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गया में पितृपक्ष के दौरान निगम का 'पिंडदान पैकेज'

गया में पितृपक्ष के दौरान निगम का 'पिंडदान पैकेज'

हिन्दू रीति-रिवाजों एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति एवं मुक्ति के लिए पिंडदान अहम कर्मकांड है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष को 'पितृपक्ष' या 'महालय पक्ष' कहा जाता है, जिसमें लोग पिंडदान करते हैं

हिन्दू रीति-रिवाजों एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति एवं मुक्ति के लिए पिंडदान अहम कर्मकांड है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष को 'पितृपक्ष' या 'महालय पक्ष' कहा जाता है, जिसमें लोग पिंडदान करते हैं

हिन्दू रीति-रिवाजों एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति एवं मुक्ति के लिए पिंडदान अहम कर्मकांड है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष को 'पितृपक्ष' या 'महालय पक्ष' कहा जाता है, जिसमें लोग पिंडदान करते हैं

    पटना। हिन्दू रीति-रिवाजों एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति एवं मुक्ति के लिए पिंडदान अहम कर्मकांड है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष को 'पितृपक्ष' या 'महालय पक्ष' कहा जाता है, जिसमें लोग पिंडदान करते हैं। ऐसे तो पिंडदान कई धार्मिक स्थानों पर होता है परंतु सबसे उपयुक्त स्थल बिहार के गया को माना जाता है।

    इस साल एक अक्टूबर से शुरू होने वाले पितृपक्ष के दौरान गया में लाखों लोगों की जुटने की संभावना है। यहां लोगों को सुविधाएं देने के लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ने नई पहल के तहत पितृपक्ष टूर पैकेज तैयार किया है। इस पैकेज में वाहन, होटल और पूजा सामग्री के साथ ही साथ पंडों की भी व्यवस्था की गई है।

    पर्यटन निगम के एक अधिकारी ने बताया कि पर्यटक और श्रद्घालु टूर पैकेज की ऑन लाइन बुकिंग करा सकेंगे। पैकेज में गया के अलावा पुनपुन नदी को भी शामिल किया गया है। मान्यता है कि पिंडदान के दौरान पहला पिंड पुनपुन नदी के किनारे ही दिया जाता है।

    राज्य के पर्यटन विभाग के मंत्री सुनील कुमार पिंटू ने बताया कि यह नई शुरूआत है। उन्होंने बताया कि इसके जरिये कोई भी व्यक्ति दुनिया के किसी स्थान से इस टूर पैकेज के लिए बुकिंग करा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के अलावा बाहर से आने वाले लोगों को भी काफी सुविधा होगी।

    इधर, निगम के एक अधिकारी की मानें तो प्रतिदिन बुकिंग का कार्य हो रहा है जबकि कई लोग इसकी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इस पैकेज में श्रद्घालुओं के लिए निगम ने अक्षयवट, फल्गु और विष्णुपद में पिंडदान कराने की व्यवस्था की है। पटना से अपनी यात्रा की शुरुआत करने वाले तीर्थयात्री को निगम सुबह ले जाएगा और शाम को पिंडदान कराकर वापस पटना ले आएगा। एसी कार, भोजन समेत सभी सुविधाएं निगम द्वारा दी जाएगी। एक व्यक्ति पर 6,270 जबकि दो व्यक्तियों के होने पर प्रति व्यक्ति 3,530 रुपए खर्च करने होंगे।

    अधिकारियों के अनुसार गया से पैकेज लेने वालों के लिए अलग मूल्य रखा गया है, जिसमें गया से राजगीर और नालंदा भ्रमण को भी शामिल किया गया है।

    पिंडदान के लिए गया को सर्वोतम माना गया है। मान्यता है कि पिंडदान के लिए मोक्षदायिनी भूमि में 45 वेदियां विद्यमान हैं, जहां पिंडदान किया जाता है। फल्गु नदी के तट पर बसे गया में विष्णुपद मंदिर के अलावे अन्य पिंड स्थलों में रामशीला, प्रेतशीला, मंगला गौरी, सूर्यकुंड, गोप्रचारिणी, ब्रह्मसरोवर, फल्गु घाट, गयासुर वेदी, सीताकुंड, रामकुंड, देवघाट, कागबलि प्रमुख स्थल हैं।

    इधर, गया के पंडा बद्रीनाथ बताते हैं कि पैकेज से जहां श्रद्घालुओं की संख्या में इजाफा होगा वहीं बाहर से आने वाले यात्रियों को भी अच्छी सुविधा मिल सकेगी। उनका कहना है कि इस बार पिछले साल से भीड़ बढ़ने की संभावना है।

    राज्य के पर्यटन मंत्री कहते हैं कि ऐसे तो पिछले कई सालों से निगम टूर पैकेज चला रहा है परंतु इस साल दलालों के चक्कर से श्रद्धालुओं को बचाने के लिए एकीकृत टूर पैकेज तैयार किया गया है। उनका मानना है कि इस पैकेज से जहां निगम की आमदनी भी बढ़ेगी वहीं श्रद्घालुओं को भी सुविधा मिलेगी।

    Tags: गया, नालंदा, पटना, बिहार

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