'डायबिटीज के प्रमुख कारण हैं सफेद चीनी, मैदा और चावल'

भारत में शुगर, महामारी की तरह फैल रहा है और इस बीमारी की मुख्य वजह लाइफ स्टाइल और खानपान में बदलाव है.
भारत में शुगर, महामारी की तरह फैल रहा है और इस बीमारी की मुख्य वजह लाइफ स्टाइल और खानपान में बदलाव है.

भारत में शुगर, महामारी की तरह फैल रहा है और इस बीमारी की मुख्य वजह लाइफ स्टाइल और खानपान में बदलाव है.

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भारत में डायबिटीज (शुगर), महामारी की तरह फैल रहा है और इस बीमारी की मुख्य वजह लाइफ स्टाइल और खानपान में बदलाव है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का मानना है कि इस बीमारी के प्रमुख कारणों में हमारे रोजमर्रा के खाने में सफेद चीनी, मैदा और चावल जैसी खाद्य वस्तुओं की अधिकता है.

आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर के.के. अग्रवाल ने बताया कि रिफाइंड चीनी में कैलोरी की भारी मात्रा होती है, जबकि पोषक तत्व बिल्कुल नहीं होते. इसके उपयोग से पाचन तंत्र (डाइजेस्टिव सिस्टम) पर काफी बुरा असर पड़ सकता है और शुगर जैसी लाइफ स्टाइल से जुड़ी अनेकों बीमारियां होती हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में पैकेट बंद खाद्य पदार्थ हर घर में जगह बना चुके हैं. आटे का उदाहरण लें तो यदि आटे में मैदा ना मिलाया जाए तो वह ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकता. इसी तरह, मैदे से बनी ब्रैड ने लगभग हर परिवार में सुबह के नाश्ते में अपनी जगह बना ली है. सीधा गेहूं पिसवाकर मिले आटे में चोकर होता है, जबकि बाजार के आटे में मैदा मिली होती है.

एम्स के डाक्टर संदीप मिश्र का कहना है कि खून में शुगर की मात्रा तेजी से बढ़ाने में रिफाइंड काब्रोहाइड्रेट का अहम योगदान है जो कि मैदा जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है. मीठी चीजों का अगर सेवन करना ही हो तो देशी गुड़ या शहद उपयुक्त ऑपशन हैं. मिश्र ने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक, देश की आबादी में 30 साल से ऊपर की उम्र के करीब 10 प्रतिशत लोग शुगर की बीमारी से ग्रस्त हैं या इसके करीब हैं.



अग्रवाल ने कहा कि इसी तरह, पहले सफेद चावल खाने की परंपरा नहीं थी, लेकिन आज छिलका उतरा हुआ सफेद चावल ही हर जगह खाया जाता है. कुल मिलाकर कृत्रिम सफेद चीजों ने हमारे जीवन में जहर घोल दिया है.
उन्होंने कहा कि हमारे देश में व्रत आदि रखने की परंपरा के वैज्ञानिक कारण थे. अन्न दोष से बचने के लिए लोग हफ्ते में एक दिन व्रत रखते और उस दिन गेहूं से बनी चीजों का परित्याग करते थे. इसी तरह, महीने में एक दिन चावल का परित्याग करते थे. इससे उनकी इंसुलिन प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती थी.
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