Home /News /etv-shows /

रुह को छू जाती है तलत की लरजिश आवाज़

रुह को छू जाती है तलत की लरजिश आवाज़

भूले बिसरे के इस बार के प्रोग्राम की इस कड़ी में हम सुन रहे हैं गजलों के शहंशाह और अभिनेता तलत महमूद की रेशमी...थरथराती आवाज में कुछ गाने.

    भूले बिसरे के इस बार के प्रोग्राम की इस कड़ी में हम सुन रहे हैं गजलों के शहंशाह और अभिनेता तलत महमूद की रेशमी...थरथराती आवाज में कुछ गाने. तलत महमूद को गाने का शौक तलत को बचपन से ही था. वे अपनी माता तथा गायक पिता की छठी संतान थे. उनके पिता अपनी आवाज को अल्लाह का दिया गला कहकर अल्लाह को ही समर्पित करने भर की इच्छा रखते थे और वे इस्लामिक धार्मिक गीत गाते थे. बचपन में तलत को अपने पिता की नकल करने की कोशिश की जिसका घर में ज्यादा समर्थन नहीं मिला. बुआ को तलत की आवाज की लरजिश (कंपन) पसंद थी. भतीजे तलत प्रोत्साहन पाकर गायन के प्रति आकर्षित होने लगे. सोलह साल की उम्र में तलत को कमल दासगुप्ता का गीत सब दिन एक समान नहीं गाने का मौका मिला. यह गीत प्रसारित होने के बाद लखनऊ में बहुत लोकप्रिय हुआ. लगभग एक साल के भीतर, प्रसिद्ध संगीत रि‍कॉर्डिंग कम्पनी एच एम वी की टीम कलकत्ता से लखनऊ आई और पहले उनके दो गाने रि‍कॉर्ड किए गए. उनके चलने के बाद तलत के चार और गाने रि‍कॉर्ड किए गए जिसमें ग़ज़ल तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी भी शामिल थी. यह ग़ज़ल बहुत पसन्द की गई और बाद में एक फिल्म में शामिल भी की गई.

    Tags: Talat mahmood

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर