्रांड्स संपर्क करने लगे. ऐसे प्लेटफॉर्म की वजह से फायदा कम नुक्सान ज़्यादा होता है. इसका सजीव चित्रण डिज्नी+ हॉटस्टार की नयी वेब सीरीज ‘एस्केप लाइव’ में दिखाया गया है. इसका फाइनल एपिसोड अभी आना बाक़ी है लेकिन 7 एपिसोड में दिखाया है कि पैसा और लोकप्रियता पाने के लिए लोग क्या क्या हथकंडे आजमाने के लिए तैयार हैं और किस तरह आर्थिक रूप से कमज़ोर व्यक्ति इन प्लेटफॉर्म्स पर अपनी ज़िन्दगी होम करने को तैयार हैं.

एस्केप लाइव वीभत्स है क्योंकि ये सच है. ये आम आदमी की मानसिक स्थिति का फायदा उठा कर उन्हें पैसों और प्रसिद्धि का प्रलोभन दे कर रातों रात सितारा और रईस बनाने की स्कीम है. एस्केप लाइव एक वीडियो प्लेटफार्म है जिस पर अकाउंट बना कर लोग अपने वीडियो डाल सकते हैं. लोग इन वीडियो को देख कर पसंद आने पर आपको हार्ट इमोजी भेज सकते हैं. ज़्यादा पसंद आने पर आपको डायमंड भेज सकते हैं. जहाँ हार्ट इमोजी फ्री है वहीँ डायमंड की कीमत है 5 रुपये और इसमें से आधा एस्केप लाइव को और आधा वीडियो अपलोड करने वाले के बैंक अकाउंट में जाता है. एस्केप लाइव एक प्रतियोगिता रखता है जिसमें इन कॉन्टेंट क्रिएटर्स के बीच ज़्यादा डायमंड पाने की स्पर्धा होगी. इस चक्कर में फंस जाते हैं – जैसलमेर में रहने वाली एक छोटी सी बच्ची जो अपने डांस वीडियो अपलोड करती है, बनारस का एक जवान बैंक कर्मी जो लड़की बन कर अपने वीडियो डालता है, मुंबई के एक धोबी का बेटा जो पार्कोर स्टंट के वीडियो डालता है, एक रेस्टोरेंट में काम करने वाली लड़की जो लड़कों को रिझाने वाले और अश्लील किस्म के वीडियो डालती है, और बाल सुधार गृह से भागा एक लड़का जो खुद को तुर्रम खान समझता है और प्रैंक वीडियो बना कर डालता है. 30 दिन में जिसको सबसे ज़्यादा डायमंड मिलेंगे उसे 3 करोड़ रुपये मिलेंगे. पूरी वेब सीरीज में हर किरदार की ज़िन्दगी की परेशानियों से लेकर उनके कॉन्टेंट क्रिएट करने की कहानी के सुर और ताल मिला कर एस्केप लाइव प्लेटफॉर्म में चल रही धांधलियों को दर्शकों के सामने ला रखा है.

इस वेब सीरीज की सिर्फ तारीफ की जा सकती है क्योंकि इस वेब सीरीज में हर किरदार और हर दृश्य बड़ा सोच समझ कर लिखा और निर्देशित किया गया है. लेखक द्वय जया मिश्रा और सिद्धार्थ कुमार तिवारी द्वारा एक एक सीन पर काफी मेहनत की है. जिस तरह के किरदार गढ़े गए हैं वो हमारे आसपास देखने को मिलते हैं. शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर कॉन्टेंट डालने की ज़िद रखने वाले नमूने भी बहुतायत से मिल जाते हैं. छोटे शहरों में ये ट्रेंड कुछ और भी खतरनाक हो चला है. छोटे छोटे बच्चे अश्लील भावभंगिमाओं वाले फ़िल्मी नृत्यों की कॉपी कर के अपने वीडियो बनाते हैं. लोगों के लाइक और कमेंट दिमाग खराब करने के लिए काफी होते हैं. एस्केप लाइव में फेटिश गर्ल (प्लाबिता बोरठाकुर) नाम का किरदार है जो स्ट्रिपटीज़ कर के, कामोत्तेजक नृत्य कर के हार्ट और डायमंड बटोरने में माहिर है. बात अजीब हो सकती है लेकिन हाल ही में बहुत चर्चित वेब सीरीज लॉकअप (कंगना राणावत/ एकता कपूर) ने ऐसे ही नृत्य करने वाली एक सोशल मीडिया स्टार अंजलि को और कपडे उतर कर अपने बदन की नुमाइश करने वाली पूनम पांडे को अपने शो में जगह दी थी.

निर्देशक सिद्धार्थ कुमार तिवारी दरअसल टेलीविज़न की दुनिया के सबसे सफल प्रोड्यूसर हैं. उनकी कंपनी स्वस्तिक प्रोडक्शंस ने अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो, बंधन, महाभारत, रज़िया सुल्तान, सूर्यपुत्र कर्ण, पोरस, महाकाली जैसे कई सत्यंत सफल और लोकप्रिय धारावाहिकों का निर्माण किया है. सिद्धार्थ ने इसके पहले पोरस और राधाकृष्ण जैसे टेलीविज़न सीरियल निर्देशित किये हैं. वेब सीरीज की दुनिया में एस्केप लाइव उनका पहला कदम माना जा सकता है. जावेद जाफरी ने एस्केप लाइव के सीईओ की बड़ी अच्छी भूमिका निभाई है. उनका रोल छोटा है लेकिन वो अपने किरदार में रमे हुए हैं. सिद्धार्थ का किरदार भी सोच समझ कर रचा गया है. वो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है लेकिन एस्केप लाइव में ज़्यादा तनख्वाह पाने की लालच में वो मॉडरेटर बन जाता है. उसकी नैतिकता उसकी राह में रोड बनती है लेकिन उसका फेटिश गर्ल से बातचीत करना उसके दिमाग को खोल देता है. उनके किरदार में परिवर्तन बहुत सहज और अच्छे तरीके से दिखाया गया है. श्वेता त्रिपाठी का किरदार अजीब सा है, बनारस जैसे शहर में इस तरह के किरदार की उम्मीद नहीं की जाती. स्वास्तिका मुख़र्जी इतनी मांजी हुई कलाकार हैं कि रोल कोई भी हो, वो बस उन्हीं को देख के लिखा गया है ऐसा लगता है.

कृष्ण की भूमिका के लिए प्रसिद्ध सुमेध मुद्गलकर ने अपनी छवि के ठीक विपरीत जाते हुए एक नेगेटिव शेड वाला कैरेक्टर डार्की निभाया है. सीरीज में थ्रिल इन्ही की वजह से आता है. अंतिम एपिसोड में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी. राजकुमार का थोड़ा अविश्वसनीय लेकिन सच्चाई से भरा किरदार निभाया है रोहित चंदेल ने. इतनी मुश्किल भूमिका के लिए हां करना बड़ी बात रही होगी. कई छोटी बड़ी वेब सीरीज में किरदार निभाने के बाद ऋत्विक सहोरे (आमचा स्पाइडर) को एक ऐसा किरदार मिला है जो कि प्रसिद्धि की अंधी दौड़ में घरवालों को दुत्कार देने से भी पीछे नहीं हटता। सबसे ज़ोरदार किरदार हालाँकि सबसे छोटी बच्ची डांस रानी यानि आद्या शर्मा का है जिसे उसकी माँ की महत्वकांक्षा और उसके मामा का लालच समय से पहले बड़ा करने के लिए हॉर्मोन के इंजेक्शन लगवाता है. इस किरदार को ध्यान से देखना चाहिए क्योंकि इसका कैरेक्टर ग्राफ अधिकांश छोटी बच्चियों का हो सकता है जिनके मां या बाप अपनी महत्वाकांक्षा को उनके ज़रिये पूरा करना चाहते हैं.

इस सीरीज की एक खासियत है अनुभवी एडिटर चन्दन अरोरा की एडिटिंग. एक भी कट ऐसा नहीं है जिस से एक कहानी खत्म होने की और दूसरी शुरू होने की फीलिंग आये. हर दृश्य दूसरे दृश्य में कुछ इस अंदाज़ से मिल जाता है कि आप उठ कर नहीं जा सकते. कमाल काम है. इस सीरीज का फिनाले यानी आखिरी एपिसोड 27 मई को दिखाया जाएगा. कॉन्टेंट की बाढ़ में कहीं ये अच्छी सी वेब सीरीज कहीं छूट न जाए. इसे ज़रूर देखिये, अपने परिवार के बच्चों को भी दिखाइए जो आजकल इन्फ्लुएंसर बनने को सबसे बढ़िया काम मानते हैं.

Tags: Film review, Hotstar, Javed Jaffrey

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