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पितरों की याद में पौधरोपण, पौधे के सामने पितर का नाम!

 इस योजना के मुताबिक सम्बंधित व्यक्ति अपने पूर्वज का नाम, पता और निधन की तारीख का ब्योरा देते हैं और उन नामों से पूरे 15 दिन तर्पण किया जाता है और पितरों के नाम से पौधरोपण किया जाता है।

इस योजना के मुताबिक सम्बंधित व्यक्ति अपने पूर्वज का नाम, पता और निधन की तारीख का ब्योरा देते हैं और उन नामों से पूरे 15 दिन तर्पण किया जाता है और पितरों के नाम से पौधरोपण किया जाता है।

इस योजना के मुताबिक सम्बंधित व्यक्ति अपने पूर्वज का नाम, पता और निधन की तारीख का ब्योरा देते हैं और उन नामों से पूरे 15 दिन तर्पण किया जाता है और पितरों के नाम से पौधरोपण किया जाता है।

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    इंदौर। पितृपक्ष अपने पितरों को याद करने का अवसर होता है। सभी अपनी-अपनी तरह से पूर्वजों का स्मरण करते हैं, मगर इंदौर के सूर्योदय आश्रम ने पितरों की याद को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए पौधरोपण किया जाता है। हर साल की भांति इस बार भी यहां पौधरोपण की मुहिम शुरू हो गई है। आश्रम का प्रबंधन रोपे गए पौधों के रखरखाव की भी जिम्मेदारी लेता है।

    सनातन धर्म की परंपरा के मुताबिक पितृपक्ष में पूरे 15 दिन पूर्वजों को याद किया जाता है। मान्यता है कि पितरों का अस्तित्व किसी न किसी रूप में है और वे हमारे बीच मौजूद हैं, क्योंकि आत्मा अमर है। इन दिनों में पितरों का स्मरण कर पिंडदान से लेकर अन्नदान व वस्त्रदान कर कष्टों से मुक्ति की कामना की जाती है।

    एक तरफ जहां लोग अपने पुरखों का स्मरण कर दान-पूजन आदि कर उनकी आत्मा की शांति के लिए कामना करते हैं, वहीं इंदौर में आध्यात्मिक संत भय्यूजी महाराज की प्रेरणा से चल रहे सूर्योदय आश्रम ने पूर्वजों की याद को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए पौधरोपण का अभियान शुरू किया है। इस आश्रम में लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। आमजन यहां अपने पूर्वजों के नाम पर पौधे रोपते हैं।

    आश्रम के योग साधना प्रभाग की डॉ सुरेखा चौधरी बताती हैं कि आध्यात्मिक दृष्टि और वैज्ञानिक नजरिए को ध्यान में रखकर पितृपक्ष में पौधरोपण अभियान चलाया गया है। इस योजना के मुताबिक सम्बंधित व्यक्ति अपने पूर्वज का नाम, पता और निधन की तारीख का ब्योरा देते हैं और उन नामों से पूरे 15 दिन तर्पण किया जाता है और पितरों के नाम से पौधरोपण किया जाता है। हर पौधे के सामने पितर का नाम और निधन की तिथि लिखी तख्ती लगाई जाती है।

    डॉ सुरेखा ने बताया कि यहां ज्यादातर देववृक्ष यानी पीपल, बरगद व ओदंबर आदि के पौधे लगाए जाते हैं। रोपे गए पौधे की तख्ती समेत तस्वीर सम्बंधित परिजनों को भेजी जाती है, ताकि वे कभी भी आकर उस पौधे को या बढ़ने पर उस वृक्ष को पहचान सकें।

    आश्रम के पुजारी डॉ चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि इंदौर स्थित आश्रम में पितृपक्ष में विशेष पूजा का दौर चलता है। इस दौरान कन्या भोज व हवन भी होते हैं। अंतिम दिन भय्यूजी महाराज के सान्निध्य में महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के खामगांव में ऋषि संकुल पारदी आश्रम के अलावा प्रस्तावित पितृवन में पौधों का रोपण किया जाता है। यह सिलसिला बीते पांच सालों से चला आ रहा है।

    सूर्योदय आश्रम से जुड़े राजेंद्र उपाध्याय ने कहा कि देश में बढ़ती 'ग्लोबल वार्मिंग' दुनिया के लिए बड़ा खतरा है। इसलिए भय्यूजी महाराज ने इसके निदान के लिए पौधरोपण को प्रभावकारी अस्त्र माना है, लिहाजा उनके निर्देशन में यह अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में ऐसे पौधों को रोपा जाता है, जिनका जीवन काल लम्बा होता है और अधिक मात्रा में ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं। बीते पांच सालों में पितृपक्ष के दौरान यहां हजारों पौधों का रोपण किया जा चुका है।

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